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Madurai मदुरै। भारत के कोने-कोने में ऐसे मंदिर स्थित हैं, जिन्हें देखकर मुंह से बरबस निकल पड़ता है अद्भुत, अकल्पनीय, अति सुंदर। तमिलनाडु के मदुरै में स्थित श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर भी कुछ ऐसा ही है। 2 हजार साल से भी पुराने मंदिर में माता पार्वती का रहस्यमयी रूप देखने को मिलता है। श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर कोई साधारण मंदिर नहीं है, यह जीता-जागता इतिहास है, प्रेम का महाकाव्य है और द्रविड़ वास्तुकला का मुकुट है। मंदिर में साल भर बड़ी संख्या में भक्त माता पार्वतीके दर्शन को आते हैं।
तमिलनाडु पर्यटन विभाग के ऑफिशियल वेबसाइट पर मीनाक्षी अम्मन मंदिर के बारे में विस्तार से जानकारी मिलती है। तमिलनाडु के साथ ही देश के मुख्य मंदिरों में श्री मीनाक्षी अम्मन मंदिर की गिनती होती है। यह मंदिर देवी मीनाक्षी और भगवान सुन्दरेश्वर (शिव) को समर्पित है और 2000 साल से भी अधिक पुराना माना जाता है। धार्मिक पुस्तकों में इसका जिक्र मिलता है। मान्यता है कि मदुरै यात्रा के दौरान देवराज इंद्र को यहां एक स्वयंभू शिवलिंग मिला था, जिसे उन्होंने स्थापित किया था। साल 1310 में यह मंदिर पूरी तरह नष्ट हो गया था, लेकिन 14वीं सदी में इसे फिर से भव्य रूप दिया गया। इसकी सबसे बड़ी खासियत इसके 14 विशाल गोपुरम (टावर) हैं, जो लगभग 50 मीटर ऊंचे हैं और इन पर हजारों रंग-बिरंगी मूर्तियां उकेरी गई हैं।
मंदिर में 1000 खंभों वाला एक हॉल है, जिसमें कुछ खंभे छूने पर संगीत की ध्वनि निकालते हैं, जिन्हें म्यूजिकल पिलर भी कहा जाता है। मंदिर परिसर के बीच में एक बड़ा पवित्र तालाब है और दीवारों पर सुंदर चित्र बने हैं, जो भगवान शिव की 64 लीलाओं की कहानियों का वर्णन करते हैं। मीनाक्षी देवी की आंखें मीन के समान हैं। हर साल अप्रैल-मई में चिथिरई ब्रह्मोत्सव में देवी मीनाक्षी और सुन्दरेश्वर का दिव्य विवाह का आयोजन होता है, जिसे देखने के लिए प्रतिवर्ष बड़ी संख्या में आते हैं। नवरात्रि, अवनी मूलम और मासी मंडला जैसे त्योहार भी धूमधाम से मनाए जाते हैं।
मंदिर में एक म्यूजियम भी है जिसमें पुरानी मूर्तियां, सिक्के, चित्र और शक्ति के आठ रूपों की मूर्तियां भी रखी हैं। अब सवाल है कि मंदिर कैसे पहुंचे, तो मदुरै एयरपोर्ट पहुंचने के बाद मीनाक्षी मंदिर के लिए आप टैक्सी या कैब बुक कर सकते हैं। वहीं, मदुरै रेलवे स्टेशन सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन है।
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