
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के नेता प्रतिपक्ष उदयनिधि स्टालिन ने मंगलवार को अपने बयान से एक नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया। उन्होंने सनातन धर्म को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा कि यह समाज को बांटता है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।
यह बयान 17वीं विधानसभा में उनके विपक्ष के नेता के रूप में पहले भाषण के अंत में आया, जब जे. सी. डी. प्रभाकर को बिना किसी विरोध के विधानसभा स्पीकर चुना गया था। अपने संबोधन के समापन पर उदयनिधि स्टालिन ने कहा, “तमिल की जीत हो। तमिलनाडु अमर रहे। सनातन धर्म जो लोगों को बांटता है, उसे खत्म कर देना चाहिए।”
उनके इस बयान के बाद राजनीतिक हलकों में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। कई नेताओं और संगठनों ने इसे धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाला बयान बताया है, जबकि कुछ ने इसे राजनीतिक दृष्टिकोण से जोड़कर देखा है।
यह पहली बार नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म को लेकर विवादित टिप्पणी की हो। इससे पहले सितंबर 2023 में उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना जैसी बीमारियों से करते हुए इसे समाज से समाप्त करने की बात कही थी। उस समय भी उनके बयान को लेकर देशभर में राजनीतिक विवाद और विरोध प्रदर्शन हुए थे।
DMK यूथ विंग के प्रमुख उदयनिधि स्टालिन अक्सर अपने तीखे बयानों और विचारों के कारण चर्चा में रहते हैं। उनके हालिया बयान ने एक बार फिर राजनीतिक माहौल को गर्मा दिया है, खासकर ऐसे समय में जब राज्य की राजनीति में नई विधानसभा का गठन हुआ है और नेतृत्व की नई भूमिका सामने आई है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के बयान तमिलनाडु की राजनीति में विचारधारात्मक बहस को और तेज करते हैं, लेकिन साथ ही सामाजिक स्तर पर भी विवाद की स्थिति पैदा करते हैं।
वहीं, विपक्षी दलों ने इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि किसी भी धर्म या आस्था के खिलाफ इस तरह की टिप्पणी स्वीकार्य नहीं है और इससे सामाजिक सौहार्द पर असर पड़ सकता है।
कुल मिलाकर, उदयनिधि स्टालिन का यह बयान एक बार फिर राजनीतिक और सामाजिक बहस का केंद्र बन गया है, जिससे तमिलनाडु की राजनीति में तनाव बढ़ता दिखाई दे रहा है।





