तमिलनाडू
पति की मांगों से परेशान पत्नी को मिली राहत हाईकोर्ट ने तलाक किया मंजूर
Ratna Netam
3 Sept 2026 5:17 PM IST

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चेन्नई। मद्रास हाईकोर्ट ने एक तलाक मामले की सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह हर परिस्थिति में पति के पीछे उसी तरह चले, जैसे वोडाफोन के चर्चित विज्ञापन में पग यानी कुत्ता अपने मालिक के पीछे चलता था। अदालत ने कहा कि शादी का रिश्ता बराबरी, समझ और आपसी सम्मान पर आधारित होता है, इसमें किसी एक पक्ष से बिना शर्त हर बात मानने की उम्मीद नहीं की जा सकती।
हाईकोर्ट ने यह टिप्पणी उस मामले में की, जहां पति और पत्नी लंबे समय से अलग रह रहे थे। दोनों के बीच रिश्तों में इतनी दूरी आ गई थी कि साथ रहना मुश्किल हो गया था। अदालत ने माना कि जब पति-पत्नी के बीच संबंध पूरी तरह टूट चुके हों और दोबारा साथ आने की संभावना न हो तो ऐसे विवाह को बनाए रखना व्यावहारिक नहीं होता।
16 साल से अलग रह रहे थे पति पत्नी
मामले में पति और पत्नी करीब 16 साल से अलग रह रहे थे। पति ने तलाक के लिए अदालत का दरवाजा खटखटाया था। उसका कहना था कि दोनों के बीच वैवाहिक संबंध पूरी तरह खत्म हो चुके हैं और अब साथ रहना संभव नहीं है।
शुरुआत में फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका को खारिज कर दिया था। फैमिली कोर्ट का मानना था कि पति ने पत्नी को साथ रखे बिना नौकरी के कारण दूसरे शहर चले जाने का फैसला किया था, जिसे वैवाहिक जिम्मेदारियों से जुड़ा मुद्दा माना गया।
इसके बाद पति ने हाईकोर्ट में अपील की।
हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट की दलील से जताई असहमति
मद्रास हाईकोर्ट ने फैमिली कोर्ट के फैसले को स्वीकार नहीं किया। हाईकोर्ट ने कहा कि हर स्थिति में पति-पत्नी का साथ रहना संभव नहीं होता।
अदालत ने उदाहरण देते हुए कहा कि अगर कोई व्यक्ति सेना में नौकरी करता है तो कई बार उसकी पोस्टिंग ऐसी जगह होती है जहां परिवार को साथ रखना संभव नहीं होता। इसी तरह नौकरी, परिस्थितियों और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों के कारण पति-पत्नी अलग रह सकते हैं।
कोर्ट ने कहा कि पत्नी से यह उम्मीद नहीं की जा सकती कि वह वोडाफोन के विज्ञापन वाले पग की तरह हर जगह पति के पीछे-पीछे चले।
शादी में बराबरी और स्वतंत्रता जरूरी
अदालत की टिप्पणी का मुख्य संदेश यही था कि विवाह का रिश्ता साझेदारी का रिश्ता है। इसमें पति और पत्नी दोनों की अपनी जिम्मेदारियां, इच्छाएं और परिस्थितियां होती हैं।
आज के समय में पति-पत्नी दोनों अपने करियर और व्यक्तिगत जिम्मेदारियों को लेकर फैसले लेते हैं। ऐसे में किसी एक व्यक्ति से यह उम्मीद करना कि वह हर परिस्थिति में दूसरे के फैसले के अनुसार ही चले, सही नहीं है।
पति के आरोपों पर भी कोर्ट ने दिया फैसला
पति ने पत्नी पर गंभीर आरोप लगाए थे, लेकिन हाईकोर्ट ने उन आरोपों को पूरी तरह स्वीकार नहीं किया। अदालत ने कहा कि किसी व्यक्ति पर लगाए गए आरोपों को साबित करने के लिए उचित कानूनी प्रक्रिया जरूरी है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि वैवाहिक विवादों में केवल आरोपों के आधार पर फैसला नहीं दिया जा सकता। दोनों पक्षों की परिस्थितियों और पूरे मामले को ध्यान में रखना जरूरी होता है।
रिश्तों में आई कड़वाहट को माना आधार
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने पाया कि पति-पत्नी के बीच काफी लंबे समय से दूरी बनी हुई है। दोनों के बीच रिश्तों में इतनी कड़वाहट आ चुकी है कि दोबारा सामान्य वैवाहिक जीवन की संभावना बहुत कम है।
अदालत ने माना कि जब विवाह केवल कागजों तक सीमित रह जाए और पति-पत्नी वर्षों से अलग रह रहे हों तो ऐसे रिश्ते को जबरदस्ती बनाए रखना किसी के हित में नहीं होता।
तलाक को दी मंजूरी
मद्रास हाईकोर्ट ने आखिरकार पति की तलाक याचिका को मंजूरी दे दी। अदालत ने विवाह को खत्म करने का आदेश दिया और पति को पत्नी के लिए गुजारा भत्ते के रूप में 7 लाख रुपये देने का निर्देश दिया।
कोर्ट ने कहा कि तलाक का आदेश तभी प्रभावी होगा जब तय राशि जमा कर दी जाएगी।
फैसले पर शुरू हुई चर्चा
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद सोशल मीडिया और कानूनी हलकों में बहस शुरू हो गई है। कुछ लोग इसे आधुनिक वैवाहिक संबंधों के अनुरूप फैसला बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग विवाह संस्था और पारिवारिक जिम्मेदारियों को लेकर अलग राय रख रहे हैं।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि अदालत ने इस मामले में व्यक्तिगत स्वतंत्रता, वैवाहिक जिम्मेदारी और रिश्तों की वास्तविक स्थिति को ध्यान में रखते हुए फैसला दिया है।
क्या सीख देता है यह फैसला
यह फैसला बताता है कि शादी केवल साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि आपसी सम्मान, भरोसे और समझ का रिश्ता है। पति और पत्नी दोनों की भावनाओं और परिस्थितियों को महत्व देना जरूरी है।
अगर रिश्ते में लंबे समय तक विवाद, दूरी और तनाव बना रहे तो अदालतें भी यह देखती हैं कि क्या उस रिश्ते को आगे बचाया जा सकता है या नहीं।
मद्रास हाईकोर्ट की यह टिप्पणी आने वाले समय में वैवाहिक मामलों में एक महत्वपूर्ण उदाहरण के रूप में देखी जा सकती है, क्योंकि इसमें अदालत ने साफ किया है कि पति-पत्नी का रिश्ता बराबरी का होता है, किसी एक पक्ष के पूरी तरह दूसरे के पीछे चलने का नहीं।
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