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बोनालु में पोथाराजू का दिखा अनोखा रूप परंपरा और भक्ति का संगम
Hyderabad: तेलंगाना का प्रसिद्ध बोनालु उत्सव अपनी धार्मिक आस्था, पारंपरिक रीति-रिवाजों और रंग-बिरंगे जुलूसों के लिए जाना जाता है। इस उत्सव में पोथाराजू की भूमिका सबसे खास आकर्षणों में से एक होती है। शरीर पर हल्दी और सिंदूर लगाए, कमर में घंटियां बांधे और हाथ में कोड़ा लिए पोथाराजू देवी के जुलूस के आगे चलते हैं और भक्तों में उत्साह भरते हैं।
कौन होते हैं पोथाराजू?
लोक मान्यता में पोथाराजू को देवी महांकाली का भाई माना जाता है। बोनालु के दौरान वह देवी की शक्ति और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में जुलूस का नेतृत्व करते हैं। उनका पारंपरिक पहनावा भी काफी विशिष्ट होता है। शरीर पर हल्दी और सिंदूर, कमर में घंटियां और हाथ में कोड़ा उनकी पहचान माने जाते हैं।
कोड़े और घंटियों की गूंज से बनता है माहौल
बोनालु के जुलूस में पोथाराजू का नृत्य और उनकी ऊर्जावान गतिविधियां लोगों का ध्यान खींचती हैं। घंटियों की आवाज, ढोल-नगाड़ों की गूंज और भक्तों के जयकारों के बीच वह आगे बढ़ते हैं। कोड़ा भी इस परंपरा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसे धार्मिक प्रतीक के रूप में देखा जाता है और इससे जुड़ी परंपराएं अलग-अलग स्थानीय समुदायों में कुछ भिन्न हो सकती हैं।
देवी की पालकी के आगे चलते हैं
बोनालु जुलूस के दौरान पोथाराजू आमतौर पर देवी की पालकी या घटम के आगे चलते हैं। उनकी मौजूदगी जुलूस को विशेष ऊर्जा देती है और भक्तों के बीच धार्मिक उत्साह बढ़ाती है। उनके साथ पारंपरिक संगीत और नृत्य भी बोनालु के माहौल को और जीवंत बना देते हैं।
बोनालु में क्यों है खास महत्व?
बोनालु तेलंगाना का महत्वपूर्ण लोक एवं धार्मिक उत्सव है, जिसमें देवी महांकाली को भोजन का भोग अर्पित किया जाता है। श्रद्धालु सजाए हुए बर्तनों में बोनम लेकर देवी के मंदिर पहुंचते हैं। पोथाराजू इस पूरी परंपरा में शक्ति, सुरक्षा और भक्ति के प्रतीक के रूप में महत्वपूर्ण स्थान रखते हैं।
परंपरा और आधुनिक शहर का अनोखा मेल
हैदराबाद और तेलंगाना के अन्य हिस्सों में बोनालु के दौरान आधुनिक शहर की सड़कों पर सदियों पुरानी लोक परंपराओं की जीवंत झलक दिखाई देती है। पोथाराजू का पारंपरिक रूप इसी सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा है। बोनालु के जुलूस में उनकी मौजूदगी सिर्फ मनोरंजन या प्रदर्शन नहीं, बल्कि स्थानीय आस्था और तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी परंपरा है।
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