तमिलनाडू

Tamil Nadu : शराब की खाली बोतल वापसी योजना में बड़े बदलाव की तैयारी

Kavita2
6 Jun 2026 9:31 AM IST
Tamil Nadu : शराब की खाली बोतल वापसी योजना में बड़े बदलाव की तैयारी
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Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु सरकार ने मद्रास हाई कोर्ट को बताया है कि राज्य में लागू शराब की खाली बोतलें वापस लेने की स्कीम में पूरी तरह से बदलाव किया जाएगा। यह जानकारी सरकार की ओर से शुक्रवार को सुनवाई के दौरान दी गई। मामला पर्यावरण और वन्यजीव सुरक्षा से जुड़ा हुआ है, जिस पर हाई कोर्ट की विशेष पीठ सुनवाई कर रही है।

दरअसल, ऊटी और कोडाईकनाल जैसे पहाड़ी पर्यटन स्थलों पर बड़ी संख्या में पर्यटक प्लास्टिक की पानी की बोतलें और शराब की खाली बोतलें जंगल क्षेत्रों में फेंक देते हैं। इससे न केवल पर्यावरण को नुकसान पहुंच रहा है, बल्कि जंगली जानवरों के लिए भी खतरा पैदा हो रहा है। इसी मुद्दे पर अदालत ने पहले हस्तक्षेप किया था।

मामले की सुनवाई जस्टिस ए. सतीश कुमार और डी. भरत चक्रवर्ती की विशेष पीठ कर रही है, जो पर्यावरण, वन और वन्यजीव से जुड़े मामलों पर सुनवाई करती है। कोर्ट ने पहले निर्देश दिया था कि पहाड़ी क्षेत्रों में TASMAC की दुकानों पर एक व्यवस्था लागू की जाए, जिसके तहत शराब की बोतल खरीदते समय 10 रुपये अतिरिक्त लिए जाएं और खाली बोतल लौटाने पर यह राशि वापस कर दी जाए। बाद में इस व्यवस्था को पूरे तमिलनाडु में लागू करने का निर्देश दिया गया था।

शुक्रवार को हुई सुनवाई में सरकार की ओर से पेश चीफ गवर्नमेंट एडवोकेट विजय नारायण ने अदालत को बताया कि यह बोतल वापसी योजना वर्तमान में तमिलनाडु के तीन जिलों को छोड़कर बाकी सभी जिलों में लागू की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि सरकार अब इस पूरी योजना में व्यापक बदलाव करने पर विचार कर रही है ताकि इसे अधिक प्रभावी और व्यवहारिक बनाया जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार इस संभावना पर भी अध्ययन कर रही है कि खाली बोतलें वापस लेने की प्रक्रिया में TASMAC के कर्मचारियों की भूमिका को कम किया जाए या उन्हें इस प्रक्रिया से अलग रखा जाए। इसके पीछे उद्देश्य प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुचारू बनाना है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पर्यटन स्थलों पर बढ़ते कचरे और प्लास्टिक प्रदूषण ने जंगलों के पारिस्थितिकी तंत्र को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। खासकर शराब की बोतलों और प्लास्टिक कचरे से वन्यजीवों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।

हाई कोर्ट की विशेष पीठ ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट और सुधार योजना प्रस्तुत करने को कहा है। अदालत ने यह भी संकेत दिया है कि यदि जरूरत पड़ी तो इस योजना को और सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

इस पूरे मामले ने राज्य में पर्यावरण संरक्षण और कचरा प्रबंधन नीति को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सरकार और अदालत दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि पर्यटन स्थलों की प्राकृतिक सुंदरता और वन्यजीवों की सुरक्षा को किसी भी कीमत पर सुरक्षित रखा जाए।

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