तमिलनाडू

थलपति विजय ने उपचुनाव में खोले पत्ते TVK उम्मीदवारों का ऐलान

Ratna Netam
10 Sept 2026 4:32 PM IST
थलपति विजय ने उपचुनाव में खोले पत्ते TVK उम्मीदवारों का ऐलान
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चेन्नई। तमिलनाडु की राजनीति में विधानसभा चुनाव के कुछ ही महीनों बाद एक बार फिर चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है। अभिनेता से राजनेता और अब मुख्यमंत्री बने सी. जोसेफ विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम यानी TVK ने मदुरांतकम और धारापुरम विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया है। विजय ने मदुरांतकम से के. मरगथम कुमारवेल और धारापुरम से पी. सत्यबामा को चुनाव मैदान में उतारा है।
दोनों सीटों पर 6 अक्टूबर 2026 को मतदान होगा, जबकि 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी। नामांकन की प्रक्रिया 9 सितंबर से शुरू हो चुकी है और 16 सितंबर तक उम्मीदवार अपना नामांकन दाखिल कर सकेंगे।
ये उपचुनाव केवल दो सीटों पर जीत-हार तक सीमित नहीं रहने वाले हैं। विधानसभा चुनाव के बाद सत्ता संभालने वाली TVK सरकार के लिए इसे पहला बड़ा चुनावी टेस्ट माना जा रहा है। वहीं DMK के लिए यह मौका विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद अपनी राजनीतिक ताकत दिखाने का है। AIADMK भी दोनों सीटों को वापस हासिल करने की कोशिश में है, इसलिए चुनावी लड़ाई बहुकोणीय और बेहद दिलचस्प हो सकती है।
मदुरांतकम से मरगथम कुमारवेल पर दांव
विजय ने मदुरांतकम विधानसभा सीट से के. मरगथम कुमारवेल को टिकट दिया है। मरगथम इस सीट से AIADMK विधायक चुनी गई थीं, लेकिन बाद में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा देकर विजय की TVK का दामन थाम लिया।
उनके इस्तीफे के कारण ही मदुरांतकम सीट खाली हुई और यहां उपचुनाव की जरूरत पड़ी। अब TVK ने उन्हें उसी सीट से दोबारा जनता के बीच भेजने का फैसला किया है।
इस फैसले के पीछे साफ राजनीतिक रणनीति दिखाई देती है। मरगथम पहले ही इस सीट से चुनाव जीत चुकी हैं और स्थानीय स्तर पर उनका अपना राजनीतिक नेटवर्क है। ऐसे में TVK ने नए चेहरे की बजाय चुनावी अनुभव रखने वाली नेता पर भरोसा किया है।
मदुरांतकम अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा क्षेत्र है। यहां DMK ने पूर्व विधायक और पार्टी के कानूनी प्रकोष्ठ से जुड़े आई. परंथामन को उम्मीदवार बनाया है। परंथामन 2021 से 2026 तक एग्मोर से विधायक रह चुके हैं और हाल के दिनों में TVK के खिलाफ DMK की ओर से मुखर चेहरों में शामिल रहे हैं।
ऐसे में मदुरांतकम में मरगथम और परंथामन की लड़ाई पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी।
धारापुरम में सत्यबामा को टिकट
दूसरी सीट धारापुरम से विजय ने पी. सत्यबामा को उम्मीदवार बनाया है।
सत्यबामा भी 2026 के विधानसभा चुनाव में AIADMK के टिकट पर जीतकर विधायक बनी थीं। बाद में उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा दिया और TVK में शामिल हो गईं। उनके इस्तीफे से धारापुरम सीट खाली हुई। अब विजय ने उपचुनाव में उन्हें ही TVK का उम्मीदवार बनाकर मैदान में उतार दिया है।
यहां DMK ने अधिवक्ता एस. सुगन्या पर दांव लगाया है। सुगन्या DMK महिला विंग से जुड़ी हैं। पार्टी ने यहां अपेक्षाकृत युवा चेहरे को चुनाव मैदान में उतारकर TVK की रणनीति का जवाब देने की कोशिश की है।
