
Tamil Nadu तमिलनाडु: वांचीनाथन की पुण्यतिथि के अवसर पर उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान और बलिदान को याद किया। इस मौके पर उन्होंने कहा कि वांचीनाथन ने अंग्रेजी शासन के दौरान स्वदेशी आंदोलन को दबाने के लिए अपनाए गए क्रूर और कठोर तरीकों का निडरता से विरोध किया था। उन्होंने कहा कि वांचीनाथन का जीवन देशभक्ति, साहस और त्याग का प्रतीक है, जिसे भारतीय इतिहास में हमेशा सम्मान के साथ याद किया जाएगा।
उप-राष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने इस अवसर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट साझा किया। अपने संदेश में उन्होंने बताया कि उन्होंने उप-राष्ट्रपति आवास पर स्वतंत्रता सेनानी और शहीद वांचीनाथन को उनकी पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने लिखा कि वांचीनाथन ने विदेशी शासन के खिलाफ और स्वदेशी आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजों द्वारा उठाए गए कठोर कदमों के खिलाफ मजबूती से आवाज उठाई थी।
उन्होंने अपने संदेश में यह भी उल्लेख किया कि वांचीनाथन अंग्रेजी शासन की नीतियों और दमनकारी कार्यवाहियों के निडर विरोधी थे। उनके अनुसार उस समय स्वदेशी आंदोलन को कमजोर करने और स्वतंत्रता की भावना को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा कई कठोर कदम उठाए जा रहे थे, लेकिन वांचीनाथन जैसे क्रांतिकारियों ने इन नीतियों का डटकर सामना किया।
सी.पी. राधाकृष्णन ने आगे कहा कि वांचीनाथन ने मणियाची रेलवे स्टेशन पर स्वतंत्रता सेनानियों के साथ हुए कथित अत्याचारों के बाद ब्रिटिश शासन के खिलाफ कठोर कदम उठाया था। उन्होंने कहा कि उस समय की परिस्थितियों में वांचीनाथन ने अपना जीवन देश को समर्पित कर दिया और ब्रिटिश अधिकारी तिरुनेलवेली जिले के कलेक्टर के खिलाफ अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त की, जो उस दौर की घटनाओं का हिस्सा था।
उप-राष्ट्रपति ने कहा कि वांचीनाथन का बलिदान भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि ऐसे स्वतंत्रता सेनानियों की वजह से ही देश में आजादी की भावना मजबूत हुई और लोगों में ब्रिटिश शासन के खिलाफ जागरूकता फैली।
उन्होंने यह भी कहा कि स्वदेशी आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजों द्वारा किए गए प्रयासों का वांचीनाथन जैसे वीरों ने खुलकर विरोध किया और अपने साहस से यह साबित किया कि देशभक्ति किसी भी दमनकारी शक्ति से बड़ी होती है। उनके अनुसार वांचीनाथन का जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा स्रोत है।
इस अवसर पर देशभर में वांचीनाथन को श्रद्धांजलि दी गई और उनके योगदान को याद किया गया। उप-राष्ट्रपति के इस संदेश के बाद उनके बलिदान और स्वतंत्रता संग्राम में उनकी भूमिका पर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है।





