
Tamil Nadu तमिलनाडु: सरकार ने सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की घोषणा की है। इसके तहत कक्षा 6 से 10 तक की छात्राओं को कराटे, जूडो, ताइक्वांडो और सिलंबम जैसे मार्शल आर्ट्स की तीन महीने की सेल्फ-डिफेंस ट्रेनिंग दी जाएगी। यह प्रशिक्षण अगस्त के पहले सप्ताह से शुरू किया जाएगा और इसका उद्देश्य छात्राओं को आत्मरक्षा के लिए सक्षम बनाना है।
स्टेट प्रोजेक्ट डायरेक्टरेट ऑफ इंटीग्रेटेड स्कूल एजुकेशन की ओर से इस योजना के लिए विस्तृत गाइडलाइंस जारी कर दी गई हैं। इसके अनुसार, मौजूदा शैक्षणिक वर्ष में सरकारी मिडिल स्कूलों (कक्षा 6 से 8) और सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूलों (कक्षा 6 से 10) में पढ़ने वाली छात्राओं को यह प्रशिक्षण दिया जाएगा। यह कार्यक्रम विशेष रूप से छात्राओं की सुरक्षा और आत्मविश्वास बढ़ाने पर केंद्रित है।
सरकारी निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक स्कूल में कम से कम 10 और अधिकतम 100 छात्राओं को इस प्रशिक्षण में शामिल किया जाएगा। प्रशिक्षण की अवधि तीन महीने निर्धारित की गई है और इस दौरान नियमित रूप से मार्शल आर्ट्स की कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही ब्रीदिंग एक्सरसाइज़, फिजिकल एक्सरसाइज़ और मेडिटेशन को भी प्रशिक्षण का हिस्सा बनाया गया है, ताकि छात्राओं का शारीरिक और मानसिक विकास दोनों सुनिश्चित किया जा सके।
इस योजना के तहत कुल 24 ट्रेनिंग कोर्स संचालित किए जाएंगे, जिन्हें प्रत्येक महीने आठ हिस्सों में विभाजित किया जाएगा। इसका उद्देश्य प्रशिक्षण को व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से पूरा करना है, ताकि छात्राओं को बेहतर तरीके से कौशल सिखाया जा सके।
सरकार ने इस कार्यक्रम के लिए आर्थिक सहायता भी निर्धारित की है। प्रत्येक स्कूल को तीन महीने के प्रशिक्षण के लिए 12,000 रुपये की राशि प्रदान की जाएगी। इस फंड का उपयोग प्रशिक्षण सामग्री, आयोजन और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं के लिए किया जाएगा।
इसके अलावा, मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षकों की नियुक्ति को लेकर भी स्पष्ट नियम बनाए गए हैं। प्रशिक्षकों की मासिक सैलरी 4,000 रुपये तय की गई है। साथ ही यह भी अनिवार्य किया गया है कि प्रशिक्षकों की नियुक्ति से पहले उनके खिलाफ संबंधित पुलिस स्टेशन से क्लीन चिट रिपोर्ट प्राप्त की जाए, ताकि सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन हो सके।
शिक्षा विभाग का कहना है कि यह पहल छात्राओं को न केवल आत्मरक्षा के लिए तैयार करेगी, बल्कि उनमें आत्मविश्वास, अनुशासन और शारीरिक फिटनेस को भी बढ़ावा देगी। खासकर स्कूल जाने वाली लड़कियों के लिए यह कार्यक्रम सुरक्षा की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
मार्शल आर्ट्स प्रशिक्षण में कराटे, जूडो, ताइक्वांडो और पारंपरिक सिलंबम को शामिल किया गया है, जो न केवल शारीरिक शक्ति बढ़ाने में मदद करेंगे बल्कि त्वरित प्रतिक्रिया और आत्मरक्षा की तकनीकों को भी सिखाएंगे। इसके साथ ही योग और मेडिटेशन को जोड़कर मानसिक संतुलन और एकाग्रता पर भी ध्यान दिया जाएगा।
इस योजना को राज्य के विभिन्न स्कूलों में चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और इसकी निगरानी संबंधित शिक्षा अधिकारियों द्वारा की जाएगी। विभाग का मानना है कि इस तरह की पहल से छात्राओं में सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे किसी भी चुनौतीपूर्ण स्थिति में खुद को सुरक्षित रखने में सक्षम होंगी।
फिलहाल इस योजना को लेकर स्कूलों में तैयारी शुरू हो गई है और जल्द ही प्रशिक्षकों की नियुक्ति और बैच गठन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। शिक्षा विभाग को उम्मीद है कि यह कार्यक्रम छात्राओं के समग्र विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।





