
Tamil Nadu तमिलनाडु: पीएमके के संस्थापक रामदास ने तमिलनाडु में जल स्रोतों की बिगड़ती स्थिति को लेकर चिंता जताई है और राज्य सरकार से तत्काल कार्रवाई करने की अपील की है। उन्होंने शुक्रवार को जारी अपने बयान में कहा कि राज्य के जल स्रोतों को बचाने और उन्हें पुनर्जीवित करने का यह सही समय है, क्योंकि यदि अभी कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में गंभीर जल संकट उत्पन्न हो सकता है।
रामदास ने केंद्रीय जल संसाधन मंत्रालय के सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि तमिलनाडु में बड़ी संख्या में जल निकाय खराब स्थिति में हैं। उनके अनुसार लगभग 50,197 जल निकाय ऐसे हैं जो वर्तमान में उपयोग के योग्य नहीं हैं, जो कुल जल निकायों का करीब 46.9 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा कई जल स्रोत पूरी तरह से निष्क्रिय स्थिति में पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति राज्य की जल सुरक्षा और भविष्य की आवश्यकताओं के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।
उन्होंने अपने बयान में यह भी उल्लेख किया कि राज्य में कुल 1,06,957 जल निकाय या तो अनुपयोगी हैं या उनकी स्थिति अत्यंत खराब है। इस कारण भूजल स्तर और जल भंडारण क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता को लेकर आने वाले समय में संकट और गहरा हो सकता है।
रामदास ने सरकार से आग्रह किया कि मौजूदा गर्मी के मौसम का उपयोग जल निकायों के पुनरुद्धार के लिए किया जाए। उन्होंने कहा कि इस अवधि में तालाबों, झीलों और अन्य जल स्रोतों की सफाई, अतिक्रमण हटाने और गहराई बढ़ाने जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उनके अनुसार यदि समय रहते इन जल स्रोतों को पुनर्जीवित नहीं किया गया तो मानसून के दौरान भी जल संचयन का लाभ पूरी तरह नहीं मिल पाएगा।
उन्होंने विशेष रूप से 50,000 से अधिक अनुपयोगी जल निकायों को युद्धस्तर पर सुधारने की आवश्यकता पर जोर दिया। रामदास ने कहा कि इन जल स्रोतों की गहराई बढ़ाकर और उनकी सफाई करके उन्हें फिर से उपयोग योग्य बनाया जा सकता है, जिससे वर्षा जल संचयन में सुधार होगा और ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।
इसके साथ ही उन्होंने राज्य में मौजूद 14,141 बड़ी सिंचाई झीलों की स्थिति पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इन झीलों की स्थिति भी संतोषजनक नहीं है और इनके रखरखाव की ओर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में हजारों छोटे-छोटे जल स्रोत भी उपेक्षित पड़े हुए हैं, जिससे कृषि और पेयजल दोनों पर असर पड़ रहा है।
रामदास ने सरकार से यह भी मांग की कि जल प्रबंधन के लिए बनाए गए वॉटर मैनेजमेंट फंड (2026-27) का उपयोग केवल कागजी योजनाओं तक सीमित न रहकर जमीनी स्तर पर किया जाए। उन्होंने सुझाव दिया कि इस फंड को प्राथमिकता के आधार पर गांवों के जल स्रोतों के पुनरुद्धार और संरक्षण में लगाया जाए।
उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसे एक जन आंदोलन के रूप में आगे बढ़ाने की जरूरत है। यदि अभी प्रभावी कदम उठाए गए तो आने वाले वर्षों में तमिलनाडु को जल संकट से बचाया जा सकता है।





