
मदुरै: मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै बेंच ने मंगलवार को तमिलनाडु रजिस्ट्रेशन (संशोधन) एक्ट, 2025 की नई जोड़ी गई धारा 34-C को रद्द कर दिया। इस धारा के तहत रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को प्रॉपर्टी की खरीद के लिए ओरिजिनल डॉक्यूमेंट न दिखाए जाने पर रजिस्ट्रेशन रोकने का अधिकार दिया गया था। कोर्ट ने कहा कि अथॉरिटी का काम पूरी तरह से मिनिस्ट्रियल और एडमिनिस्ट्रेटिव (प्रशासनिक) है और मालिकाना हक (टाइटल) से जुड़े सवालों का फैसला सिर्फ़ एक सक्षम सिविल कोर्ट ही कर सकता है।
जस्टिस एन. सतीश कुमार और एम. जोथिरामन की डिवीजन बेंच ने यह आदेश उन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए दिया जिनमें इस संशोधन को चुनौती दी गई थी। याचिकाओं में कहा गया था कि यह उन प्रावधानों का ही नया रूप है जिन्हें पहले ही अमान्य ठहराया जा चुका है। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि भले ही इसका मकसद धोखाधड़ी वाले रजिस्ट्रेशन को रोकना हो, लेकिन यह संशोधन असली लेन-देन को प्रभावित करता है और ज़रूरत से ज़्यादा बोझ डालता है।
कोर्ट ने यह भी कहा कि धारा 34-C के प्रावधान 'ट्रांसफर ऑफ़ प्रॉपर्टी एक्ट' के कई प्रावधानों में सीधे दखल देते हैं। यह संशोधन असल में रजिस्ट्रेशन अथॉरिटी को मालिकाना हक से जुड़े मुद्दों की जांच करने और उन पर फैसला लेने का अधिकार देता है।





