
Tamil Nadu तमिलनाडु: मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मंगलवार को किसानों के हित में बड़ा फैसला लेते हुए फसल ऋण माफ़ी योजना में महत्वपूर्ण बदलाव की घोषणा की है। इस नई घोषणा के तहत राज्य सरकार ने सहकारी बैंकों से लिए गए फसल ऋण की सीमा बढ़ाकर 75,000 रुपये तक कर दी है, जिसे अब पूरी तरह माफ किया जाएगा। मुख्यमंत्री के इस कदम को किसानों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।
यह फैसला किसान संगठनों और विभिन्न राजनीतिक दलों की लगातार मांगों के बाद लिया गया है। पहले 25 मई को मुख्यमंत्री ने केवल 50,000 रुपये तक के फसल ऋण माफ करने की घोषणा की थी, लेकिन अब इसमें संशोधन करते हुए सीमा को बढ़ाकर 75,000 रुपये कर दिया गया है। सरकार का कहना है कि इस बदलाव से अधिक संख्या में किसानों को सीधा लाभ मिलेगा और उनका कर्ज बोझ कम होगा।
नई योजना के अनुसार, जिन किसानों का फसल ऋण 75,000 रुपये से अधिक है, उन्हें भी आंशिक राहत दी जाएगी। ऐसे किसानों को 35,000 रुपये तक की माफ़ी का लाभ मिलेगा। इससे उन किसानों को भी सहायता मिलेगी, जिन पर अपेक्षाकृत अधिक ऋण है और जो आर्थिक दबाव में हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना से कुल 14,43,504 किसानों को लाभ मिलेगा। ये वे किसान हैं जिन्होंने पिछले वर्ष 1 मई से लेकर इस वर्ष 28 फरवरी के बीच सहकारी बैंकों से फसल ऋण लिया था। इतनी बड़ी संख्या में किसानों को राहत मिलने से राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों की आर्थिक स्थिति पर भी सकारात्मक असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है।
हालांकि इस योजना के लागू होने से राज्य सरकार पर वित्तीय बोझ भी बढ़ेगा। अनुमान के अनुसार, इस पूरी फसल ऋण माफ़ी योजना पर लगभग 5,932.23 करोड़ रुपये का खर्च आएगा। सरकार ने कहा है कि यह खर्च किसानों की आर्थिक स्थिति सुधारने और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए जरूरी है।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि योजना को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से लागू किया जाएगा। सहकारी बैंकों को निर्देश दिए जाएंगे कि वे पात्र किसानों की सूची तैयार कर जल्द से जल्द माफ़ी प्रक्रिया को पूरा करें, ताकि किसानों को समय पर लाभ मिल सके और किसी तरह की देरी या अनियमितता न हो।
इस घोषणा के बाद राज्य के किसानों में राहत और संतोष का माहौल देखा जा रहा है। विशेषकर छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वे अक्सर फसल नुकसान और आर्थिक दबाव के कारण ऋण चुकाने में कठिनाई का सामना करते हैं।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी योजनाएं किसानों को तत्काल राहत तो देती हैं, लेकिन दीर्घकालिक समाधान के लिए कृषि ढांचे में सुधार, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार और उत्पादन लागत में कमी पर भी ध्यान देना जरूरी है।
कुल मिलाकर, तमिलनाडु सरकार की यह घोषणा किसानों को आर्थिक राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है, जिससे लाखों परिवारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।





