
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु में बुधवार को देशव्यापी हड़ताल के तहत दवा दुकानों का बड़ा असर देखने को मिला, जहां राज्य भर में 40,000 से अधिक मेडिकल स्टोर बंद रहे। यह हड़ताल ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग को लेकर दवा विक्रेता संघ द्वारा की गई थी।
हड़ताल का सबसे अधिक असर चेन्नई और पुडुचेरी क्षेत्रों में देखा गया, जहां एक हजार से अधिक दवा दुकानें बंद रहीं। कई प्रमुख इलाकों में सामान्य जनजीवन पर भी इसका प्रभाव पड़ा, क्योंकि आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सीमित हो गई।
हालांकि इस हड़ताल के दौरान कुछ बड़ी और निजी दवा श्रृंखलाएं सामान्य रूप से खुली रहीं। अपोलो और मेडप्लस जैसी फार्मेसी स्टोरों ने अपनी सेवाएं जारी रखीं और ग्राहकों को दवाएं उपलब्ध कराईं। इसके अलावा, सरकारी स्तर पर संचालित मुख्यमंत्री औषधालय, सहकारी औषधालय और प्रधानमंत्री जन औषधि केंद्र भी खुले रहे, जिससे लोगों को कुछ राहत मिली।
दवा विक्रेता संघ ने इस हड़ताल का मुख्य कारण ऑनलाइन दवा बिक्री पर रोक लगाने की मांग को बताया है। संघ का आरोप है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर बिना डॉक्टर के पर्चे के दर्द निवारक और नींद की गोलियां आसानी से उपलब्ध कराई जा रही हैं, जो नियमों के खिलाफ है।
दवा व्यापारियों ने यह भी आरोप लगाया कि ऑनलाइन बिक्री के कारण जीवन रक्षक दवाओं के घटिया और नकली उत्पाद बाजार में पहुंच रहे हैं, जिससे मरीजों की सुरक्षा को गंभीर खतरा पैदा हो रहा है। उनका कहना है कि इस तरह की बिक्री प्रणाली पर सख्त नियंत्रण की आवश्यकता है ताकि दवाओं की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
हड़ताल के चलते कई क्षेत्रों में मरीजों और आम नागरिकों को दवाएं प्राप्त करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। विशेष रूप से वे लोग प्रभावित हुए जिन्हें नियमित रूप से दवाओं की आवश्यकता होती है।
दवा विक्रेता संघ ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर जल्द विचार नहीं किया गया, तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है। वहीं प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है और आवश्यक सेवाओं को सुचारू रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
इस हड़ताल ने एक बार फिर ऑनलाइन दवा बिक्री और उसके नियमन को लेकर बहस को तेज कर दिया है, जिसमें सुरक्षा, पारदर्शिता और जनहित जैसे मुद्दे प्रमुख रूप से सामने आए हैं।





