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Hyderabad हैदराबाद। भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के कार्यकारी अध्यक्ष केटी रामाराव (केटीआर) ने गुरुवार को मांग की कि यदि तेलंगाना सरकार विधानसभा में पावरपॉइंट प्रेजेंटेशन (पीपीटी) देने जा रही है, तो संसदीय लोकतंत्र की भावना के तहत प्रमुख विपक्षी दल बीआरएस को भी ऐसा ही अवसर दिया जाना चाहिए। तेलंगाना भवन में मीडिया से बात करते हुए केटीआर ने कहा कि एक बार विधायक विधानसभा में प्रवेश कर लेते हैं, तो मुख्यमंत्री और एक सामान्य विधायक के बीच कोई भेद नहीं रहता।
उन्होंने कहा, “सदन के पटल पर सभी 120 विधायकों के समान अधिकार हैं। यदि सरकार अपना पक्ष रखती है, तो विपक्ष को भी अपने तथ्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर मिलना चाहिए। गौरतलब है कि तेलंगाना सरकार शुक्रवार को विधानसभा में सिंचाई परियोजनाओं और नदी जल-बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर एक पावरपॉइंट प्रस्तुति देने की संभावना है। केटीआर ने कहा, “आप अपना पक्ष रखें और हमें भी अपना पक्ष रखने दीजिए। प्रमुख विपक्ष होने के नाते हम पूरी तरह तैयार हैं यह बताने के लिए कि बीआरएस शासन के पिछले दस वर्षों में तेलंगाना की कृषि और सिंचाई व्यवस्था में किस तरह व्यापक परिवर्तन आया।”
उन्होंने दावा किया कि बीआरएस के पास तथ्यों और आंकड़ों के साथ विधानसभा के समक्ष अपनी बात रखने की पूरी तैयारी है। एक पुराने उदाहरण का हवाला देते हुए केटीआर ने कहा कि 31 मार्च 2016 को जब तत्कालीन मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव ने विधानसभा में पावरपॉइंट प्रस्तुति दी थी, तब कांग्रेस पार्टी ने इसे संसदीय परंपराओं के खिलाफ बताते हुए सदन का बहिष्कार किया था। उन्होंने सवाल किया, “जो बात तब अस्वीकार्य थी, वह आज अचानक कैसे स्वीकार्य हो गई?”
केटीआर ने बताया कि इस मुद्दे पर निष्पक्षता और विपक्ष को समान अवसर देने की मांग करते हुए स्पीकर को पत्र सौंपा गया है। कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला करते हुए केटीआर ने मुख्यमंत्री की सिंचाई और नदी जल संबंधी समझ पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने सार्वजनिक रूप से यह दावा किया कि भाखड़ा नांगल परियोजना तेलंगाना में स्थित है, जबकि वास्तव में वह हिमाचल प्रदेश में है। केटीआर ने तंज कसते हुए कहा, “जो मुख्यमंत्री बुनियादी नदी बेसिन तक नहीं जानते, वे हमें सिंचाई पर उपदेश देना चाहते हैं?”
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री को देवदुला परियोजना के नदी बेसिन की जानकारी तक नहीं है।
बीआरएस नेता ने सिंचाई क्षेत्र में सरकार की कथित विफलताओं का जिक्र करते हुए श्रीशैलम लेफ्ट बैंक कैनाल टनल हादसे, जिसमें आठ लोगों की मौत हुई थी, सुनकीशाला परियोजना के ढहने और वट्टेम पंप हाउस के जलमग्न होने की घटनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने सवाल किया, “हमें आपसे क्या सीखना चाहिए- चेक डैम कैसे फेल होते हैं, मेदिगड्डा कैसे गिरा, या कृष्णा जल में तेलंगाना के वैध हिस्से को कृष्णा रिवर मैनेजमेंट बोर्ड (केआरएमबी) को कैसे सौंपा गया?”
केटीआर ने कांग्रेस सरकार पर पलामूरु-रंगारेड्डी लिफ्ट सिंचाई योजना की पिछले दो वर्षों से उपेक्षा करने का भी आरोप लगाया और पूछा कि क्या मौजूदा शासन में एक भी अतिरिक्त एकड़ भूमि को सिंचाई का पानी मिला है।
उन्होंने अंत में सवाल उठाया, “क्या सरकार ने एक भी टैंक की मरम्मत की है या एक भी नहर को बहाल किया है?”
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