
Tamil Nadu तमिलनाडु: AMMK के महासचिव टी.टी.वी. दिनाकरन ने तमिलनाडु सरकार से राज्य के किसानों का पूरा फसल ऋण माफ़ करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात में किसान गंभीर आर्थिक और कृषि संकट का सामना कर रहे हैं, इसलिए सरकार को अपने चुनावी वादे के अनुसार तुरंत कदम उठाना चाहिए।
शुक्रवार को अपने एक्स (X) अकाउंट पर जारी एक पोस्ट में टी.टी.वी. दिनाकरन ने कावेरी डेल्टा क्षेत्र में कुरुवई धान की खेती को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मेट्टूर बांध से पानी छोड़े जाने की कोई संभावना नहीं दिख रही है, जिससे किसानों की सिंचाई व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
अपने पोस्ट में उन्होंने राज्य सरकार द्वारा घोषित 134 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि इस पैकेज में 18 घंटे बिना रुकावट बिजली आपूर्ति की बात कही गई है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अलग है। दिनाकरन ने आरोप लगाया कि किसानों को रोजाना बिना पूर्व सूचना के बिजली कटौती का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे अपने खेतों में इलेक्ट्रिक मोटर पंप का उपयोग समय पर नहीं कर पा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सिंचाई व्यवस्था प्रभावित होने के कारण फसलें समय पर पानी नहीं पा रही हैं, जिससे किसानों को भारी नुकसान हो रहा है। उन्होंने सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि ऐसे हालात में किसान यह सोचने पर मजबूर हैं कि सरकार द्वारा घोषित विशेष पैकेज पर कैसे भरोसा किया जाए।
टी.टी.वी. दिनाकरन ने यह भी आरोप लगाया कि सत्ता में आने से पहले छोटे और सीमांत किसानों के फसल ऋण पूरी तरह माफ़ करने का वादा किया गया था, लेकिन अब तक इसे लागू नहीं किया गया है। उन्होंने इसे किसानों के साथ धोखा बताया और कहा कि सरकार को अपने वादों को पूरा करना चाहिए।
उन्होंने जोर देकर कहा कि कृषि क्षेत्र पहले से ही कई चुनौतियों का सामना कर रहा है, जिसमें पानी की कमी, बिजली आपूर्ति की अनियमितता और बढ़ती लागत शामिल हैं। ऐसे में किसानों पर ऋण का बोझ और अधिक दबाव डाल रहा है।
दिनाकरन ने सरकार से अपील की कि वह राजनीतिक घोषणाओं से आगे बढ़कर वास्तविक रूप से किसानों की समस्याओं का समाधान करे। उन्होंने कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए फसल ऋण माफ़ी एक जरूरी कदम है, जिसे तुरंत लागू किया जाना चाहिए।
इस बयान के बाद राज्य में एक बार फिर किसानों की समस्याओं और कृषि नीतियों को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। विभिन्न दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है, जबकि किसान संगठनों ने भी इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग की है।





