
Telangana तेलंगाना: भाजपा ने तमिलनाडु विधानसभा चुनाव के लिए अपनी पहली उम्मीदवार सूची जारी कर दी है, लेकिन इसमें पार्टी के पूर्व अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता के. अन्नामलाई का नाम शामिल नहीं था। इस खबर के बाद सोशल मीडिया और विभिन्न मंचों पर अन्नामलाई के नाम को सूची से हटाए जाने को लेकर अफवाहें तेज हो गईं।
इस मामले पर अन्नामलाई ने खुद मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा। कोयंबटूर से चेन्नई एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका चुनाव न लड़ने का फैसला पूरी तरह से व्यक्तिगत था। उन्होंने कहा, "मैंने कोर कमेटी को पहले ही लिखकर बता दिया था कि मैं किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ूंगा। इसलिए यह कहना गलत है कि मुझे टिकट नहीं दिया गया। सच तो यह है कि मैं चुनाव नहीं लड़ना चाहता था।"
अन्नामलाई ने कहा कि उनका नाम सूची से हटाए जाने की चर्चाओं को लेकर मीडिया में गलतफहमियां फैली हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर उन्होंने चुनाव नहीं लड़ने का निर्णय लिया था, तो पार्टी की नेतृत्व टीम उन्हें टिकट कैसे दे सकती थी। उन्होंने बताया कि उनका मकसद केवल तथ्यों को स्पष्ट करना और अफवाहों का अंत करना था।
पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने अपनी पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्होंने उनके फैसले का सम्मान किया। इसके साथ ही अन्नामलाई ने घोषणा की कि वे राज्य में NDA गठबंधन के सभी उम्मीदवारों के समर्थन में प्रचार करेंगे और पूरी तरह से उनकी मदद करेंगे। उन्होंने कहा, "राज्य में गठबंधन के उम्मीदवारों का मैं पूरा सपोर्ट करूंगा और उनके लिए प्रचार में सक्रिय रहूंगा।"
इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज चेन्नई पहुंचेंगे। अन्नामलाई ने बताया कि मोदी पहले पुडुचेरी में प्रचार करेंगे, फिर पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगे और इसके बाद कोच्चि के लिए आगे बढ़ेंगे।
बीजेपी द्वारा NDA के तहत जारी 27 उम्मीदवारों की सूची में अन्नामलाई का नाम न होना राजनीतिक चर्चा का प्रमुख विषय बना। पहले उनके नाम कोयंबटूर निर्वाचन क्षेत्र से जोड़ा गया था। सूत्रों के अनुसार, अन्नामलाई को सीट बंटवारे को लेकर असंतोष था, खासकर AIADMK द्वारा कोयंबटूर में महत्वपूर्ण सीटों पर नियंत्रण बनाए रखने को लेकर।
बताया जाता है कि 41 वर्षीय अन्नामलाई ने पार्टी की सेंट्रल लीडरशिप को पत्र लिखकर अपनी नाराजगी जताई थी और चुनाव से हटने का निर्णय लिया। उन्होंने सिंगनल्लूर निर्वाचन क्षेत्र भाजपा को दिए जाने की मांग की थी, लेकिन यह पूरी तरह नहीं हो पाया। इसके चलते उन्होंने चुनाव में हिस्सा न लेने का अंतिम निर्णय लिया।
राजनीतिक विशेषज्ञों का कहना है कि अन्नामलाई का यह कदम पार्टी के भीतर सीट बंटवारे और गठबंधन समीकरणों को लेकर स्पष्ट संदेश देता है। उनके चुनाव न लड़ने के बावजूद, पार्टी और गठबंधन के लिए उनका समर्थन महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस तरह, अन्नामलाई ने स्पष्ट कर दिया कि उनका चुनाव न लड़ना व्यक्तिगत निर्णय था और उन्होंने पार्टी नेतृत्व का सम्मान करते हुए आगे भी NDA के उम्मीदवारों का समर्थन करने का भरोसा दिया।





