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Tamil Nadu: मोदी ने 100 इंसानी दिमागों की मैपिंग का मिशन शुरू किया

Tulsi Rao
12 Oct 2026 11:26 AM IST
Tamil Nadu: मोदी ने 100 इंसानी दिमागों की मैपिंग का मिशन शुरू किया
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चेन्नई: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी मद्रास (IIT-M) में 'सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर' को देश को समर्पित किया। साथ ही, उन्होंने सेलुलर लेवल पर 100 से ज़्यादा इंसानी दिमागों की मैपिंग करने के लिए एक ग्लोबल मिशन शुरू किया और स्ट्रोक से प्रभावित ब्रेन टिश्यू का एक खास एटलस जारी किया। यह कदम संस्थान के न्यूरोसाइंस रिसर्च प्रोग्राम के बड़े विस्तार को दर्शाता है।

इस पहल का मकसद भ्रूण की अवस्था से लेकर बुढ़ापे तक, यानी जीवन भर के इंसानी दिमाग के डिटेल्ड थ्री-डायमेंशनल (3D) मैप बनाना है। इससे रिसर्चर्स को दिमाग की सेलुलर बनावट के बारे में जानकारी मिलेगी और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर रिसर्च को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।

मोदी ने 'C-स्ट्रोक' भी जारी किया, जिसे अपनी तरह का पहला ह्यूमन इस्केमिक स्ट्रोक एटलस बताया गया है। स्ट्रोक से प्रभावित दिमाग के 1,000 से ज़्यादा एनोटेटेड माइक्रोस्कोपिक सेक्शन वाले इस रिसोर्स से रिसर्चर्स को टिश्यू डैमेज की जांच करने, इलाज के संभावित टारगेट की पहचान करने और इस स्थिति के बारे में समझ बेहतर करने में मदद मिलने की उम्मीद है।

इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है जब खून का थक्का या कोई और रुकावट दिमाग के किसी हिस्से में खून की सप्लाई रोक देती है, जिससे ब्रेन टिश्यू को नुकसान पहुँचता है। यह एटलस रिसर्चर्स को इस स्थिति से जुड़े बदलावों की जांच करने और इलाज के संभावित तरीकों का पता लगाने के लिए एक डिटेल्ड एनाटॉमिकल रिसोर्स देता है।

मार्च 2022 में समाज-सेवी सुधा और क्रिस गोपालकृष्णन के सहयोग से स्थापित यह सेंटर, सेलुलर लेवल पर इंसानी दिमाग का अध्ययन करने के लिए न्यूरोसाइंस, इंजीनियरिंग, एडवांस्ड इमेजिंग और कंप्यूटेशनल साइंस को एक साथ लाता है।

इसके रिसर्चर्स टिश्यू के बड़े हिस्से की जांच के लिए पूरे दिमाग की इमेजिंग टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हैं और सेलुलर संरचनाओं को थ्री-डायमेंशन में फिर से बनाते हैं। इससे मिलने वाले डेटासेट वैज्ञानिकों को पूरे दिमाग की एनाटॉमी और माइक्रोस्कोपिक डिटेल्स के बीच आने-जाने में मदद करते हैं, जिससे अलग-अलग संस्थानों के बीच मिलकर रिसर्च करने के लिए रिसोर्स तैयार होते हैं।

इस नई पहल का मकसद इस काम को आगे बढ़ाते हुए 100 से ज़्यादा पूरे इंसानी दिमागों के मैप का कलेक्शन तैयार करना है, जो जीवन के अलग-अलग चरणों और कई तरह की न्यूरोलॉजिकल स्थितियों को दिखाते हों। इन एटलस का मकसद दिमाग के विकास, बीमारी के कारणों और न्यूरोलॉजिकल बीमारियों पर इंटरनेशनल रिसर्च में मदद करना है।

