
चेन्नई : तमिलनाडु सरकार ने राज्य में निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक खनिजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने एक नया आदेश जारी करते हुए डायरेक्टर ऑफ माइंस एंड जियोलॉजी (खनन एवं भूविज्ञान निदेशक) को यह अधिकार दिया है कि यदि राज्य में किसी निर्माण सामग्री या खनिज की कमी महसूस होती है, तो वह उसके दूसरे राज्यों में परिवहन या निर्यात पर अस्थायी प्रतिबंध लगा सके।
सरकार का यह निर्णय ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु से एम-सैंड (मैन्युफैक्चर्ड सैंड) सहित विभिन्न निर्माण सामग्री बड़ी मात्रा में पड़ोसी राज्यों में भेजी जा रही है। राज्य सरकार का मानना है कि स्थानीय निर्माण परियोजनाओं और बुनियादी ढांचा विकास के लिए आवश्यक खनिजों की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से खनिजों के परिवहन को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है।
तमिलनाडु सरकार ने तमिलनाडु इल्लीगल माइनिंग, ट्रांसपोर्टेशन, स्टोरेज एंड मिनरल डीलर्स रूल्स, 2011 में संशोधन किया है। इन संशोधित नियमों को राज्य सरकार ने आधिकारिक राजपत्र (ऑफिशियल गजट) में प्रकाशित कर लागू कर दिया है। नए प्रावधानों के तहत खनन एवं भूविज्ञान निदेशक को विशेष परिस्थितियों में दूसरे राज्यों के लिए खनिजों के परिवहन पर अस्थायी रोक लगाने का वैधानिक अधिकार प्राप्त हो गया है।
सरकार के अनुसार यह प्रतिबंध स्थायी नहीं होगा, बल्कि केवल तब लागू किया जाएगा जब राज्य में संबंधित खनिजों की उपलब्धता प्रभावित होने की आशंका होगी। इसका उद्देश्य खनिज व्यापार पर रोक लगाना नहीं बल्कि राज्य की आवश्यकताओं को प्राथमिकता देना है।
संशोधित नियमों के तहत जिन निर्माण सामग्रियों पर आवश्यकता पड़ने पर परिवहन प्रतिबंध लगाया जा सकेगा, उनमें आर्टिफिशियल सैंड (एम-सैंड), ब्लैक स्टोन, बड़े पत्थर के टुकड़े, बोल्डर, बजरी, क्रश्ड स्टोन तथा क्रश्ड हैंड स्टोन जैसी निर्माण सामग्री शामिल हैं। इन सभी का उपयोग सड़क, भवन, पुल और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर किया जाता है।
सरकारी अधिकारियों का कहना है कि हाल के वर्षों में तमिलनाडु में तेजी से शहरीकरण और आधारभूत संरचना परियोजनाओं के विस्तार के कारण निर्माण सामग्री की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं पड़ोसी राज्यों में भी एम-सैंड और अन्य निर्माण सामग्री की मांग अधिक होने के कारण तमिलनाडु से इनका परिवहन लगातार बढ़ा है। ऐसे में यदि राज्य के भीतर उपलब्धता प्रभावित होती है तो विकास परियोजनाओं पर असर पड़ सकता है। इसी संभावना को ध्यान में रखते हुए यह अधिकार प्रदान किया गया है।
सरकार का यह भी मानना है कि खनिज संसाधनों का संतुलित उपयोग और प्रभावी प्रबंधन आवश्यक है। नियमों में बदलाव के माध्यम से अवैध खनन, अनियंत्रित परिवहन और खनिजों के भंडारण पर निगरानी को भी और अधिक मजबूत बनाया जा सकेगा। इससे राज्य में खनिज संसाधनों का बेहतर प्रबंधन सुनिश्चित होने की उम्मीद जताई जा रही है।
खनन क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि यह निर्णय राज्य की निर्माण गतिविधियों को प्राथमिकता देने के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि उद्योग जगत और दूसरे राज्यों में निर्माण सामग्री की आपूर्ति पर इसका प्रभाव परिस्थितियों के अनुसार देखने को मिल सकता है। यदि किसी खनिज की पर्याप्त उपलब्धता बनी रहती है तो सामान्य परिवहन जारी रहेगा, जबकि कमी की स्थिति में ही अस्थायी प्रतिबंध लागू किया जाएगा।
इस बीच तमिलनाडु भूविज्ञान एवं खान विभाग में प्रशासनिक स्तर पर भी बड़ा फेरबदल किया गया है। विभाग के निदेशक टी. प्रभु शंकर ने प्रशासनिक कारणों का हवाला देते हुए कुल 27 अधिकारियों के तबादले के आदेश जारी किए हैं।
जारी आदेश के अनुसार विभाग के दो उप निदेशकों (डिप्टी डायरेक्टर) और 25 सहायक निदेशकों (असिस्टेंट डायरेक्टर) का विभिन्न जिलों और कार्यालयों में स्थानांतरण किया गया है। विभाग का कहना है कि यह नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है और इससे विभागीय कार्यों में बेहतर समन्वय तथा निगरानी सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
सरकार का मानना है कि नियमों में संशोधन और विभागीय स्तर पर प्रशासनिक पुनर्गठन से खनिज संसाधनों के प्रबंधन, अवैध गतिविधियों पर नियंत्रण और निर्माण कार्यों के लिए आवश्यक सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने की दिशा में सकारात्मक परिणाम मिलेंगे। आने वाले समय में आवश्यकता के अनुसार इन नए प्रावधानों का उपयोग कर राज्य में खनिज संसाधनों की आपूर्ति और वितरण को संतुलित रखने का प्रयास किया जाएगा।





