
Tamil Nadu तमिलनाडु: केंद्र सरकार के साइंटिफिक और इंडस्ट्रियल रिसर्च डिपार्टमेंट (CSIR) की सेक्रेटरी और इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंटिफिक एंड इंडस्ट्रियल रिसर्च की डायरेक्टर जनरल एन. कलैचेलवी ने कहा है कि लोगों को सीलिएक बीमारी और अन्य स्वास्थ्य जोखिमों के डर के बिना चावल खाने में मदद करने के लिए नई रिसर्च चल रही है। यह बयान उन्होंने शुक्रवार को तंजावुर में नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ फ़ूड टेक्नोलॉजी, इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट एंड मैनेजमेंट (NIFTDM) के कॉन्वोकेशन सेरेमनी में दिया।
एन. कलैचेलवी ने बताया कि चावल में कार्बोहाइड्रेट की मात्रा काफी अधिक होती है। इसके कारण एक आम धारणा है और कुछ वैज्ञानिक सबूत भी मौजूद हैं कि अत्यधिक कार्बोहाइड्रेट का सेवन डायबिटीज़ जैसी बीमारियों के खतरे को बढ़ा सकता है। उन्होंने कहा कि इस चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिकों और अनुसंधान संस्थानों द्वारा नई तकनीकों और समाधान विकसित किए जा रहे हैं, ताकि लोगों को सुरक्षित और स्वास्थ्यवर्धक तरीके से चावल का सेवन करने में मदद मिल सके।
इस परियोजना का नेतृत्व तिरुवनंतपुरम स्थित नेशनल इंटरडिसिप्लिनरी इंस्टिट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (CSIR - NIIST) के डायरेक्टर सी. अनंतरामकृष्णन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि यह रिसर्च एक बड़ी साइंटिफिक खोज की दिशा में अग्रसर है। उनका कहना है कि इस शोध का उद्देश्य ऐसा चावल तैयार करना है जो सामान्य चावल की तरह स्वादिष्ट हो, लेकिन स्वास्थ्य के लिए कम जोखिम वाला हो।
इस रिसर्च के तहत चावल में मौजूद कार्बोहाइड्रेट और ग्लूटेन जैसी घटकों के स्तर का अध्ययन किया जा रहा है। वैज्ञानिक नई विधियों और तकनीकों का उपयोग कर ऐसे चावल की पहचान और उत्पादन की प्रक्रिया विकसित कर रहे हैं, जिसे सीलिएक रोग से प्रभावित लोग भी सुरक्षित रूप से खा सकें। इसके अलावा, यह रिसर्च डायबिटीज़ और अन्य मेटाबॉलिक बीमारियों के जोखिम को कम करने की दिशा में भी काम कर रही है।
एन. कलैचेलवी ने कहा कि भारत में चावल की खपत बहुत अधिक है और यह देश के अधिकांश हिस्सों में मुख्य आहार का हिस्सा है। इसलिए, ऐसे उपाय करना ज़रूरी है जिससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों से बचाते हुए उनके पोषण की जरूरतें पूरी हो सकें। उन्होंने कहा कि यह रिसर्च भारत की खाद्य सुरक्षा और पोषण स्तर को बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।
इस मौके पर NIFTDM के अधिकारियों और छात्रों को संबोधित करते हुए एन. कलैचेलवी ने कहा कि शोध और शिक्षा का तालमेल देश की प्रगति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने छात्रों को विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में करियर बनाने और अनुसंधान में भाग लेने के लिए प्रेरित किया।
CSIR - NIIST के डायरेक्टर सी. अनंतरामकृष्णन ने कहा कि उनका संस्थान इस रिसर्च में नए बायोटेक्नोलॉजिकल और खाद्य विज्ञान के तरीकों को अपनाकर ऐसे परिणाम देने की कोशिश कर रहा है जो लोगों के स्वास्थ्य और जीवन शैली में सकारात्मक बदलाव लाएं।
वर्तमान में यह रिसर्च प्रारंभिक चरण में है, लेकिन वैज्ञानिकों का मानना है कि आने वाले समय में इस खोज से चावल की खपत को स्वास्थ्यवर्धक और सुरक्षित बनाने में मदद मिलेगी।





