
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु की जेलों में कैदियों की आत्महत्याओं को रोकने के लिए जेल प्रशासन ने एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। राज्य की सभी जेलों से दीवारों पर लगी कीलें पूरी तरह हटा दी गई हैं और अब से नई कीलें ठोकने पर भी रोक लगा दी गई है। यह निर्णय कैदियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
जेल प्रशासन का कहना है कि कई मामलों में कैदी जेल की दीवारों या उपलब्ध वस्तुओं का उपयोग आत्महत्या के प्रयासों में करते रहे हैं। इसी वजह से यह कदम उठाया गया है ताकि ऐसे साधनों को सीमित किया जा सके और आत्महत्या की घटनाओं को रोका जा सके।
आंकड़ों के अनुसार, तमिलनाडु की जेलें देशभर में आत्महत्या दर के मामले में शीर्ष 8 जेल प्रणालियों में शामिल हैं। वर्ष 2016 से 2023 के बीच देशभर की जेलों में कुल 977 कैदियों ने आत्महत्या की, जिनमें से 53 मामले अकेले तमिलनाडु की जेलों से सामने आए।
रिपोर्टों के अनुसार, देशभर की जेलों में होने वाली कुल मौतों में लगभग 80 प्रतिशत मौतें आत्महत्या से जुड़ी होती हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति इस समस्या का एक बड़ा कारण है। अध्ययन बताते हैं कि लगभग दो-तिहाई कैदी चिंता, निराशा, हताशा, दर्द और अकेलेपन जैसी भावनाओं से जूझते हैं। इसके अलावा करीब 12 प्रतिशत कैदी अवसाद (डिप्रेशन) से पीड़ित पाए गए हैं, जबकि जेलों में मानसिक बीमारियों की व्यापकता 25 प्रतिशत से अधिक बताई गई है।
इन्हीं मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के कारण कई कैदी आत्महत्या की ओर प्रवृत्त हो जाते हैं। विशेषज्ञ लंबे समय से जेलों में मानसिक स्वास्थ्य देखभाल को मजबूत करने की जरूरत पर जोर देते रहे हैं।
तमिलनाडु में कुल 141 जेलें हैं, जिनमें 9 केंद्रीय जेलें शामिल हैं। इन जेलों की कुल क्षमता 24,513 कैदियों की है, जबकि वर्तमान में लगभग 16,000 कैदी जेलों में बंद हैं। इससे यह भी स्पष्ट होता है कि जेलों में क्षमता से कम कैदी होने के बावजूद मानसिक तनाव की समस्या गंभीर बनी हुई है।
वर्ष 2018 तक तमिलनाडु कैदियों द्वारा आत्महत्या के प्रयासों के मामलों में देश के शीर्ष 5 राज्यों में शामिल था। इस पृष्ठभूमि में जेल प्रशासन का यह नया कदम एक सुधारात्मक प्रयास माना जा रहा है।
जेल अधिकारियों का कहना है कि केवल भौतिक संरचना में बदलाव ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि कैदियों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके लिए परामर्श, निगरानी और मनोवैज्ञानिक सहायता बढ़ाने की योजना पर भी विचार किया जा रहा है।
इस कदम के बाद उम्मीद की जा रही है कि जेलों में आत्महत्या की घटनाओं में कमी आएगी और कैदियों की सुरक्षा व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।





