तमिलनाडू

634 करोड़ के कथित नौकरी घोटाले में DMK नेता के.एन. नेहरू की मुश्किलें बढ़ीं

Kavita2
29 Oct 2026 11:29 AM IST
634 करोड़ के कथित नौकरी घोटाले में DMK नेता के.एन. नेहरू की मुश्किलें बढ़ीं
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चेन्नई। तमिलनाडु में 634 करोड़ रुपये के कथित 'नौकरी के बदले पैसे' घोटाले को लेकर बड़ी कार्रवाई सामने आई है। राज्य के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय (DVAC) ने गुरुवार, 29 अक्टूबर को द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री के.एन. नेहरू से जुड़े 25 ठिकानों पर व्यापक तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई मद्रास हाई कोर्ट के हालिया निर्देशों के बाद दर्ज किए गए मामले के सिलसिले में की गई है। अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर कथित अनियमितताओं की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था। इस कार्रवाई के बाद तमिलनाडु की राजनीति में हलचल तेज होने की संभावना है।

मामला सरकारी नौकरियों में नियुक्तियों के बदले कथित रूप से धन लेने के आरोपों से जुड़ा है। जांच एजेंसी यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कथित लेन-देन किस तरह हुआ और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। हालांकि, आरोपों की न्यायिक पुष्टि नहीं हुई है और तलाशी की कार्रवाई को किसी व्यक्ति के दोषी होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

तमिलनाडु में 25 ठिकानों पर DVAC की बड़ी कार्रवाई

तमिलनाडु के सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक निदेशालय ने गुरुवार को राज्य के विभिन्न स्थानों पर तलाशी अभियान चलाया। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिन 25 ठिकानों पर कार्रवाई की गई, उनका संबंध पूर्व मंत्री और DMK नेता के.एन. नेहरू से बताया गया है।

इस कार्रवाई का उद्देश्य कथित भर्ती घोटाले से संबंधित दस्तावेजों और अन्य संभावित साक्ष्यों की जांच करना है। भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों में जांच एजेंसियां वित्तीय रिकॉर्ड, बैंकिंग दस्तावेजों, नियुक्ति प्रक्रिया से जुड़े अभिलेखों और अन्य संबंधित सामग्रियों की पड़ताल कर सकती हैं।

हालांकि, इस तलाशी अभियान में किन दस्तावेजों या वस्तुओं को जब्त किया गया है, इसकी विस्तृत आधिकारिक जानकारी उपलब्ध नहीं है।

634 करोड़ रुपये के कथित घोटाले की जांच

यह मामला लगभग 634 करोड़ रुपये के कथित कैश-फॉर-जॉब्स घोटाले से जुड़ा बताया जा रहा है। आरोपों के अनुसार, सरकारी नौकरियां दिलाने के नाम पर कथित आर्थिक अनियमितताएं हुईं।

नौकरी के बदले पैसे लेने के आरोप गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि ऐसे मामलों में भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और योग्य उम्मीदवारों के अधिकारों पर सवाल उठते हैं।

जांच के दौरान यह स्पष्ट करना महत्वपूर्ण होगा कि कथित धनराशि की गणना किस आधार पर की गई, किन नियुक्तियों पर सवाल हैं और आरोपों के समर्थन में क्या साक्ष्य उपलब्ध हैं।

फिलहाल 634 करोड़ रुपये की राशि को जांच से जुड़ा कथित आंकड़ा ही माना जाना चाहिए। इसे अदालत द्वारा प्रमाणित घोटाले की रकम नहीं कहा जा सकता।

मद्रास हाई कोर्ट के निर्देश के बाद दर्ज हुआ मामला

इस मामले में मद्रास हाई कोर्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। उपलब्ध विवरण के अनुसार, अदालत के हालिया निर्देश के बाद के.एन. नेहरू और अन्य संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

अदालत ने प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों के आधार पर मामले की विस्तृत जांच करने का निर्देश दिया था।

