
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले के कट्टानापट्टी में हुई पटाखा फैक्ट्री दुर्घटना को लेकर जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। फैक्ट्री मालिकों ने आरोप लगाया है कि हादसे के 10 दिन बीत जाने के बावजूद केंद्र सरकार के विस्फोटक नियंत्रण विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने अब तक मौके पर पहुंचकर कोई उच्च स्तरीय जांच शुरू नहीं की है।
यह भीषण हादसा पिछले महीने 19 तारीख को हुआ था, जब कट्टानापट्टी स्थित एक पटाखा फैक्ट्री में जोरदार धमाका हुआ था। इस दुर्घटना में 25 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि कई अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद इलाके में हड़कंप मच गया था और राहत एवं बचाव कार्य तेजी से किया गया था।
घटना के तुरंत बाद विस्फोटक नियंत्रण विभाग के शिवकाशी स्थित स्थानीय अधिकारियों ने फैक्ट्री का निरीक्षण किया था। उन्होंने मौके पर पहुंचकर यह जांच की थी कि क्या फैक्ट्री में किसी प्रतिबंधित रसायन का उपयोग किया गया था या नहीं। जांच के दौरान फैक्ट्री में बिखरे हुए रासायनिक पदार्थों को एकत्र कर परीक्षण के लिए भेजा गया था। यह प्रक्रिया आमतौर पर ऐसी औद्योगिक दुर्घटनाओं के बाद अपनाई जाती है।
हालांकि, फैक्ट्री मालिकों का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी के बावजूद अब तक न तो चेन्नई स्थित उप-मुख्य विस्फोटक नियंत्रण अधिकारी और न ही नागपुर स्थित मुख्य विस्फोटक नियंत्रण अधिकारी ने घटनास्थल का दौरा किया है। उनका आरोप है कि उच्च स्तर की जांच के अभाव में दुर्घटना के वास्तविक कारण सामने नहीं आ पा रहे हैं।
मालिकों ने यह भी कहा कि जब तक वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचकर विस्तृत जांच नहीं करते, तब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाएगा कि हादसा किस कारण हुआ और इसमें किस स्तर की लापरवाही या तकनीकी खामी जिम्मेदार थी। इसके अलावा भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी सुरक्षा उपायों की सिफारिश भी नहीं की जा सकेगी।
इस बीच, स्थानीय लोगों और प्रभावित परिवारों में भी असंतोष और रोष देखा जा रहा है। उनका कहना है कि इतनी बड़ी संख्या में लोगों की जान जाने के बाद भी जांच प्रक्रिया में देरी चिंता का विषय है।
विस्फोटक नियंत्रण विभाग की ओर से अभी तक इस मामले में कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। वहीं, स्थानीय प्रशासन ने कहा है कि प्रारंभिक जांच जारी है और सभी पहलुओं की गहनता से समीक्षा की जा रही है।
इस घटना ने एक बार फिर पटाखा उद्योग में सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।





