तमिलनाडू

प्राइवेट खदान के विरोध में मंत्री डी.के. प्रभु के घर घेराव की चेतावनी

Kavita2
19 July 2026 9:34 AM IST
प्राइवेट खदान के विरोध में मंत्री डी.के. प्रभु के घर घेराव की चेतावनी
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कराईकुडी : पुडुकोट्टई जिले के कुलावाइपट्टी गांव में प्रस्तावित एक निजी पत्थर खदान (क्वारी) को मंजूरी दिए जाने के विरोध में स्थानीय लोगों के आंदोलन ने नया मोड़ ले लिया है। प्रदर्शनकारियों ने राज्य सरकार के मंत्री डी.के. प्रभु के कराईकुडी स्थित आवास का घेराव करने की घोषणा की, जिसके बाद जिला पुलिस प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए मंत्री के घर और कार्यालयों की सुरक्षा बढ़ा दी गई, जबकि कराईकुडी आने वाले प्रमुख मार्गों पर भी व्यापक पुलिस बंदोबस्त किया गया।

शनिवार को आंदोलन की घोषणा के बाद कराईकुडी में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष तैयारियां की गईं। जिला पुलिस विभाग ने मुडियारासन रोड स्थित मंत्री डी.के. प्रभु के आवास और उनके कार्यालयों के आसपास अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया। पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों पर लगातार निगरानी रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए गए।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आंदोलनकारियों की ओर से बड़ी संख्या में कराईकुडी पहुंचकर मंत्री के आवास का घेराव करने की संभावना जताई गई थी। इसे देखते हुए आसपास के क्षेत्रों से भी अतिरिक्त पुलिस बल बुलाया गया। मंत्री के आवास के आसपास बैरिकेडिंग की गई और आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी गई, ताकि किसी भी तरह की अव्यवस्था या सुरक्षा संबंधी खतरे को समय रहते रोका जा सके।

प्रदर्शनकारियों को कराईकुडी में प्रवेश करने से रोकने के लिए तिरुमायाम क्षेत्र की ओर से आने वाले मार्गों पर विशेष निगरानी रखी गई। नेमाथनपट्टी पुलिस चेकपोस्ट को प्रमुख सुरक्षा केंद्र बनाया गया, जहां लगभग 50 पुलिस अधिकारियों को तैनात किया गया। यहां से गुजरने वाले सभी वाहनों की सघन जांच की गई। पुलिस ने निजी वाहनों, बसों और अन्य परिवहन साधनों की जांच कर यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी कराईकुडी में प्रवेश न कर सकें।

पुलिस प्रशासन ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी संभावित टकराव को रोकना है। अधिकारियों ने कहा कि लोगों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अधिकार है, लेकिन किसी भी प्रकार की हिंसा, जबरन घेराव या सार्वजनिक व्यवस्था भंग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुलावाइपट्टी में प्रस्तावित निजी खदान से पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। उनका कहना है कि खदान शुरू होने से क्षेत्र में भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है, खेती को नुकसान पहुंच सकता है और धूल तथा विस्फोटों के कारण आसपास रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य और जीवन पर भी असर पड़ सकता है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि परियोजना को लेकर उनकी आपत्तियों और चिंताओं को पर्याप्त महत्व नहीं दिया गया।

इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने मंत्री डी.के. प्रभु के आवास का घेराव करने की घोषणा की थी। उनका कहना है कि सरकार को स्थानीय लोगों की राय का सम्मान करते हुए परियोजना पर पुनर्विचार करना चाहिए। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक सभी पर्यावरणीय और सामाजिक पहलुओं की निष्पक्ष समीक्षा नहीं हो जाती, तब तक निजी खदान को दी गई अनुमति पर रोक लगाई जाए।

दूसरी ओर, पुलिस प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने और कानून का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि यदि किसी को परियोजना को लेकर कोई आपत्ति है, तो वह निर्धारित कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के माध्यम से अपनी बात रख सकता है। कानून-व्यवस्था भंग करने की किसी भी कोशिश पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।

सुरक्षा व्यवस्था के तहत कराईकुडी के कई प्रमुख मार्गों पर पुलिस गश्त भी बढ़ा दी गई। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी गई और वरिष्ठ अधिकारी स्वयं स्थिति पर नजर बनाए हुए थे। पुलिस ने यह भी सुनिश्चित किया कि आम लोगों की आवाजाही और दैनिक गतिविधियां अधिक प्रभावित न हों।

राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इस घटनाक्रम को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाल के समय में तमिलनाडु के विभिन्न हिस्सों में खनन परियोजनाओं और पर्यावरण संरक्षण को लेकर स्थानीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन देखने को मिले हैं। ऐसे मामलों में प्रशासन के सामने विकास परियोजनाओं और स्थानीय लोगों की चिंताओं के बीच संतुलन बनाए रखने की चुनौती रहती है।

फिलहाल कराईकुडी और आसपास के क्षेत्रों में स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है। पुलिस लगातार हालात पर नजर रखे हुए है और किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए आवश्यक इंतजाम किए गए हैं। वहीं, प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर कायम हैं और उनका कहना है कि जब तक निजी खदान की मंजूरी पर पुनर्विचार नहीं किया जाता, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा। प्रशासन की कोशिश है कि संवाद और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से स्थिति का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जाए, ताकि क्षेत्र में शांति और सामान्य जनजीवन प्रभावित न हो।

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