न्यायिक निर्देश के बाद मामला दर्ज होने से जांच की औपचारिक प्रक्रिया आगे बढ़ी और DVAC ने संबंधित ठिकानों पर तलाशी अभियान चलाया।

अब जांच एजेंसी के सामने दस्तावेजों की प्रामाणिकता, कथित लेन-देन और संबंधित व्यक्तियों की संभावित भूमिका का परीक्षण करने की जिम्मेदारी है।

2,538 पदों पर भर्ती में अनियमितताओं का आरोप

मामले में नगर प्रशासन एवं जलापूर्ति विभाग (MAWS) की 2,538 सरकारी नियुक्तियों पर सवाल उठाए गए हैं। इनमें सहायक अभियंता, कनिष्ठ अभियंता और अन्य पद शामिल हैं।

ED के अनुसार, कुछ उम्मीदवारों से नौकरी दिलाने के बदले कथित तौर पर 25 लाख से 35 लाख रुपये तक की रिश्वत ली गई। जांच एजेंसी ने व्हाट्सऐप बातचीत, डिजिटल रिकॉर्ड और भर्ती से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर अनियमितताओं की आशंका जताई थी।

इन आरोपों की जांच के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि क्या भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित किया गया था और क्या उम्मीदवारों से वास्तव में अवैध भुगतान लिया गया था।

तिरुचिरापल्ली और चेन्नई में भी छापेमारी

गुरुवार सुबह करीब सात बजे DVAC की टीम ने तिरुचिरापल्ली के थिल्लई नगर स्थित के.एन. नेहरू के आवास पर तलाशी शुरू की। रिपोर्ट के अनुसार, कार्रवाई शुरू होने के समय नेहरू घर में मौजूद थे।

चेन्नई के आरए पुरम इलाके में उनके भाई के आवास पर भी तलाशी ली गई। कार्रवाई के दौरान तिरुचिरापल्ली में नेहरू के समर्थक उनके आवास के बाहर एकत्र हो गए।

जांच एजेंसी ने संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का पता लगाने के लिए कई संबंधित परिसरों की तलाशी ली।

सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचे के.एन. नेहरू

इस मामले में के.एन. नेहरू ने कानूनी चुनौती भी दी है। मद्रास हाई कोर्ट ने 26 अक्टूबर को उनकी पुनर्विचार याचिका खारिज कर दी थी।

इसके बाद नेहरू ने 28 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका (SLP) दाखिल कर हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी।

नेहरू ने आरोपों से इनकार किया है और अपने खिलाफ कार्रवाई को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया है। दूसरी ओर, हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि एफआईआर दर्ज करने का निर्देश किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के बराबर नहीं है।

छापेमारी पर तमिलनाडु में सियासी घमासान

DVAC की कार्रवाई के बाद तमिलनाडु की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं। DMK अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने छापेमारी को राजनीतिक बदले की कार्रवाई करार दिया है।

उन्होंने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली TVK सरकार पर विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने का आरोप लगाया। स्टालिन ने दावा किया कि सरकार राज्य की कानून-व्यवस्था और महंगाई जैसे मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए ऐसी कार्रवाई कर रही है।

हालांकि, ये राजनीतिक आरोप हैं। मामले में जांच एजेंसी के निष्कर्ष और न्यायिक प्रक्रिया ही आगे की स्थिति स्पष्ट करेंगे।

जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें

634 करोड़ रुपये के कथित भर्ती घोटाले में DVAC की छापेमारी को जांच का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। एजेंसी अब दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य साक्ष्यों की जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय करेगी।

इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या सरकारी नियुक्तियों में पैसे के बदले चयन किया गया और कथित रकम किन लोगों तक पहुंची।

फिलहाल छापेमारी से जुड़े अंतिम निष्कर्ष और जब्ती का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं हुआ है। ऐसे में के.एन. नेहरू या किसी अन्य व्यक्ति की आपराधिक जिम्मेदारी के बारे में निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी।

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