तमिलनाडू

ऑनलाइन ठगी के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ उपलब्ध कराने के आरोप में बैंक कर्मचारी समेत तीन गिरफ्तार

Kavita2
17 July 2026 9:21 AM IST
ऑनलाइन ठगी के लिए ‘म्यूल अकाउंट’ उपलब्ध कराने के आरोप में बैंक कर्मचारी समेत तीन गिरफ्तार
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चेन्नई: देशभर में बढ़ते साइबर अपराध और ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी के मामलों के बीच पुलिस ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश करने का दावा किया है, जो कथित रूप से साइबर ठगों को अवैध लेनदेन के लिए फर्जी बैंक खाते उपलब्ध करा रहा था। इस मामले में गुरुवार को एक बैंक कर्मचारी समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया। जांच एजेंसियों का आरोप है कि गिरफ्तार आरोपियों ने नकली कंपनियों और फर्जी पहचान वाले व्यक्तियों के नाम पर करीब 22 बैंक खाते खुलवाए और बाद में इन्हें ऑनलाइन धोखाधड़ी करने वाले गिरोहों को बेच दिया।

प्रारंभिक जांच के अनुसार, ये बैंक खाते तथाकथित ‘म्यूल अकाउंट’ (Mule Accounts) के रूप में इस्तेमाल किए जा रहे थे। साइबर अपराध की दुनिया में म्यूल अकाउंट ऐसे बैंक खातों को कहा जाता है जिनका उपयोग धोखाधड़ी से प्राप्त धनराशि को एक स्थान से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने, छिपाने या निकालने के लिए किया जाता है। इससे अपराधियों की वास्तविक पहचान छिपी रहती है और जांच एजेंसियों के लिए धन के स्रोत तक पहुंचना अधिक कठिन हो जाता है।

पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों में एक निजी बैंक का कर्मचारी भी शामिल है। आरोप है कि उसने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बैंक खाते खोलने की प्रक्रिया को आसान बनाया और आवश्यक सत्यापन प्रक्रिया में अनियमितताएं बरतीं। अन्य दो आरोपियों पर फर्जी दस्तावेज तैयार करने, नकली कंपनियां बनाने और उनके नाम पर बैंक खाते खुलवाने में सहयोग करने का आरोप है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि गिरोह ने कथित तौर पर ऐसी कंपनियां तैयार कीं, जिनका वास्तविक कारोबार से कोई संबंध नहीं था। इसके अलावा कुछ बैंक खाते ऐसे व्यक्तियों के नाम पर खोले गए, जिनकी पहचान और दस्तावेजों के संबंध में भी संदेह जताया गया है। आरोप है कि खाते खुलने के बाद उन्हें साइबर ठगों को निर्धारित रकम लेकर उपलब्ध कराया जाता था।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इन खातों का इस्तेमाल विभिन्न प्रकार की ऑनलाइन ठगी से प्राप्त रकम जमा करने और उसे आगे दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता था। साइबर अपराधी आमतौर पर लोगों को निवेश, नौकरी, लोन, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी, केवाईसी अपडेट, ई-कॉमर्स और अन्य तरीकों से ठगने के बाद रकम सबसे पहले ऐसे म्यूल अकाउंट में ट्रांसफर कराते हैं। इसके बाद धनराशि को कई खातों में बांटकर जांच से बचने की कोशिश की जाती है।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच के दौरान संदिग्ध बैंक खातों में हुए लेनदेन की जानकारी जुटाई गई। डिजिटल साक्ष्यों, बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर तीन लोगों की भूमिका सामने आने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। आरोपियों से पूछताछ जारी है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि इस नेटवर्क से और कितने लोग जुड़े हुए हैं।

जांच एजेंसियों को संदेह है कि यह नेटवर्क केवल एक शहर या राज्य तक सीमित नहीं हो सकता। संभावना जताई जा रही है कि इन खातों का उपयोग विभिन्न राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों द्वारा किया गया हो। इसी कारण पुलिस अब बैंक खातों में हुए सभी लेनदेन, लाभार्थियों और संबंधित मोबाइल नंबरों की भी जांच कर रही है।

अधिकारियों का कहना है कि मामले में यदि अन्य बैंक कर्मचारियों, दस्तावेज तैयार करने वाले एजेंटों या बिचौलियों की भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि क्या इन खातों के जरिए बड़ी मात्रा में धोखाधड़ी की रकम का लेनदेन हुआ है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि म्यूल अकाउंट ऑनलाइन वित्तीय अपराधों की एक महत्वपूर्ण कड़ी बन चुके हैं। यदि बैंक खाते खोलते समय ग्राहक की पहचान (केवाईसी) की प्रक्रिया का सख्ती से पालन किया जाए और संदिग्ध लेनदेन पर समय रहते निगरानी रखी जाए, तो ऐसे मामलों को काफी हद तक रोका जा सकता है।

विशेषज्ञों ने आम नागरिकों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है। किसी भी व्यक्ति को अपना बैंक खाता, एटीएम कार्ड, चेकबुक या इंटरनेट बैंकिंग की जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को नहीं देनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति कमीशन या आसान कमाई का लालच देकर बैंक खाता उपयोग करने या किराये पर देने का प्रस्ताव देता है, तो उसे तुरंत अस्वीकार करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना कानूनी कार्रवाई का कारण बन सकता है।

बैंकिंग क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि वित्तीय संस्थानों को भी नए खाते खोलते समय दस्तावेजों का गहन सत्यापन करना चाहिए। संदिग्ध कंपनियों, असामान्य लेनदेन और एक ही व्यक्ति या समूह से जुड़े कई खातों पर विशेष निगरानी रखने की आवश्यकता है। इससे साइबर अपराधियों के नेटवर्क को शुरुआती स्तर पर ही रोका जा सकता है।

फिलहाल पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क का पता लगाने में जुटी है। जांच का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है और यह पता लगाया जा रहा है कि इन 22 कथित फर्जी बैंक खातों के माध्यम से कितनी राशि का लेनदेन हुआ तथा इससे कितने लोग ऑनलाइन ठगी का शिकार बने। अधिकारियों का कहना है कि मामले में जांच पूरी होने के बाद आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी और यदि इस गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाएगा।

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