तमिलनाडू

दक्षिण-पश्चिम मानसून से तमिलनाडु में पवन ऊर्जा उत्पादन को मिली रफ्तार

Kavita2
1 Aug 2026 9:28 AM IST
दक्षिण-पश्चिम मानसून से तमिलनाडु में पवन ऊर्जा उत्पादन को मिली रफ्तार
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चेन्नई। दक्षिण-पश्चिम मानसून के सक्रिय होने के साथ ही तमिलनाडु में पवन ऊर्जा उत्पादन में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। राज्य में तेज़ हवाओं के चलते पवन ऊर्जा संयंत्र पूरी क्षमता के साथ बिजली उत्पादन कर रहे हैं। ऊर्जा विभाग के अनुसार, इन अनुकूल मौसमीय परिस्थितियों के कारण राज्य में पवन ऊर्जा उत्पादन बढ़कर प्रतिदिन लगभग 4,990 मेगावाट तक पहुंच गया है। इससे राज्य की बिजली आपूर्ति व्यवस्था को मजबूती मिली है और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कुछ हद तक कम हुई है।

तमिलनाडु लंबे समय से देश में पवन ऊर्जा उत्पादन के प्रमुख राज्यों में शामिल रहा है। यहां की भौगोलिक स्थिति और दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान चलने वाली तेज़ हवाएं पवन ऊर्जा उत्पादन के लिए बेहद अनुकूल मानी जाती हैं। हर वर्ष मानसून के मौसम में राज्य के विभिन्न जिलों में स्थित पवन चक्कियां तेज़ गति से घूमती हैं, जिससे बिजली उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

राज्य में वर्तमान समय में लगभग 13,000 पवन टर्बाइन स्थापित हैं। ये टर्बाइन विभिन्न पवन ऊर्जा परियोजनाओं के तहत संचालित किए जाते हैं और राज्य के बिजली ग्रिड को बड़ी मात्रा में स्वच्छ एवं नवीकरणीय ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं। विशेष रूप से कोयंबटूर, तिरुपुर, तेनकासी, कन्याकुमारी, तूतुकुड़ी, डिंडीगुल और तिरुनेलवेली जैसे क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पवन ऊर्जा परियोजनाएं संचालित हैं, जहां तेज़ हवाओं के कारण उत्पादन क्षमता अधिक रहती है।

ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान जून से सितंबर तक पवन ऊर्जा उत्पादन अपने चरम पर पहुंच जाता है। इस अवधि में तेज़ और लगातार चलने वाली हवाओं के कारण पवन टर्बाइन अधिक समय तक पूरी क्षमता से संचालित होते हैं। इसका सीधा लाभ राज्य की बिजली उत्पादन प्रणाली को मिलता है और ग्रिड में नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ जाती है।

राज्य सरकार लगातार स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने की दिशा में कार्य कर रही है। पवन ऊर्जा, सौर ऊर्जा और अन्य नवीकरणीय स्रोतों को बढ़ावा देकर जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने का प्रयास किया जा रहा है। पवन ऊर्जा उत्पादन में वृद्धि न केवल पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण है, बल्कि बिजली उत्पादन की लागत को नियंत्रित करने में भी सहायक मानी जाती है।

हालांकि, पवन ऊर्जा मौसमी परिस्थितियों पर निर्भर करती है। जब हवाओं की गति कम होती है, तब बिजली उत्पादन भी घट जाता है। इसलिए तमिलनाडु अपनी बिजली आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए केवल पवन ऊर्जा पर निर्भर नहीं रहता। राज्य में ऊर्जा उत्पादन के कई अन्य स्रोत भी सक्रिय हैं, जो पूरे वर्ष लगातार बिजली उपलब्ध कराते हैं।

तमिलनाडु की बिजली जरूरतों को पूरा करने में थर्मल पावर प्लांट, जलविद्युत (हाइड्रोइलेक्ट्रिक) परियोजनाएं और परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। थर्मल पावर प्लांट राज्य की आधारभूत बिजली आपूर्ति का प्रमुख स्रोत हैं, जबकि जलविद्युत परियोजनाएं वर्षा और जलाशयों में उपलब्ध पानी के आधार पर बिजली उत्पादन करती हैं। इसके अलावा परमाणु ऊर्जा संयंत्र भी निरंतर और स्थिर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।

ऊर्जा विभाग का कहना है कि विभिन्न स्रोतों से बिजली उत्पादन होने के कारण राज्य की ऊर्जा व्यवस्था अधिक संतुलित बनी रहती है। जब किसी एक स्रोत से उत्पादन कम होता है, तब अन्य स्रोतों से उसकी भरपाई की जाती है। यही कारण है कि तमिलनाडु देश के उन राज्यों में शामिल है, जहां ऊर्जा मिश्रण (एनर्जी मिक्स) को संतुलित बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि पवन ऊर्जा उत्पादन में आई मौजूदा वृद्धि से राज्य के बिजली ग्रिड पर सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे औद्योगिक इकाइयों, कृषि क्षेत्र और घरेलू उपभोक्ताओं के लिए बिजली उपलब्धता बेहतर होने की संभावना है। साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा की हिस्सेदारी बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के राष्ट्रीय लक्ष्यों को भी मजबूती मिलेगी।

पिछले कुछ वर्षों में तमिलनाडु ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में लगातार निवेश बढ़ाया है। नई तकनीक वाले टर्बाइन, बेहतर ग्रिड प्रबंधन और ऊर्जा भंडारण से जुड़ी योजनाओं पर भी कार्य किया जा रहा है, ताकि भविष्य में पवन ऊर्जा का अधिक प्रभावी उपयोग किया जा सके।

ऊर्जा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि आने वाले सप्ताहों में दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय बना रहता है और तेज़ हवाओं का दौर जारी रहता है, तो पवन ऊर्जा उत्पादन में और वृद्धि हो सकती है। इससे राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता को अतिरिक्त मजबूती मिलेगी और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को भी बढ़ावा मिलेगा।

तमिलनाडु में पवन ऊर्जा उत्पादन का प्रतिदिन 4,990 मेगावाट तक पहुंचना इस बात का संकेत है कि राज्य नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में लगातार मजबूत स्थिति बनाए हुए है। आने वाले समय में यदि इसी तरह पवन और सौर ऊर्जा परियोजनाओं का विस्तार होता रहा, तो तमिलनाडु देश के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में अपनी अग्रणी भूमिका को और अधिक सशक्त बना सकेगा।

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