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हैदराबाद। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के तेजी से बढ़ते इस्तेमाल और रोजगार पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर देशभर में चर्चाएं तेज हैं। कई क्षेत्रों में ऐसी आशंका जताई जा रही है कि एआई के कारण आने वाले वर्षों में बड़ी संख्या में नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं। इसी बीच भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) की तेलंगाना राज्य परिषद के प्रमुख वीवी रामाराजू ने तकनीकी विकास से रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावनाओं पर जोर दिया है। उनके सकारात्मक रुख का मूल संदेश है कि नई तकनीक से घबराने के बजाय बदलते रोजगार बाजार के लिए तैयारी करना जरूरी है।एआई के बढ़ते प्रभाव को लेकर उद्योग जगत में दो तरह की राय सामने आ रही है। एक ओर विशेषज्ञों का मानना है कि ऑटोमेशन के कारण कई पारंपरिक काम मशीनों और सॉफ्टवेयर के जरिए किए जाने लगेंगे। दूसरी ओर नई तकनीकों के विकास से ऐसे क्षेत्रों में रोजगार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं, जिनकी कुछ वर्ष पहले कल्पना भी नहीं की गई थी।
एआई से रोजगार पर क्या पड़ेगा असर?
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल अब केवल सूचना प्रौद्योगिकी क्षेत्र तक सीमित नहीं रह गया है। बैंकिंग, स्वास्थ्य, शिक्षा, विनिर्माण, कृषि, परिवहन और ग्राहक सेवा जैसे क्षेत्रों में भी एआई आधारित तकनीकों का तेजी से विस्तार हो रहा है।कंपनियां अपने कामकाज को अधिक तेज, सटीक और किफायती बनाने के लिए एआई उपकरणों को अपना रही हैं। इससे डेटा एंट्री, सामान्य रिपोर्ट तैयार करने, दस्तावेजों के विश्लेषण और ग्राहक सहायता जैसे कुछ कामों में मानव श्रम की जरूरत कम हो सकती है।हालांकि, एआई प्रणालियों को विकसित करने, उनका परीक्षण करने, सुरक्षित रखने और व्यावसायिक जरूरतों के अनुसार उपयोग करने के लिए कुशल कर्मचारियों की आवश्यकता भी बढ़ सकती है।इस बदलाव का सबसे बड़ा प्रभाव कर्मचारियों की योग्यता और कौशल की मांग पर पड़ने की संभावना है।
तकनीकी विकास से पैदा होंगे नए अवसर
उद्योग जगत का एक वर्ग मानता है कि नई तकनीकें केवल मौजूदा नौकरियों को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि नए रोजगार क्षेत्रों को भी जन्म देती हैं।एआई के विस्तार से मशीन लर्निंग, डेटा साइंस, साइबर सुरक्षा, क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और डिजिटल उत्पाद विकास जैसे क्षेत्रों में नए अवसर सामने आ रहे हैं।इसके अतिरिक्त एआई प्रणालियों की गुणवत्ता जांच, डेटा प्रबंधन, तकनीकी सहायता और डिजिटल सेवाओं से जुड़े कामों में भी प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत हो सकती है।फिक्की की रिपोर्टों में भी इस बात पर जोर दिया गया है कि तेजी से बदलती तकनीक के अनुरूप शिक्षा, प्रशिक्षण और रोजगार व्यवस्था में बदलाव आवश्यक है।उद्योगों को ऐसे कर्मचारियों की जरूरत होगी, जो नई तकनीकों के साथ काम करने के साथ समस्याओं का समाधान भी कर सकें।
हैदराबाद बन रहा तकनीकी कंपनियों का प्रमुख केंद्र
तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद पहले से देश के प्रमुख सूचना प्रौद्योगिकी केंद्रों में शामिल है।यहां बड़ी संख्या में आईटी कंपनियां, स्टार्टअप और वैश्विक क्षमता केंद्र (GCC) काम कर रहे हैं।अक्टूबर 2026 में फिक्की तेलंगाना राज्य परिषद से जुड़ी एक रिपोर्ट में बताया गया था कि हैदराबाद में 500 से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्र मौजूद हैं, जिनमें तीन लाख से अधिक पेशेवर कार्यरत हैं।फिक्की तेलंगाना राज्य परिषद के अध्यक्ष वीवी रामाराजू ने भी हैदराबाद के तकनीकी और औद्योगिक विकास की संभावनाओं पर जोर दिया था।इन केंद्रों में एआई, इंजीनियरिंग, वित्तीय विश्लेषण और तकनीकी सेवाओं का विस्तार भविष्य में रोजगार के नए अवसर तैयार कर सकता है।
