तमिलनाडू
वायरल वीडियो में दिखा मोदी का अनोखा गिफ्ट क्या है इसकी सच्चाई
Ratna Netam
12 Sept 2026 6:29 PM IST

x
तमिलनाडु : सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो को शेयर करते हुए दावा किया जा रहा है कि पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को अपनी ही तस्वीर वाला गिफ्ट दे दिया। कुछ सोशल मीडिया यूजर्स इस क्लिप को लेकर मजाक कर रहे हैं और इसे आत्मप्रशंसा से जोड़ रहे हैं। लेकिन वीडियो की वास्तविकता इससे अलग है।
जांच में सामने आया कि वायरल क्लिप हाल की BRICS Summit 2026 की नहीं, बल्कि **2019 में तमिलनाडु के मामल्लपुरम में आयोजित भारत-चीन अनौपचारिक शिखर सम्मेलन** से जुड़ी है।
उस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच उपहारों का आदान-प्रदान हुआ था। आधिकारिक रिकॉर्ड के मुताबिक मोदी ने शी जिनपिंग को खुद की तस्वीर नहीं बल्कि **शी जिनपिंग की तस्वीर वाली विशेष हाथ से तैयार सिल्क शॉल** भेंट की थी।
वहीं चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने प्रधानमंत्री मोदी को एक पोर्सिलेन मेमेंटो दिया था, जिस पर **पीएम मोदी की तस्वीर** बनी हुई थी। यही दृश्य अधूरी क्लिप के कारण भ्रम पैदा कर रहा है।
क्या है वायरल दावा?
सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो में नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग एक फ्रेम जैसी वस्तु पकड़े दिखाई देते हैं।
उस वस्तु पर प्रधानमंत्री मोदी की तस्वीर नजर आती है।
वीडियो के इसी हिस्से को देखकर कई यूजर्स दावा कर रहे हैं कि पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को अपनी ही तस्वीर गिफ्ट की।
कुछ पोस्ट में मजाकिया अंदाज में लिखा गया कि किसी दूसरे देश के राष्ट्रपति को अपनी तस्वीर गिफ्ट करना अपने आप में अनोखा मामला है।
लेकिन वीडियो का केवल यह छोटा हिस्सा पूरी कहानी नहीं बताता।
वीडियो कब का है?
रिवर्स सर्च और पुराने रिकॉर्ड देखने पर पता चलता है कि यह दृश्य **अक्टूबर 2019** में तमिलनाडु के मामल्लपुरम में हुई मोदी-शी अनौपचारिक बैठक से जुड़ा है।
यह वही बैठक थी जिसमें दोनों नेताओं ने महाबलीपुरम के ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया था और दोनों देशों के संबंधों पर लंबी बातचीत की थी।
इस दौरान दोनों देशों के नेताओं ने एक-दूसरे को सांस्कृतिक उपहार भी दिए थे।
यानी यह वीडियो सितंबर 2026 के BRICS सम्मेलन का नहीं है।
मोदी ने शी जिनपिंग को क्या दिया था?
आधिकारिक विवरण के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी ने चीनी राष्ट्रपति को एक विशेष **हाथ से बुनी सिल्क शॉल** भेंट की थी।
यह शॉल कोयंबटूर के बुनकरों द्वारा तैयार की गई थी।
शॉल पर लाल सिल्क बैकग्राउंड में सोने के जरी के जरिए **शी जिनपिंग की तस्वीर** बनाई गई थी।
इसे खास तौर पर चीनी राष्ट्रपति के लिए तैयार किया गया था।
तस्वीरों में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग इस बड़ी लाल शॉल को पकड़े दिखाई देते हैं।
आधिकारिक प्रकाशन में भी स्पष्ट रूप से लिखा गया है कि शॉल पर राष्ट्रपति जिनपिंग की तस्वीर बनी हुई थी।
फिर मोदी की तस्वीर वाला गिफ्ट कहां से आया?
