
Tamil Nadu तमिलनाडु: राजनीति में एक बार फिर फिल्मी सितारों का प्रभाव चर्चा में है। विजय की तमिलनाडु विक्ट्री पार्टी (TVP) के पहले ही विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत दर्ज करने के बाद उनकी तुलना राज्य के उन दिग्गज नेताओं से की जा रही है, जिन्होंने फिल्म इंडस्ट्री से राजनीति में आकर सत्ता हासिल की थी।
राजनीतिक इतिहास पर नजर डालें तो आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और अभिनेता एन.टी. रामाराव ने भी अपनी नई पार्टी बनाने के बाद पहले ही चुनाव में सत्ता हासिल कर इतिहास रचा था। इसी तरह तमिलनाडु में एम.जी. रामचंद्रन (MGR) ने भी अपनी पार्टी बनाकर पहले चुनाव में ही जनता का बड़ा समर्थन हासिल करते हुए मुख्यमंत्री पद तक पहुंचने में सफलता पाई थी।
तमिलनाडु में फिल्मी दुनिया से राजनीति में आने वालों की लंबी सूची रही है। एमजीआर के बाद जयललिता भी फिल्म इंडस्ट्री से राजनीति में आईं और बाद में राज्य की मुख्यमंत्री बनीं। वहीं, द्रविड़ आंदोलन की नींव रखने वाले अन्नादुरई और एम. करुणानिधि जैसे नेताओं ने भी राज्य की राजनीति को गहराई से प्रभावित किया।
हालांकि राजनीतिक इतिहास यह भी बताता है कि हर नेता को शुरुआत में सफलता नहीं मिली। DMK के संस्थापक अन्नादुरई 1957 और 1962 के चुनावों में सत्ता तक नहीं पहुंच पाए थे। बाद में उन्होंने 1967 में सात दलों के गठबंधन के साथ चुनाव लड़कर पहली बार मुख्यमंत्री पद हासिल किया। यह जीत तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा मोड़ साबित हुई।
इसके बाद एम. करुणानिधि ने 1971 के विधानसभा चुनाव में सफलता हासिल की। उस समय बांग्लादेश निर्माण के बाद देश में प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समर्थन की लहर चल रही थी। करुणानिधि ने इस राजनीतिक माहौल में कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनाव जीता और मुख्यमंत्री बने।
इन ऐतिहासिक उदाहरणों के बीच अब विजय की TVP की जीत को भी उसी परंपरा से जोड़कर देखा जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु की जनता ने हमेशा नए नेतृत्व और बदलाव को अवसर दिया है, खासकर तब जब नेता जनसंपर्क और लोकप्रियता के आधार पर जनता से जुड़ने में सफल रहे हों।
विजय की इस जीत ने यह बहस भी तेज कर दी है कि क्या तमिलनाडु एक बार फिर फिल्मी सितारे के नेतृत्व में नए राजनीतिक युग की ओर बढ़ रहा है। उनके समर्थक इसे जनता की “नई सोच” का परिणाम बता रहे हैं, जबकि राजनीतिक विशेषज्ञ इसे बदलते सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों का संकेत मान रहे हैं।
राज्य की राजनीति में अब सभी की नजर इस बात पर है कि TVP सरकार गठन के बाद किस तरह शासन चलाती है और क्या वह अपने चुनावी वादों को पूरा कर पाती है या नहीं।





