
Tamil Nadu तमिलनाडु: लगातार बढ़ते तापमान और हीट वेव की स्थिति को देखते हुए पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट ने औद्योगिक क्षेत्रों और निर्माण कार्यों से जुड़े संस्थानों को काम के घंटों में बदलाव करने के निर्देश दिए हैं। विभाग ने कहा है कि मजदूरों को दिन के सबसे गर्म समय में काम करने से बचाया जाए और कार्य समय को ऐसे घंटों में निर्धारित किया जाए जब गर्मी का असर कम हो।
पिछले एक महीने से राज्य के कई हिस्सों में अत्यधिक गर्मी दर्ज की जा रही है, जिसके कारण आम लोगों के साथ-साथ मजदूर वर्ग भी प्रभावित हो रहा है। कंस्ट्रक्शन साइट्स, सड़क किनारे काम करने वाले मजदूर और रेहड़ी-पटरी पर काम करने वाले लोग सीधे धूप में काम करने को मजबूर हैं, जिससे हीट स्ट्रोक के मामले बढ़ रहे हैं। कई मरीजों को इलाज के लिए अस्पतालों में भर्ती भी कराया गया है।
पब्लिक हेल्थ विभाग के अधिकारियों ने बताया कि राज्य के कई जिलों में तापमान 100 डिग्री फारेनहाइट से अधिक दर्ज किया जा रहा है। ऐसे मौसम में लंबे समय तक धूप में काम करने से शरीर में तेजी से पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) हो सकती है, जो स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा पैदा करती है।
अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस स्थिति को नजरअंदाज किया गया, तो शरीर के महत्वपूर्ण अंगों के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। गंभीर मामलों में समय पर इलाज न मिलने पर जान का खतरा भी हो सकता है।
इसी को देखते हुए विभाग ने इंडस्ट्रियल कंपनियों, बिल्डिंग कॉन्ट्रैक्टर्स और नियोक्ताओं से अपील की है कि वे मजदूरों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और उनके काम के घंटों को हीट वेव की स्थिति के अनुसार समायोजित करें। विशेष रूप से कंस्ट्रक्शन वर्कर, कृषि श्रमिक और खुले में काम करने वाले छोटे व्यवसायियों के लिए यह निर्देश लागू करने की सलाह दी गई है।
इसके साथ ही विभाग ने यह भी कहा है कि कार्यस्थलों पर पर्याप्त पानी, छाया और आराम की व्यवस्था की जाए ताकि मजदूरों को गर्मी से राहत मिल सके। गर्मी के दौरान नियमित ब्रेक और सुरक्षित कार्य वातावरण सुनिश्चित करना आवश्यक बताया गया है।
यह कदम राज्य में बढ़ते तापमान और स्वास्थ्य जोखिमों को देखते हुए एहतियाती उपाय के रूप में लिया गया है। Public Health Department of Tamil Nadu ने सभी संबंधित संस्थानों से अपील की है कि वे इन दिशानिर्देशों का पालन करें ताकि मजदूरों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और हीट वेव से होने वाले गंभीर स्वास्थ्य जोखिमों को रोका जा सके।





