
चेन्नई: मंगलवार को वित्त मंत्री एन. मारी विल्सन ने 2021-22 से 2025-26 के पांच साल के लिए तमिलनाडु की आर्थिक स्थिति पर एक 'श्वेत पत्र' (White Paper) जारी किया, जिसमें राज्य की वित्तीय हालत काफी खराब बताई गई है। रिपोर्ट में संभावित देनदारियों, गारंटी और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (PSUs) की जिम्मेदारियों को शामिल करते हुए तमिलनाडु पर "असली कर्ज का बोझ" 13.18 लाख करोड़ रुपये आंका गया है।
रिपोर्ट में वित्तीय गिरावट को "चक्रीय (cyclical) के बजाय संरचनात्मक (structural)" बताया गया है। इसमें कहा गया है कि राज्य पर बकाया कर्ज लगभग दोगुना होकर 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है, राजस्व घाटा रिकॉर्ड 78,324 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, SOTR-GSDP अनुपात में भारी गिरावट आई है, और कोविड के बाद के पांच वर्षों में ब्याज भुगतान पूंजीगत व्यय (capital expenditure) से भी अधिक हो गया है।
हालांकि, वित्त मंत्री ने भरोसा जताया कि भ्रष्टाचार-मुक्त शासन, बेहतर राजस्व जुटाने, खर्च में कुशलता, राजस्व स्रोतों में 'लीकेज' (बर्बादी/चोरी) को रोकने और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में सुधार करके मौजूदा स्थिति को बदला जा सकता है।
'असली राजस्व घाटा 90,500 करोड़ रुपये और राजकोषीय घाटा 1.64 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है'
राज्य सचिवालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए वित्त मंत्री एन. मारी विल्सन ने कहा, "इस गिरावट को ठीक किया जाएगा और हम तमिलनाडु को फिर से नंबर वन स्थान पर लाएंगे।"
पिछली सरकार द्वारा बिना जरूरत के फंड आवंटित की गई योजनाओं के बारे में पूछे जाने पर मंत्री ने कहा, "हमने कभी नहीं कहा कि कल्याणकारी योजनाएं अच्छी नहीं हैं। बिना आय के स्रोत बनाए योजनाओं की घोषणा करने से मुश्किलें पैदा होती हैं। हम बस इसी बात की ओर इशारा कर रहे हैं।"





