
Tamil Nadu तमिलनाडु: पूर्व फाइनेंस मिनिस्टर और थिरुचुझी विधानसभा क्षेत्र के विधायक थंगम थेन्नारसु ने जोर देकर कहा है कि चुनावी वादों के अनुसार किसानों का कोऑपरेटिव बैंकों से लिया गया क्रॉप लोन पूरी तरह से माफ़ किया जाना चाहिए। उन्होंने हाल ही में इस मामले को लेकर अपनी चिंता व्यक्त की और प्रशासन पर सवाल उठाए कि क्या चुनावी वादों को पूरा करने में देरी या आंशिक कार्रवाई जानबूझकर की गई है।
थंगम थेन्नारसु ने अपनी X (पूर्व ट्विटर) वेबसाइट पर पोस्ट किया कि रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) के नियमों का जिक्र चुनाव के समय नहीं किया जाता, बल्कि केवल तब सामने लाया जाता है जब वादों को पूरा करने की बारी आती है। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या यह प्रशासनिक नाकाबिलियत है या किसानों के साथ जानबूझकर धोखा किया गया है।
पूर्व मंत्री ने कहा कि चुनावों में राजनीतिक दल अक्सर किसानों के लिए क्रॉप लोन माफ़ी का वादा करते हैं। लेकिन जब सरकार उस वादे को पूरा करने की कोशिश करती है, तब RBI की गाइडलाइंस और नियमों को बाधा के रूप में पेश किया जाता है। उनका कहना है कि इससे किसानों में असंतोष और विश्वास की कमी पैदा होती है।
हालांकि, फाइनेंस मिनिस्टर ने हाल ही में बताया कि कोऑपरेटिव बैंकों से किसानों का लिया गया क्रॉप लोन माफ़ कर दिया गया है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई RBI की गाइडलाइंस के मुताबिक की गई थी और इसमें किसी भी तरह का नियमों का उल्लंघन नहीं हुआ। फाइनेंस मिनिस्टर ने यह भी कहा कि किसानों को वित्तीय राहत देने के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है और क्रॉप लोन माफ़ी की प्रक्रिया पारदर्शी ढंग से पूरी की गई।
विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों के क्रॉप लोन माफ़ी के मुद्दे पर राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टिकोण अलग हो सकते हैं। जबकि प्रशासन यह दावा करता है कि सभी नियमों का पालन हुआ, वहीं विपक्ष और पूर्व नेताओं द्वारा उठाए गए सवाल यह दिखाते हैं कि किसानों के बीच इस प्रक्रिया को लेकर अभी भी संदेह और असंतोष मौजूद है।
थंगम थेन्नारसु ने इस अवसर पर यह भी कहा कि किसानों की आर्थिक स्थिति को सुधारने और उन्हें राहत देने के लिए केवल लोन माफ़ी ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें कृषि निवेश, फसल बीमा और तकनीकी मदद जैसी अन्य सुविधाएँ भी उपलब्ध कराई जानी चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि भविष्य में किसी भी निर्णय में किसानों के हित को प्राथमिकता दी जाए और सभी प्रक्रियाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले समय में राज्य की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। चुनावी वादों और उनकी पूर्णता के बीच का अंतर जनता के विश्वास को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में सरकार और प्रशासन दोनों के लिए यह चुनौती होगी कि वे किसानों को भरोसा दिलाएँ और उनके हितों की रक्षा सुनिश्चित करें।
इस बीच, किसानों और किसान संगठनों ने भी इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। अधिकांश किसानों ने क्रॉप लोन माफ़ी की प्रक्रिया को सराहा है, लेकिन कुछ ने कहा कि उन्हें पूरी तरह स्पष्ट नहीं बताया गया कि नियमों के कारण किस हिस्से का क्रॉप लोन माफ़ नहीं हुआ।





