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Tiruvallur : अमोनिया गैस रिसाव के बाद बड़ा अभियान, सुरक्षित निकासी की तैयारी तेज

Kavita2
4 July 2026 9:10 AM IST
Tiruvallur : अमोनिया गैस रिसाव के बाद बड़ा अभियान, सुरक्षित निकासी की तैयारी तेज
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तिरुवल्लूर जिले में पेरियापलायम के पास स्थित एक अमोनिया लीक प्लांट से अमोनिया गैस को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने के लिए आज बड़ा अभियान चलाया जाएगा। प्रशासन और तकनीकी टीमों की निगरानी में यह कार्रवाई की जाएगी, ताकि प्लांट में मौजूद खतरनाक गैस को नियंत्रित कर पूरी तरह सुरक्षित वातावरण बनाया जा सके। इस घटना के बाद क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और आपातकालीन सेवाओं को अलर्ट पर रखा गया है।

यह पूरा मामला तिरुवल्लूर जिले के उथुकोट्टई के पास कन्निकाईपो गांव में स्थित एक निजी मरीन फिश प्रोसेसिंग और एक्सपोर्ट फैक्ट्री से जुड़ा है। इस फैक्ट्री में विभिन्न राज्यों से आए करीब 230 मजदूर कार्यरत हैं, जिनमें ओडिशा, झारखंड और असम के श्रमिक शामिल हैं। फैक्ट्री में बड़े पैमाने पर मछली प्रसंस्करण और निर्यात का काम किया जाता है, जिसके लिए अमोनिया गैस का उपयोग कोल्ड स्टोरेज और प्रोसेसिंग यूनिट में किया जाता है।

21 जून को इस प्लांट में गंभीर तकनीकी खराबी के कारण बड़ा हादसा हुआ था। उस समय लगभग 100 लोग ड्यूटी पर मौजूद थे। बताया गया कि अमोनिया गैस टैंक ठीक से सील नहीं था, जिसके कारण गैस का रिसाव शुरू हो गया। धीरे-धीरे स्थिति बिगड़ती गई और रिसाव के साथ-साथ वहां आग भी लग गई। अचानक हुए इस हादसे से फैक्ट्री परिसर में अफरा-तफरी मच गई और कर्मचारी अपनी जान बचाने के लिए बाहर भागने लगे।

गैस रिसाव का असर वहां काम कर रहे मजदूरों पर गंभीर रूप से पड़ा। इस घटना में 60 महिला श्रमिकों समेत 65 से अधिक लोगों की तबीयत अचानक बिगड़ गई। कई लोगों के कानों से खून बहने लगा और शरीर पर छोटे-छोटे छाले और जलन जैसे घाव दिखाई देने लगे। कई श्रमिकों को सांस लेने में भी दिक्कत हुई और कुछ लोग बेहोश हो गए। स्थिति इतनी गंभीर थी कि तत्काल राहत और बचाव कार्य शुरू करना पड़ा।

घटना के बाद सभी प्रभावित श्रमिकों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया। उन्हें मंजंगरनई और चेंगुनराम के निजी अस्पतालों में प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया। वहां डॉक्टरों ने कई मरीजों की हालत को गंभीर देखते हुए उन्हें विशेष निगरानी में रखा। कुछ मरीजों की स्थिति बिगड़ने पर उन्हें बेहतर इलाज के लिए चेन्नई के सरकारी अस्पताल में रेफर किया गया, जहां उनका इलाज अभी भी जारी है।

इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और उद्योग सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई कि अमोनिया टैंक की सीलिंग ठीक से नहीं की गई थी, जिसके कारण गैस धीरे-धीरे बाहर निकलने लगी और यह बड़ा हादसा हो गया। विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक सुरक्षा मानकों की अनदेखी इस तरह की घटनाओं का प्रमुख कारण बनती है।

आज होने वाली कार्रवाई में तकनीकी विशेषज्ञों की टीम प्लांट से बची हुई अमोनिया गैस को सुरक्षित तरीके से बाहर निकालने की प्रक्रिया को अंजाम देगी। इस दौरान विशेष उपकरणों और सुरक्षा गियर का उपयोग किया जाएगा ताकि किसी भी तरह के रिसाव या खतरे से बचा जा सके। प्रशासन ने आसपास के इलाके में एहतियातन सुरक्षा घेरा बना दिया है और आम लोगों की आवाजाही पर भी निगरानी रखी जा रही है।

स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, जब तक प्लांट पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक वहां उत्पादन और कार्य पूरी तरह बंद रहेगा। साथ ही इस घटना की विस्तृत जांच के आदेश भी दिए गए हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि गैस रिसाव के लिए कौन जिम्मेदार है और सुरक्षा में कहां चूक हुई।

मजदूर संगठनों ने भी इस घटना पर चिंता जताई है और प्रभावित श्रमिकों को उचित मुआवजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह के औद्योगिक प्रतिष्ठानों में सुरक्षा मानकों को सख्ती से लागू किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।

ग्रामीणों ने भी घटना के बाद फैक्ट्री प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं और कहा है कि पहले भी सुरक्षा को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन उन पर ध्यान नहीं दिया गया। घटना के बाद से इलाके में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है।

प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि पूरे मामले की जांच पारदर्शी तरीके से की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि भविष्य में किसी भी औद्योगिक इकाई में ऐसी लापरवाही न हो।

फिलहाल तिरुवल्लूर जिला प्रशासन और आपदा प्रबंधन टीमें लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं। गैस को सुरक्षित तरीके से हटाने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही क्षेत्र को सामान्य घोषित किया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा और प्रभावित श्रमिकों का बेहतर इलाज है।

कुल मिलाकर, तिरुवल्लूर जिले में अमोनिया गैस रिसाव की यह घटना गंभीर औद्योगिक सुरक्षा चूक को दर्शाती है, जिसके बाद अब प्लांट से गैस को सुरक्षित निकालने का अभियान चलाया जा रहा है और जांच प्रक्रिया भी तेज कर दी गई है।

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