
Tamil Nadu तमिलनाडु: विधानसभा ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव को सर्वसम्मति से पारित किया, जिसमें कर्नाटक सरकार की मेकेदातु परियोजना का कड़ा विरोध किया गया है। यह प्रस्ताव मुख्यमंत्री M. K. Stalin द्वारा पेश किया गया, जिसे सदन ने बिना किसी विरोध के मंजूरी दे दी।
प्रस्ताव में कहा गया है कि कर्नाटक सरकार द्वारा कावेरी नदी पर मेकेदातु में बैलेंसिंग रिज़र्वोयर (संतुलन जलाशय) बनाने की योजना एकतरफा प्रयास है, जो तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। सदन ने इस परियोजना पर गंभीर आपत्ति जताते हुए इसे कावेरी जल विवाद से जुड़े पूर्व न्यायिक निर्णयों के खिलाफ बताया है।
प्रस्ताव में विशेष रूप से कावेरी जल विवाद न्यायाधिकरण के 5 फरवरी 2007 के अंतिम फैसले और सुप्रीम कोर्ट के 16 फरवरी 2018 के निर्णय का उल्लेख किया गया। इसमें कहा गया कि इन निर्णयों का सम्मान किए बिना और संबंधित बेसिन राज्यों की सहमति लिए बिना किसी भी प्रकार की नई परियोजना को आगे बढ़ाना उचित नहीं है।
विधानसभा में पारित प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि कर्नाटक सरकार द्वारा मेकेदातु परियोजना को आगे बढ़ाने का प्रयास संघीय ढांचे और अंतरराज्यीय जल समझौतों की भावना के विपरीत है। तमिलनाडु सरकार का मानना है कि इस परियोजना से राज्य के डेल्टा क्षेत्रों में जल आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
सदन ने केंद्र सरकार से भी इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है और कहा है कि किसी भी जल परियोजना को मंजूरी देने से पहले सभी संबंधित राज्यों की सहमति आवश्यक है। प्रस्ताव में यह भी दोहराया गया कि कावेरी जल विवाद एक संवेदनशील मुद्दा है, जिसका समाधान केवल न्यायिक और सहमति आधारित प्रक्रिया से ही संभव है।
मेकेदातु परियोजना को लेकर तमिलनाडु और कर्नाटक के बीच लंबे समय से विवाद जारी है। कर्नाटक सरकार का तर्क है कि यह परियोजना बेंगलुरु और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति और जल प्रबंधन के लिए आवश्यक है, जबकि तमिलनाडु इसे अपने जल अधिकारों के लिए खतरा मानता है।
विधानसभा में हुई इस चर्चा के दौरान विभिन्न दलों ने भी प्रस्ताव का समर्थन किया और इसे राज्य के हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कदम बताया। सभी सदस्यों ने एकमत होकर इसे पारित किया, जिससे सदन में दुर्लभ सर्वसम्मति देखने को मिली।
इस निर्णय के बाद अब यह मुद्दा एक बार फिर केंद्र और संबंधित राज्यों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि कावेरी जल विवाद का स्थायी समाधान निकालने के लिए सभी पक्षों के बीच संवाद और सहमति बेहद जरूरी है।
फिलहाल यह प्रस्ताव तमिलनाडु की आधिकारिक स्थिति को स्पष्ट करता है और आने वाले समय में इस मुद्दे पर राजनीतिक और कानूनी बहस और तेज होने की संभावना है।