धारापुरम भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीट है।
दोनों सीटें AIADMK ने जीती थीं
इस उपचुनाव का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि 2026 के विधानसभा चुनाव में दोनों सीटों पर AIADMK ने जीत दर्ज की थी।
मदुरांतकम में मरगथम कुमारवेल और धारापुरम में पी. सत्यबामा AIADMK के टिकट पर जीती थीं। बाद में दोनों विधायकों ने पार्टी छोड़ दी और विजय के साथ चली गईं।
यही कारण है कि AIADMK के लिए भी ये उपचुनाव प्रतिष्ठा का सवाल हैं।
पार्टी महासचिव एडप्पादी के. पलानीस्वामी ने दोनों सीटों को दोबारा जीतने का भरोसा जताया है। AIADMK ने उम्मीदवारों के लिए आवेदन भी मंगाए हैं और अपने सहयोगी दलों से समर्थन जुटाने की कोशिश शुरू की है।
इसलिए चुनाव को केवल TVK बनाम DMK की सीधी लड़ाई कहना पूरी तस्वीर नहीं दिखाता। AIADMK दोनों सीटों की पूर्व विजेता है और उसका वोट आधार मुकाबले को त्रिकोणीय बना सकता है।
DMK ने पहले ही खोल दिए थे पत्ते
TVK से एक दिन पहले DMK ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान कर चुनावी चाल चल दी थी।
DMK अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने मदुरांतकम से आई. परंथामन और धारापुरम से एस. सुगन्या को उम्मीदवार बनाया। दिलचस्प बात यह है कि पार्टी ने दोनों सीटों पर कानूनी पृष्ठभूमि वाले नेताओं को मैदान में उतारा है।
2026 के विधानसभा चुनाव में मदुरांतकम में DMK तीसरे स्थान पर रही थी। यहां AIADMK ने जीत हासिल की थी, जबकि TVK दूसरे स्थान पर थी। धारापुरम में भी AIADMK विजेता रही थी।
इसलिए DMK के सामने चुनौती केवल TVK को हराने की नहीं बल्कि अपने पुराने वोट बैंक को फिर से मजबूत करने की भी है।
विजय सरकार की पहली बड़ी चुनावी परीक्षा
विधानसभा चुनाव के बाद बनी विजय सरकार के लिए ये उपचुनाव राजनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हैं।
TVK की सरकार को सत्ता में आए अभी कुछ ही महीने हुए हैं। ऐसे में मतदाता सरकार के शुरुआती कामकाज को किस नजर से देख रहे हैं, इसका पहला संकेत इन दो सीटों के नतीजों से मिल सकता है।
TVK अगर दोनों सीटें जीत जाती है तो विजय इसे अपनी सरकार और राजनीतिक नेतृत्व पर जनता की मुहर के तौर पर पेश कर सकते हैं।
लेकिन अगर पार्टी को हार का सामना करना पड़ता है या विधानसभा चुनाव के मुकाबले उसका वोट शेयर काफी नीचे जाता है तो विपक्ष को सरकार पर हमला करने का बड़ा मौका मिल जाएगा।
विजय ने क्यों चुने पुराने विधायक?
TVK के उम्मीदवार चयन में एक खास राजनीतिक संदेश भी छिपा है।
दोनों उम्मीदवार दूसरी पार्टी से आए हुए पूर्व विधायक हैं। विजय के सामने विकल्प था कि वह अपनी पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं या नए चेहरों को मैदान में उतारें, लेकिन उन्होंने चुनाव जीत चुके अनुभवी नेताओं को प्राथमिकता दी।
इससे संकेत मिलता है कि TVK इस उपचुनाव में किसी तरह का बड़ा प्रयोग करने के बजाय जीत की संभावना को प्राथमिकता दे रही है।
मरगथम कुमारवेल और सत्यबामा दोनों अपने-अपने क्षेत्रों में चुनाव लड़ चुकी हैं। स्थानीय समीकरण, कार्यकर्ताओं और मतदाताओं से परिचय उनके लिए फायदा बन सकता है।
दूसरी तरफ विपक्ष TVK पर दल-बदल कर आए नेताओं को पुरस्कृत करने का आरोप लगाकर इसे चुनावी मुद्दा बना सकता है।
DMK के लिए क्यों जरूरी है जीत?