सेंटर पहले ही दो बड़े रिसर्च रिसोर्स जारी कर चुका है। 2024 में, इसने 'धरणी' पेश किया, जो इंसानी भ्रूण के दिमाग का थ्री-डायमेंशनल एटलस है और इसमें दिमाग के 5,132 सेक्शन की डिजिटल इमेज शामिल हैं। जून 2026 में, इसने 'एंकर' (Anchor - Atlas of Neurochemical Characterization of the Human Brainstem with 3D Reconstruction) जारी किया। यह एक थ्री-डायमेंशनल (3D) एटलस है जो 200 से ज़्यादा ब्रेनस्टेम न्यूक्ली और फाइबर ट्रैक्ट्स की मैपिंग करता है।

ब्रेनस्टेम दिमाग को स्पाइनल कॉर्ड से जोड़ता है और सांस लेने, दिल की धड़कन और होश में रहने जैसे ज़रूरी कामों में अहम भूमिका निभाता है। इतना ज़रूरी होने के बावजूद, इस हिस्से की डिटेल्ड सेलुलर और न्यूरोकेमिकल मैपिंग करना अभी भी एक चुनौती है।

'एंकर' को विकास के अलग-अलग चरणों वाले तीन इंसानी दिमाग के नमूनों (25 हफ़्ते का भ्रूण, नौ साल का बच्चा और 54 साल का वयस्क) से लिए गए 800 से ज़्यादा सीरियल हिस्टोलॉजिकल सेक्शन का इस्तेमाल करके बनाया गया था।

रिसर्चर्स ने अलग-अलग न्यूरोकेमिकल सेल टाइप की पहचान करने के लिए 500 से ज़्यादा सेक्शन पर आठ कॉम्प्लिमेंट्री इम्यूनोस्टेनिंग तकनीकों का इस्तेमाल किया। उन्होंने 200 से ज़्यादा ब्रेनस्टेम स्ट्रक्चर को मैन्युअली एनोटेट किया और उन्हें थ्री-डायमेंशन में रीकंस्ट्रक्ट किया।

इस एटलस में एक इंटीग्रेटेड विज़ुअलाइज़ेशन प्लेटफ़ॉर्म भी है जो रिसर्चर्स को MRI स्कैन, ब्लॉक-फेस इमेज, माइक्रोस्कोपिक टिश्यू सेक्शन और थ्री-डायमेंशनल रीकंस्ट्रक्शन के बीच नेविगेट करने की सुविधा देता है, जिससे बड़े पैमाने पर एनाटॉमिकल फ़ीचर्स को सेल-लेवल की डिटेल्स से जोड़ा जा सके।

इस सेंटर का काम कई अलग-अलग क्षेत्रों के रिसर्चर्स, इंजीनियरों और टेक्नीशियनों के साथ-साथ इंटरनेशनल सहयोगियों को एक साथ लाता है। इसके व्यापक रिसर्च प्रोग्राम में रेबीज़, डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी न्यूरोलॉजिकल बीमारियों से प्रभावित दिमागों का अध्ययन करना शामिल है, ताकि यह समझा जा सके कि ये बीमारियाँ दिमाग की बनावट को कैसे बदलती हैं।

सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर के प्रमुख मोहनशंकर शिवप्रकाशम के अनुसार, सेंटर का लक्ष्य इंसानी जीवनकाल और कई तरह की न्यूरोलॉजिकल बीमारियों को कवर करने वाले सेलुलर रिज़ॉल्यूशन वाले ब्रेन मैप्स का एक व्यापक कलेक्शन बनाना है।

'एंकर' को आधिकारिक तौर पर 5 से 7 जून तक IIT-M में आयोजित तीसरे ब्रिक्स (BRICS) न्यूरोसाइंस सिम्पोजियम 2026 में जारी किया गया था। क्रिश्चियन मेडिकल कॉलेज (वेल्लोर), किलपॉक मेडिकल कॉलेज, मेडिस्कैन सिस्टम्स और श्री रामचंद्र इंस्टीट्यूट ऑफ़ हायर एजुकेशन एंड रिसर्च उन संस्थानों में शामिल थे जिन्होंने अलग-अलग उम्र और न्यूरोलॉजिकल प्रोफ़ाइल वाले लोगों से दिमाग के नमूने हासिल करने में मदद करके इस प्रोजेक्ट को सपोर्ट किया।

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