
हैदराबाद: यह कहते हुए कि पिछली बीआरएस सरकार ने मियापुर में 550 एकड़ जमीन की सुरक्षा के लिए लगभग आठ वर्षों तक कानूनी लड़ाई लड़ी थी, पूर्व मंत्री टी हरीश राव ने शुक्रवार को मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का श्रेय लेने का आरोप लगाया। उन्होंने जमीन के मुद्रीकरण के कांग्रेस सरकार के फैसले पर भी सवाल उठाया, जिसकी कीमत उन्होंने लगभग 60,000 करोड़ रुपये बताई थी।
एक बयान में, हरीश राव ने कहा कि रेवंत ने दिल्ली में अपनी मीडिया ब्रीफिंग के दौरान सुप्रीम कोर्ट के रिकॉर्ड का खंडन करते हुए दावा किया था कि पिछली बीआरएस सरकार मामले में राज्य के हितों की रक्षा करने में विफल रही थी।
हरीश राव ने कहा कि मामला 2003 में एक एसएलपी के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया था और 2013 में इसे सिविल अपील में बदल दिया गया था। उन वर्षों के दौरान कांग्रेस सत्ता में थी, लेकिन उसने भूमि की रक्षा के लिए कोई कदम नहीं उठाया, उन्होंने आरोप लगाया।
तेलंगाना के गठन के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री के.चंद्रशेखर राव ने निर्णय लिया कि हैदराबाद के मध्य में स्थित बहुमूल्य संपत्ति सरकार के पास ही रहनी चाहिए। हरीश राव ने कहा, 2015 में, बीआरएस सरकार ने राज्य का प्रतिनिधित्व करने के लिए वरिष्ठ वकील सीएस वैद्यनाथन को नियुक्त किया।