2026 विधानसभा चुनाव के बाद DMK अब प्रमुख विपक्षी ताकत के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना चाहती है।
उपचुनाव में कम से कम एक सीट जीतना पार्टी के लिए मनोवैज्ञानिक बढ़त साबित हो सकता है। इससे DMK यह संदेश देने की कोशिश करेगी कि विधानसभा चुनाव के बाद भी उसका जनाधार मजबूत है और वह विजय सरकार को सीधी चुनौती देने की स्थिति में है।
न्यू इंडियन एक्सप्रेस के विश्लेषण के मुताबिक DMK अगर एक सीट जीतती है या दोनों पर मजबूत दूसरे स्थान पर रहती है तो इससे प्रमुख विपक्ष के रूप में उसके दावे को मजबूती मिलेगी।
इसी वजह से दोनों सीटों पर पार्टी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
AIADMK के सामने अस्तित्व और प्रतिष्ठा की चुनौती
सबसे ज्यादा दबाव AIADMK पर भी हो सकता है।
कारण साफ है—दोनों सीटें उसी ने कुछ महीने पहले जीती थीं और उसके दोनों निर्वाचित विधायक पार्टी छोड़कर TVK में चले गए।
अगर AIADMK दोनों सीटें हार जाती है और तीसरे स्थान पर चली जाती है तो इससे कार्यकर्ताओं के मनोबल पर असर पड़ सकता है। दूसरी तरफ एक या दोनों सीटों पर जीत पार्टी के लिए जबरदस्त वापसी मानी जाएगी।
इसलिए मदुरांतकम और धारापुरम में मुकाबला TVK और DMK के साथ AIADMK के भविष्य की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकता है।
6 अक्टूबर को मतदान 9 को नतीजे
चुनाव कार्यक्रम के मुताबिक दोनों विधानसभा क्षेत्रों में 9 सितंबर से नामांकन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।
16 सितंबर नामांकन की अंतिम तारीख है। 17 सितंबर को नामांकन पत्रों की जांच होगी और 19 सितंबर तक उम्मीदवार अपना नाम वापस ले सकेंगे।
इसके बाद 6 अक्टूबर को मतदान होगा और 9 अक्टूबर को मतगणना के साथ नतीजे घोषित किए जाएंगे।
तमिलनाडु विधानसभा में कुल सात सीटें खाली हुई थीं, लेकिन चुनाव आयोग ने फिलहाल मदुरांतकम और धारापुरम में ही उपचुनाव घोषित किया है। अन्य पांच सीटों से जुड़े चुनावी विवाद अदालत में लंबित होने के कारण उन पर अभी उपचुनाव घोषित नहीं किए गए हैं।
दो सीटों के नतीजे देंगे बड़ा राजनीतिक संदेश
संख्या के लिहाज से देखा जाए तो केवल दो विधानसभा सीटों का उपचुनाव किसी सरकार की स्थिरता का अकेला पैमाना नहीं होता। लेकिन राजनीतिक संदेश के लिहाज से मदुरांतकम और धारापुरम के नतीजे बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
विजय के लिए यह मुख्यमंत्री बनने के बाद मतदाताओं के बीच पहला बड़ा चुनावी टेस्ट है। स्टालिन और DMK के लिए यह विधानसभा चुनाव के बाद वापसी का मौका है। वहीं AIADMK के लिए अपनी जीती हुई सीटों और वोट बैंक को बचाने की चुनौती है।
TVK ने दोनों पूर्व AIADMK विधायकों को ही उम्मीदवार बनाकर यह साफ कर दिया है कि पार्टी इन सीटों को हर हाल में अपने खाते में जोड़ना चाहती है। दूसरी तरफ DMK ने नए और पुराने चेहरों का मिश्रण उतारकर चुनौती पेश की है।
अब असली फैसला 6 अक्टूबर को मतदाता करेंगे और 9 अक्टूबर को आने वाले नतीजे बताएंगे कि तमिलनाडु की बदलती राजनीति में विजय की TVK अपनी पकड़ और मजबूत करती है या DMK और AIADMK उसे उपचुनाव में बड़ा झटका देने में कामयाब होते हैं।
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