यही वायरल वीडियो की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है।
असल में मोदी की तस्वीर वाला गिफ्ट **शी जिनपिंग की ओर से प्रधानमंत्री मोदी को दिया गया था।**
चीनी राष्ट्रपति ने मोदी को एक गोल आकार का पोर्सिलेन मेमेंटो भेंट किया था।
उस मेमेंटो के बीच में नरेंद्र मोदी की तस्वीर बनी हुई थी।
जब दोनों नेता इसे कैमरे के सामने पकड़े हुए थे, उस समय रिकॉर्ड किया गया वीडियो अब सोशल मीडिया पर अलग संदर्भ में शेयर किया जा रहा है।
क्लिप देखने वाले व्यक्ति को अगर पूरी जानकारी न हो तो आसानी से लग सकता है कि मोदी यह गिफ्ट शी को दे रहे हैं।
लेकिन वास्तविकता इसके ठीक उलट है।
वीडियो को कैसे बनाया गया भ्रामक?
इस मामले में वीडियो पूरी तरह फर्जी या AI से बनाया हुआ नहीं है।
मूल दृश्य वास्तविक है।
समस्या उसके संदर्भ में है।
वीडियो का छोटा हिस्सा शेयर करके यह नहीं बताया जा रहा कि गिफ्ट किसने किसे दिया था।
यही वजह है कि इसे **Misleading Context यानी भ्रामक संदर्भ** का उदाहरण कहा जा सकता है।
किसी असली वीडियो को गलत कैप्शन या अधूरी जानकारी के साथ शेयर करने पर उसका अर्थ पूरी तरह बदल सकता है।
2019 में क्यों हुई थी मोदी-शी की बैठक?
2019 में शी जिनपिंग भारत आए थे और तमिलनाडु के मामल्लपुरम में नरेंद्र मोदी के साथ दूसरा अनौपचारिक भारत-चीन शिखर सम्मेलन हुआ था।
दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश, लोगों के बीच संपर्क और सीमा सहित द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की थी।
मामल्लपुरम का चुनाव भी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को दर्शाने के लिए किया गया था।
बैठक के दौरान मोदी और शी ने कई ऐतिहासिक स्थलों का दौरा किया।
यही वह यात्रा थी जिसमें ये दोनों उपहार दिए गए थे।
सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा था गिफ्ट
दो देशों के नेताओं के बीच उपहारों का आदान-प्रदान सामान्य कूटनीतिक परंपरा का हिस्सा है।
भारत अक्सर विदेशी राष्ट्राध्यक्षों को ऐसी वस्तुएं देता है जो भारतीय कला, हस्तशिल्प या सांस्कृतिक विरासत का प्रतिनिधित्व करती हैं।
शी जिनपिंग के लिए तैयार सिल्क शॉल भी इसी सांस्कृतिक कूटनीति का हिस्सा थी।
यह उपहार सिर्फ एक फोटो वाला कपड़ा नहीं था बल्कि तमिलनाडु के पारंपरिक बुनकरों और जरी कला को भी प्रदर्शित करता था।
इसी तरह चीन की तरफ से दिया गया पोर्सिलेन मेमेंटो भी सांस्कृतिक उपहार था।
BRICS 2026 से क्यों जोड़ा जा रहा वीडियो?
वीडियो ऐसे समय फिर वायरल हुआ है जब चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग BRICS Summit 2026 के लिए भारत पहुंचे हैं।
शी लगभग सात साल बाद भारत आए हैं और नई दिल्ली में पीएम मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बातचीत हुई है।
इसी कारण पुराने मोदी-शी वीडियो और तस्वीरें दोबारा सोशल मीडिया पर सामने आ रही हैं।
कुछ पुरानी तस्वीरें सही संदर्भ के साथ शेयर की जा रही हैं, जबकि कुछ को मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर गलत दावा किया जा रहा है।
हाल में भी पुराने मोदी-पुतिन-शी फोटो को नए सम्मेलन का बताकर शेयर किए जाने के मामले सामने आए हैं।
सोशल मीडिया पर क्यों तेजी से फैला दावा?
