तमिलनाडू

Tamil Nadu ने मरीन फिश प्रोडक्शन में देश में हासिल किया पहला स्थान, गुजरात को पीछे छोड़ा

Kavita2
1 May 2026 9:40 AM IST
Tamil Nadu ने मरीन फिश प्रोडक्शन में देश में हासिल किया पहला स्थान, गुजरात को पीछे छोड़ा
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Tamil Nadu तमिलनाडु: इंडियन काउंसिल ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च–सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (ICAR-CMFRI) की गुरुवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार तमिलनाडु ने देश में मरीन फिश प्रोडक्शन के क्षेत्र में पहला स्थान हासिल कर लिया है। राज्य ने 6.85 लाख टन मछली उत्पादन के साथ गुजरात को पीछे छोड़ते हुए यह उपलब्धि हासिल की है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 में भारत का कुल मरीन फिश प्रोडक्शन बढ़कर 3.57 मिलियन टन तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। इस वृद्धि को देश के समुद्री मत्स्य क्षेत्र के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

तमिलनाडु इस सूची में 6.85 लाख टन उत्पादन के साथ शीर्ष पर है। इसके बाद गुजरात दूसरे स्थान पर है, जहां उत्पादन में 15 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। यह गिरावट मौसम की खराब स्थिति, लंबे समय तक मछली पकड़ने पर रोक और चक्रवात जैसे कारणों से बताई गई है।

केरल 6.24 लाख टन मछली उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर है। यहां 2 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। वहीं बड़े राज्यों में कर्नाटक ने 44 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है, जबकि महाराष्ट्र में 18 प्रतिशत की बढ़ोतरी देखी गई है।

रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2025 में मछलियों की किस्मों में मैकेरल 2.70 लाख टन उत्पादन के साथ पहले स्थान पर रही। इसके बाद सेफेलोपोड्स 2.57 लाख टन और सार्डिन 2.53 लाख टन के साथ प्रमुख श्रेणी में शामिल रहे। यह आंकड़े देश के समुद्री मत्स्य उत्पादन की विविधता को दर्शाते हैं।

कुल सीफूड उत्पादन में केरल का हिस्सा 17 प्रतिशत बताया गया है, जो देश में एक महत्वपूर्ण योगदान माना जाता है।

आर्थिक दृष्टिकोण से भी मत्स्य उद्योग में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। देश के विभिन्न फिशिंग पोर्ट्स पर इस उद्योग की कुल आर्थिक वैल्यू बढ़कर 69,254 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है, जो पिछले वर्ष की तुलना में 10.45 प्रतिशत अधिक है। इसके साथ ही बाजार में मछली की खुदरा (रिटेल) वैल्यू बढ़कर 97,702 करोड़ रुपये हो गई है।

विशेषज्ञों के अनुसार यह वृद्धि न केवल मछुआरों की आय बढ़ाने में सहायक है, बल्कि समुद्री अर्थव्यवस्था को भी मजबूती प्रदान कर रही है। ICAR-Central Marine Fisheries Research Institute की रिपोर्ट को देश के मत्स्य क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है, जो भविष्य में नीतियों और उत्पादन रणनीतियों को प्रभावित कर सकती है।

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