तमिलनाडू

करूर में पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और समर्थकों के ठिकानों पर विजिलेंस का छापा

Kavita2
29 July 2026 9:22 AM IST
करूर में पूर्व मंत्री सेंथिल बालाजी और समर्थकों के ठिकानों पर विजिलेंस का छापा
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करूर। तमिलनाडु के करूर जिले में बुधवार सुबह उस समय राजनीतिक हलचल तेज हो गई, जब भ्रष्टाचार निरोधक एवं सतर्कता विभाग (डीवीएसी) की टीम ने राज्य के पूर्व मंत्री और द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के वरिष्ठ नेता सेंथिल बालाजी तथा उनके करीबी समर्थकों के आवासों और अन्य ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की। सुबह करीब छह बजे शुरू हुई इस कार्रवाई में बड़ी संख्या में पुलिस और सतर्कता अधिकारियों की टीमें शामिल रहीं। अधिकारियों ने संबंधित परिसरों में दस्तावेजों की जांच की और आवश्यक रिकॉर्ड अपने कब्जे में लिए।

सूत्रों के अनुसार, भ्रष्टाचार निरोधक एवं सतर्कता पुलिस की कई टीमें अलग-अलग स्थानों पर एक साथ पहुंचीं और पूर्व निर्धारित योजना के तहत तलाशी अभियान शुरू किया। छापेमारी के दौरान संबंधित परिसरों में आने-जाने वालों पर भी नजर रखी गई। अधिकारियों ने किसी भी प्रकार की बाधा से बचने के लिए सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए थे।

हालांकि, कार्रवाई के शुरुआती चरण में अधिकारियों की ओर से यह स्पष्ट नहीं किया गया कि तलाशी किस विशेष मामले या किन आरोपों के संबंध में की जा रही है। विभाग के अधिकारियों ने केवल इतना कहा कि जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही है और तलाशी पूरी होने के बाद आवश्यक जानकारी साझा की जाएगी।

सेंथिल बालाजी तमिलनाडु की राजनीति का एक चर्चित चेहरा रहे हैं। वे करूर जिले से लंबे समय से सक्रिय राजनीति कर रहे हैं और राज्य सरकार में मंत्री के रूप में भी जिम्मेदारियां संभाल चुके हैं। उनके खिलाफ पहले भी विभिन्न मामलों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई होती रही है। ऐसे में बुधवार को हुई ताजा छापेमारी ने राज्य की राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है।

छापेमारी की खबर फैलते ही करूर में सेंथिल बालाजी के समर्थकों की भीड़ उनके आवास और अन्य स्थानों के आसपास जमा होने लगी। पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया और लोगों से जांच में बाधा नहीं डालने की अपील की। पूरे इलाके में सुबह से ही पुलिस की गतिविधियां तेज रहीं।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस कार्रवाई के दूरगामी राजनीतिक प्रभाव भी हो सकते हैं। तमिलनाडु की राजनीति में हाल के दिनों में विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज रहा है। ऐसे समय में किसी वरिष्ठ राजनीतिक नेता के ठिकानों पर भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसी की कार्रवाई स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन गई है।

इस बीच विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से भी प्रतिक्रिया आने लगी है। विपक्षी दलों का कहना है कि यदि किसी भी सार्वजनिक पद पर रहे व्यक्ति के खिलाफ भ्रष्टाचार से जुड़े आरोप हैं तो उनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। वहीं, डीएमके के कुछ नेताओं और समर्थकों का कहना है कि एजेंसियों की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी और तथ्यों पर आधारित होनी चाहिए तथा जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंचना चाहिए।

अधिकारियों ने बताया कि तलाशी के दौरान संपत्ति से जुड़े दस्तावेज, वित्तीय रिकॉर्ड, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण और अन्य महत्वपूर्ण अभिलेखों की जांच की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित लोगों से पूछताछ भी की जा सकती है। हालांकि, जांच पूरी होने तक विभाग की ओर से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी।

करूर और आसपास के क्षेत्रों में इस कार्रवाई को लेकर लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बना रहा। कई लोग सुबह से ही घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है ताकि किसी प्रकार की अप्रिय घटना न हो।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि किसी भी भ्रष्टाचार संबंधी जांच में कानूनी प्रक्रिया का पालन और निष्पक्षता सबसे महत्वपूर्ण होती है। यदि जांच एजेंसी को किसी प्रकार के साक्ष्य मिलते हैं तो आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी, जबकि संबंधित पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का पूरा अवसर मिलेगा।

फिलहाल, भ्रष्टाचार निरोधक एवं सतर्कता विभाग की यह कार्रवाई जारी है और अधिकारी विभिन्न स्थानों पर दस्तावेजों की जांच में जुटे हुए हैं। मामले से जुड़ी आधिकारिक जानकारी तलाशी अभियान पूरा होने के बाद सामने आने की संभावना है।

नोट: इस समाचार में उल्लिखित छापेमारी जांच एजेंसी की कार्रवाई पर आधारित है। किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध जांच या तलाशी को दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही निर्धारित होगा।

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