तमिलनाडू

Tamil Nadu: बंधुआ मजदूरी से बच्चों को बचाने में सफलता, आरोपी को चार साल जेल

Ratna Netam
7 May 2026 2:49 PM IST
Tamil Nadu: बंधुआ मजदूरी से बच्चों को बचाने में सफलता, आरोपी को चार साल जेल
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Tamil Nadu.तमिलनाडु: आंध्र प्रदेश में मानवाधिकार संरक्षण के तहत पुलिस ने दो लड़कों को बंधुआ मजदूरी के जाल से मुक्त किया। इस मामले में आरोपी व्यक्ति को अदालत ने चार साल की कैद की सजा सुनाई है। यह कार्रवाई राज्य में बच्चों के खिलाफ मजदूरी और शोषण के मामलों में प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है।
पुलिस के अनुसार, लड़कों को एक निजी निर्माण स्थल पर जबरन काम पर लगाया गया था। उनका कहना था कि बच्चों के अभिभावक और स्थानीय लोग उन्हें सुरक्षा और रोजगार का वादा करके वहां लाए थे, लेकिन असली उद्देश्य उनका शोषण करना था। पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद तत्काल कार्रवाई की और दोनों बच्चों को मुक्त कराया।
जांच के दौरान यह पाया गया कि आरोपी व्यक्ति ने बच्चों को धमकी और डर का उपयोग करके मजदूरी करवाने के लिए मजबूर किया था। स्थानीय प्रशासन और बाल अधिकार संरक्षण एजेंसियों ने इस मामले में सहयोग किया। बच्चों को राहत केंद्र में रखा गया, जहां उन्हें सुरक्षा, पोषण और मानसिक सहारा प्रदान किया गया।
अदालत ने आरोपी को बंधुआ मजदूरी रोकथाम कानून और बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत दोषी पाया। अदालत ने कहा कि आरोपी की गतिविधियां न केवल कानूनी रूप से अपराध हैं, बल्कि समाज और बच्चों के विकास के लिए भी हानिकारक हैं। चार साल की सजा के साथ आरोपी पर जुर्माने और पुनर्वास संबंधी शर्तें भी लागू की गई हैं।
बाल अधिकार संगठनों ने इस फैसले का स्वागत किया और कहा कि यह न केवल बच्चों के लिए न्याय का संदेश है बल्कि अन्य अपराधियों के लिए भी चेतावनी है। उन्होंने राज्य प्रशासन से अपील की कि ऐसे मामलों में और सतर्कता बरती जाए और बच्चों को शिक्षा, सुरक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।
राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "हम बच्चों के खिलाफ होने वाले किसी भी प्रकार के शोषण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। इस मामले में सहयोग करने वाले सभी अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना करते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि भविष्य में इस तरह के मामलों को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाई जाएगी और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि बंधुआ मजदूरी के मामलों में सख्त कार्रवाई न केवल अपराधियों को रोकती है बल्कि समाज में बच्चों के अधिकारों के प्रति जागरूकता भी बढ़ाती है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि स्कूलों और सामुदायिक केंद्रों में बच्चों को उनके अधिकारों और सुरक्षा के उपायों के बारे में शिक्षा देना आवश्यक है।
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