वायरल वीडियो में जो दृश्य दिखाई देता है, वह पहली नजर में दावे को सही साबित करता हुआ लगता है।
मोदी और शी जिस वस्तु को पकड़ते हैं, उसमें मोदी की तस्वीर दिखाई देती है।
इसलिए यूजर बिना पूरा वीडियो या संदर्भ देखे निष्कर्ष निकाल सकता है कि प्रधानमंत्री अपनी तस्वीर गिफ्ट कर रहे हैं।
इसके बाद मजेदार कैप्शन और मीम के कारण पोस्ट तेजी से वायरल हो जाती है।
Reddit पर भी इसी वीडियो को लेकर यूजर्स ने पहले मोदी द्वारा अपनी तस्वीर गिफ्ट करने का मजाक बनाया, जबकि चर्चा में दूसरे यूजर्स ने सही संदर्भ बताते हुए कहा कि तस्वीर वाला मेमेंटो वास्तव में शी की ओर से मोदी को दिया गया था।
क्या वीडियो एडिटेड है?
उपलब्ध सबूत के मुताबिक मुख्य दृश्य वास्तविक है।
यह किसी AI जनरेटेड वीडियो का मामला नहीं है।
लेकिन सोशल मीडिया पर मौजूद क्लिप छोटी या क्रॉप की गई हो सकती है, जिसके कारण असली संदर्भ गायब हो जाता है।
इसलिए यहां असली वीडियो + गलत दावा मिलकर भ्रम पैदा कर रहे हैं।
यह अंतर महत्वपूर्ण है।
हर फर्जी दावा डीपफेक नहीं होता। कई बार असली वीडियो को गलत तारीख, गलत जगह या गलत कहानी के साथ शेयर करना भी misinformation होता है।
पुराने वीडियो की पहचान कैसे करें?
ऐसे मामलों में कुछ आसान कदम अपनाए जा सकते हैं।
सबसे पहले वीडियो के मुख्य फ्रेम का स्क्रीनशॉट लेकर रिवर्स इमेज सर्च करें।
वीडियो में दिख रही जगह, कपड़े और बैकग्राउंड पर ध्यान दें।
अगर दावा किसी वर्तमान सम्मेलन का है तो उसी दिन के आधिकारिक फोटो और वीडियो से तुलना करें।
प्रधानमंत्री कार्यालय, PIB और संबंधित देशों के आधिकारिक स्रोतों पर भी तस्वीरें देखी जा सकती हैं।
कई बार कुछ मिनट की जांच से पता चल जाता है कि वायरल वीडियो वास्तव में कई साल पुराना है।
फैक्ट चेक में क्या निकला?
हमारी जांच में वायरल दावे के तीन महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए—
वायरल वीडियो **2019 का है**, BRICS Summit 2026 का नहीं।
प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग को **अपनी तस्वीर वाला गिफ्ट नहीं दिया था।**
मोदी ने शी को **शी जिनपिंग की तस्वीर वाली हाथ से बुनी सिल्क शॉल** दी थी।
इसके बदले चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने मोदी को **मोदी की तस्वीर वाला पोर्सिलेन मेमेंटो** भेंट किया था।
Fact Check Verdict
**दावा:** पीएम मोदी ने चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को अपनी ही तस्वीर गिफ्ट की।
**सच्चाई:** दावा **भ्रामक** है।
मोदी की तस्वीर वाला मेमेंटो प्रधानमंत्री मोदी ने शी जिनपिंग को नहीं दिया था। यह शी जिनपिंग की तरफ से पीएम मोदी को दिया गया उपहार था। मोदी ने बदले में चीनी राष्ट्रपति को उनकी तस्वीर वाली विशेष सिल्क शॉल भेंट की थी। वायरल वीडियो 2019 के मामल्लपुरम शिखर सम्मेलन का है, जिसे मौजूदा संदर्भ में गलत तरीके से पेश किया जा रहा है।
Next Story