युवाओं के लिए कौशल विकास सबसे जरूरी
तकनीकी बदलाव के इस दौर में युवाओं के सामने सबसे बड़ी चुनौती नए कौशल सीखने की है।विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में केवल डिग्री हासिल करना पर्याप्त नहीं होगा। छात्रों और कर्मचारियों को अपने क्षेत्र से संबंधित नई तकनीकों की जानकारी भी रखनी होगी।कंप्यूटर प्रोग्रामिंग, डेटा विश्लेषण, डिजिटल संचार, साइबर सुरक्षा और एआई उपकरणों के व्यावहारिक इस्तेमाल जैसे कौशल उपयोगी साबित हो सकते हैं।इसके साथ ही रचनात्मक सोच, संवाद क्षमता, नेतृत्व और निर्णय लेने की योग्यता का महत्व भी बना रहेगा।तेलंगाना सरकार ने युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षित करने के लिए यंग इंडिया स्किल्स यूनिवर्सिटी और औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों को आधुनिक तकनीकी केंद्रों में विकसित करने जैसी पहल की हैं।राज्य की निवेश नीति में भी प्रशिक्षण संस्थानों, उद्योगों और नवाचार केंद्रों के बीच बेहतर सहयोग पर जोर दिया गया है।
एआई के कारण नौकरियों पर खतरे की आशंका भी
तकनीकी विकास के सकारात्मक पहलुओं के साथ रोजगार संबंधी जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी भी पहले एआई के कारण कार्यालयों में होने वाली पारंपरिक नौकरियों पर संभावित असर को लेकर चिंता व्यक्त कर चुके हैं।फरवरी 2026 में आयोजित इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान उन्होंने एआई से प्रभावित होने वाले कर्मचारियों के पुनर्प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई थी।उन्होंने तेजी से बदलती तकनीक के प्रभाव का आकलन करने और रोजगार संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय स्तर पर समन्वित प्रयासों का सुझाव भी दिया था।
छोटे उद्योगों के लिए भी बढ़ सकती हैं संभावनाएं
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का फायदा केवल बड़ी कंपनियों तक सीमित नहीं रह सकता।छोटे और मध्यम उद्योग भी उत्पादन की योजना बनाने, ग्राहकों की जरूरत समझने, माल की गुणवत्ता जांचने और बाजार का विश्लेषण करने के लिए एआई का उपयोग कर सकते हैं।इससे छोटे कारोबारों की कार्यक्षमता में सुधार हो सकता है।हालांकि, तकनीक अपनाने की लागत, कर्मचारियों के प्रशिक्षण और डेटा सुरक्षा जैसी चुनौतियां भी सामने आएंगी।फिक्की से जुड़े उद्योग कार्यक्रमों में छोटे और मध्यम उद्यमों तक एआई तकनीक पहुंचाने तथा नवाचार आधारित औद्योगिक विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता जताई जा चुकी है।
रोजगार का भविष्य कौशल और तकनीक पर निर्भर
एआई के कारण रोजगार बढ़ेंगे या घटेंगे, इसका एक निश्चित जवाब फिलहाल देना मुश्किल है। अलग-अलग उद्योगों और कर्मचारियों पर इसका प्रभाव अलग हो सकता है।जहां कुछ नियमित कार्यों में कर्मचारियों की मांग घट सकती है, वहीं तकनीकी विशेषज्ञता, डिजिटल सेवाओं और नए व्यावसायिक क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ने की संभावना है।ऐसे में सरकार, उद्योग संगठनों और शिक्षण संस्थानों के लिए जरूरी होगा कि वे युवाओं को बदलते रोजगार बाजार के अनुरूप तैयार करें।कुल मिलाकर, फिक्की तेलंगाना नेतृत्व का सकारात्मक दृष्टिकोण तकनीकी बदलाव को अवसर के रूप में देखने पर केंद्रित है। हालांकि, नए रोजगार अपने आप पैदा नहीं होंगे। इसके लिए निवेश, प्रशिक्षण, उद्योगों की भागीदारी और कर्मचारियों को नई भूमिकाओं में ढालने की प्रभावी व्यवस्था जरूरी होगी।
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