
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के स्वास्थ्य ढांचे को लेकर एक महत्वपूर्ण अध्ययन सामने आया है, जिसमें बताया गया है कि COVID-19 महामारी के बाद राज्य का इमरजेंसी हेल्थ सिस्टम पहले की तुलना में काफी मजबूत हुआ है। इस स्टडी में यह भी पाया गया है कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य संकेतकों (mother and child health indicators) में स्पष्ट सुधार हुआ है।
यह अध्ययन IIT मद्रास की ओर से किया गया, जिसमें एक टीम ने महामारी के बाद तमिलनाडु की स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा की। इस टीम का नेतृत्व रिटायर्ड IPS अधिकारी कंदासामी ने किया। इसमें बेंगलुरु स्थित मूडीज एनालिटिक्स के एक एसोसिएट रिसर्चर भी शामिल थे।
स्टडी में राज्य की प्रमुख 108 एम्बुलेंस सेवा के 2017 से 2024 तक के आठ वर्षों के डेटा का विश्लेषण किया गया। इस विश्लेषण का उद्देश्य यह समझना था कि महामारी के बाद स्वास्थ्य सेवाओं की कार्यक्षमता और आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली में क्या बदलाव आए हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, महामारी के दौरान आई बाधाओं के बाद तमिलनाडु का हेल्थकेयर सिस्टम तेजी से रिकवर हुआ और इसकी कार्यक्षमता में सुधार देखा गया। अध्ययन में कहा गया कि आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और प्रभावशीलता दोनों में बढ़ोतरी हुई है।
सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्षों में मातृ मृत्यु दर में 19 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। इसके अलावा घर पर होने वाली डिलीवरी में 36 प्रतिशत से अधिक की कमी आई है, जो संस्थागत प्रसव (institutional deliveries) में सुधार का संकेत देती है।
स्टडी में यह भी पाया गया कि मिसकैरेज के मामलों में 28 प्रतिशत की कमी आई है। वहीं नवजात शिशु मृत्यु दर में 17 प्रतिशत और शिशु मृत्यु दर में 19 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है।
इन आंकड़ों के आधार पर निष्कर्ष निकाला गया है कि राज्य में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं में लगातार सुधार हुआ है और स्वास्थ्य प्रणाली पहले की तुलना में अधिक प्रभावी बनी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि 108 एम्बुलेंस सेवा जैसे मजबूत आपातकालीन नेटवर्क और स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता ने इस सुधार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अध्ययन में यह भी संकेत दिया गया है कि महामारी के बाद किए गए सुधारों का सकारात्मक असर ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में देखा गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु की स्वास्थ्य प्रणाली अब पहले से अधिक तैयार और प्रतिक्रियाशील है, जिससे आपात स्थितियों में समय पर चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इस अध्ययन को राज्य की स्वास्थ्य नीति के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, क्योंकि यह दिखाता है कि सही योजना और प्रणालीगत सुधारों से सार्वजनिक स्वास्थ्य संकेतकों में बड़ा बदलाव संभव है।





