तमिलनाडू

Tamil Nadu: कुड्डालोर ईंट भट्टे में बाल और वयस्क मजदूरों की राहत, 28 बच्चे भी शामिल

Payal
7 May 2026 2:54 PM IST
Tamil Nadu: कुड्डालोर ईंट भट्टे में बाल और वयस्क मजदूरों की राहत, 28 बच्चे भी शामिल
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Tamil Nadu.तमिलनाडु: मानवाधिकार संरक्षण और श्रम कानूनों के तहत कुड्डालोर पुलिस और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने एक कार्रवाई के दौरान 51 इरुला बंधुआ मजदूरों को ईंट भट्टे से मुक्त कराया। इनमें 28 बच्चे भी शामिल थे। यह मामला राज्य में बाल और वयस्क बंधुआ मजदूरी के खिलाफ चल रही जागरूकता और सक्रियता को उजागर करता है।
पुलिस ने बताया कि छानबीन के दौरान यह पता चला कि मजदूरों को धमकियों और डर का उपयोग करके लंबे समय तक काम पर मजबूर किया जा रहा था। मजदूरों के अभिभावकों को रोजगार का वादा किया गया था, लेकिन वास्तविकता में उन्हें ईंट भट्टे में खतरनाक और श्रमसाध्य कार्य करने के लिए मजबूर किया गया।
छात्र संगठन और मानवाधिकार संस्थाओं ने पुलिस के साथ मिलकर मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। बच्चों और वयस्कों को राहत केंद्र में रखा गया, जहां उन्हें भोजन, स्वास्थ्य सेवाएं और मानसिक सहायता प्रदान की गई। बच्चों को आगे की शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्कूलों और शिक्षा विभाग के साथ समन्वय किया गया।
कुड्डालोर पुलिस ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी के खिलाफ बंधुआ मजदूरी रोकथाम कानून और बाल श्रम निषेध अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया गया, जहां सजा और जुर्माने के प्रावधानों पर विचार किया जाएगा।
मानवाधिकार विशेषज्ञों ने इस कार्रवाई की सराहना की और कहा कि यह कदम बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए न्याय का संदेश है। उन्होंने यह भी कहा कि बंधुआ मजदूरी केवल कानून का उल्लंघन नहीं, बल्कि समाज और विकास के लिए गंभीर खतरा है। इस प्रकार की कार्रवाई से अन्य अपराधियों को चेतावनी भी मिलती है।
सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की घटनाएं आमतौर पर गरीब और वंचित समुदायों के साथ होती हैं। उन्होंने प्रशासन और समुदायों से अपील की कि मजदूरों और बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए सतर्क रहें और उन्हें शिक्षित करें।
पुलिस अधिकारी ने कहा, "हम बंधुआ मजदूरी के खिलाफ जी-जान से काम कर रहे हैं। कुड्डालोर में की गई यह कार्रवाई इसी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। भविष्य में हम ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए निगरानी बढ़ाएंगे और समुदायों में जागरूकता फैलाएंगे।"
विशेषज्ञों का मानना है कि इस घटना से स्पष्ट होता है कि बंधुआ मजदूरी रोकने के लिए प्रशासन, न्यायपालिका और समाज के सहयोग की आवश्यकता है। बच्चों की सुरक्षा और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए सतत प्रयास जरूरी हैं।
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