
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के लोक निर्माण विभाग मंत्री अधव अर्जुन ने दावा किया है कि पिछली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) सरकार के अंतिम चरण में दिए गए सभी शॉर्ट-टर्म कॉन्ट्रैक्ट और टेंडर रद्द कर दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार अगले 60 दिनों के भीतर एक बड़ा प्रशासनिक बदलाव करने जा रही है, जिसका उद्देश्य कथित रूप से भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करना है।
मंत्री अधव अर्जुन ने यह बयान शुक्रवार को चेन्नई सचिवालय में पत्रकारों से बातचीत के दौरान दिया। उन्होंने कहा कि 13 मई से 22 मई के बीच पिछली सरकार के कार्यकाल में जारी किए गए शॉर्ट-टर्म टेंडरों को सस्पेंड कर दिया गया है। उनके अनुसार, इन टेंडरों के तहत कुछ ठेकेदारों को एक वर्ष के कॉन्ट्रैक्ट पहले ही एडवांस में दे दिए गए थे और भुगतान भी कर दिया गया था।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह व्यवस्था इस उम्मीद में बनाई गई थी कि संबंधित लोग भविष्य में सत्ता में वापसी की स्थिति में लाभ उठा सकें। मंत्री ने कहा कि सरकार ने अब उस कथित प्रणाली को समाप्त कर दिया है, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 35 प्रतिशत तक की “फंडिंग व्यवस्था” शामिल थी।
अधव अर्जुन ने यह भी दावा किया कि अब विभागीय स्तर पर निगरानी कड़ी कर दी गई है और बिना जिला स्तर पर निरीक्षण के नकली बिल तैयार करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार अनियमितताओं की पहचान कर रही है और हर स्तर पर जांच की जा रही है ताकि वित्तीय गड़बड़ियों को रोका जा सके।
उन्होंने आगे कहा कि राज्य में एक सप्ताह के भीतर कई स्तरों पर भ्रष्टाचार से जुड़ी व्यवस्थाओं को समाप्त करने की दिशा में कदम उठाए गए हैं। मंत्री के अनुसार, अगले 60 दिनों में एक व्यापक प्रशासनिक पुनर्गठन किया जाएगा, जिससे पूरी प्रणाली में बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे।
अधव अर्जुन ने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को पारदर्शी बनाना और कार्यप्रणाली में जवाबदेही सुनिश्चित करना है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी विभागों की समीक्षा की जा रही है और जहां भी अनियमितता पाई जाएगी, वहां सख्त कार्रवाई की जाएगी।
राजनीतिक बयानबाजी के दौरान उन्होंने कहा कि तमिलनाडु के लोगों ने जाति और धर्म की राजनीति को खारिज करते हुए मतदान किया है। उन्होंने यह भी दावा किया कि सत्तारूढ़ दल ने किसी भी उम्मीदवार को जाति के आधार पर मैदान में नहीं उतारा।
मंत्री ने विपक्षी दलों पर आरोप लगाया कि वे मंत्रियों की जाति को लेकर गलत जानकारी फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें यह भी जानकारी नहीं है कि राज्य के हिंदू धार्मिक और बंदोबस्ती मंत्री किस जाति से संबंधित हैं, और इस तरह की चर्चाएं अनावश्यक हैं।
इस बयान के बाद राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है और प्रशासनिक सुधारों तथा पूर्व सरकार की नीतियों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। विपक्षी दलों की प्रतिक्रिया का इंतजार किया जा रहा है।





