तमिलनाडू

VHP नेता विनोद बंसल ने स्टालिन पर साधा निशाना

SHIDDHANT
25 Jan 2026 11:05 PM IST
VHP नेता विनोद बंसल ने स्टालिन पर साधा निशाना
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Delhi दिल्ली: विश्व हिंदू परिषद (VHP) के वरिष्ठ नेता विनोद बंसल ने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन के हालिया बयान पर कड़ा हमला बोला है। बंसल ने कहा कि जैसे-जैसे राज्य और केंद्र स्तर पर चुनाव नजदीक आ रहे हैं, मुख्यमंत्री स्टालिन हिंदी और राष्ट्र के प्रति अलगाववाद और विरोध की बातों पर उतर आए हैं। विनोद बंसल ने सोशल मीडिया और मीडिया बातचीत में कहा, "वे हिंदी का विरोध करते-करते हिंदू व हिंदुस्तान का विरोध करने लगे हैं। आप किसी एक भाषा से इतनी घृणा करते हैं, लेकिन आपको अपनी भाषा से प्यार करना सीखना चाहिए।" बंसल ने यह भी कहा कि तमिल भाषा पर गर्व करना अच्छी बात है, लेकिन स्टालिन को यह बताना चाहिए कि तमिल की प्रगति, उन्नति और विश्वव्यापी प्रचार के लिए उन्होंने क्या किया।
उन्होंने स्टालिन पर आरोप लगाया कि उनकी टिप्पणियां केवल चुनावी राजनीति और अलगाववादी मानसिकता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से हैं। बंसल ने कहा कि नेताओं का कर्तव्य होना चाहिए कि वे अपनी मातृभाषा और क्षेत्रीय भाषाओं के प्रचार-प्रसार पर ध्यान दें, न कि किसी अन्य भाषा के खिलाफ नकारात्मक संदेश फैलाएं। विनोद बंसल ने आगे कहा कि हिंदी भारत की मातृभाषा नहीं है, लेकिन यह पूरे देश में संवाद और राष्ट्र की एकता के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ऐसे में किसी भी राज्य या मुख्यमंत्री का हिंदी विरोध करना राष्ट्र विरोध और देशभक्ति के सिद्धांतों के खिलाफ है।
उन्होंने कहा, "हमें तमिल भाषा पर गर्व है, लेकिन किसी भाषा के प्रति घृणा फैलाना गलत है। तमिल का प्रचार करना और उसकी उन्नति पर ध्यान देना चाहिए, न कि विरोध की राजनीति करना।" बंसल ने इस मुद्दे पर राजनीतिक दलों और जनता को सतर्क रहने की अपील भी की। विशेषज्ञों का मानना है कि तमिलनाडु में हिंदी और क्षेत्रीय भाषाओं के मुद्दे पर चल रही राजनीतिक बहस इस साल के चुनावों में एक महत्वपूर्ण वोटिंग एजेंडा बन सकती है। बंसल के बयान ने इस बहस को और उभार दिया है।
इससे पहले मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने हिंदी और केंद्रीय नीतियों पर कई टिप्पणी की थी, जिन्हें लेकर विरोधी दलों ने उन्हें देश विरोधी और अलगाववादी मानसिकता का प्रतीक बताया। विनोद बंसल का बयान इसी विरोध का हिस्सा माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इस मुद्दे पर दोनों पक्षों की टिप्पणियां आने वाले समय में चुनावी रणनीति और क्षेत्रीय राजनीति को प्रभावित कर सकती हैं।
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