
चेन्नई: डिजिटल कंप्यूटिंग को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्राचीन विरासत को सुरक्षित रखने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए, तमिलनाडु सरकार ने 2026-2027 के लिए तमिल विकास और सूचना विभाग के लिए 139.06 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। यह जानकारी मंत्री राजमोहन द्वारा पेश किए गए राज्य के नवीनतम नीतिगत नोट में दी गई है।
इस व्यापक नीति का फोकस दुर्लभ ताड़-पत्र पांडुलिपियों को डिजिटल बनाने, 15.5 लाख शब्दों वाले "सोरकुवई" (Sorkuvai) शब्दावली पोर्टल का विस्तार करने, नए राष्ट्रीय साहित्यिक सम्मान शुरू करने और दुनिया भर के विद्वानों व छात्रों के लिए लक्षित कल्याणकारी उपाय करने पर है।
विधानसभा में दस्तावेज़ पेश करते हुए, स्कूल शिक्षा, तमिल विकास, सूचना और प्रचार मंत्री राजमोहन ने एक व्यापक ब्लूप्रिंट प्रस्तुत किया। इसमें प्राचीन तमिल विरासत को संरक्षित करने, भाषाई संसाधनों को आधुनिक बनाने और वैश्विक स्तर पर युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा देने का विस्तृत रोडमैप बताया गया है।
इस वर्ष के लिए कुल 139.06 करोड़ रुपये का संशोधित बजट अनुमान आवंटित किया गया है। इसे मुख्य संस्थानों में बांटा गया है, जिनमें तमिल विकास निदेशालय, तंजावुर में तमिल विश्वविद्यालय, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ तमिल स्टडीज, तमिल व्युत्पत्ति शब्दकोश परियोजना निदेशालय और मदुरै में विश्व तमिल संगम शामिल हैं।
इस नीति का मुख्य केंद्र तमिल भाषाई उपकरणों का डिजिटलीकरण और आधुनिकीकरण है। "सोरकुवई" ऑनलाइन शब्दावली भंडार का काफी विस्तार किया गया है, जिसमें अब 15.5 लाख से अधिक शब्द हैं। इससे समकालीन और तकनीकी शब्दावलियों को संकलित करने में मदद मिल रही है। साथ ही, इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ तमिल स्टडीज राज्य योजना आयोग समर्थित प्रमुख पहलें शुरू कर रहा है, जैसे कि एकीकृत डिजिटल ताड़-पत्र पांडुलिपि डेटाबेस, वैश्विक उच्च शिक्षा के लिए वीडियो भंडार और अपनी शोध लाइब्रेरी का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपग्रेडेशन।
यह नीति विद्वानों के कल्याण, प्रशासन और व्यावसायिक साइनबोर्ड में तमिलनाडु आधिकारिक भाषा अधिनियम को लागू करने, और राज्य भर के स्कूलों व उच्च शिक्षण संस्थानों में साहित्य के प्रचार-प्रसार को भी प्राथमिकता देती है।





