
Tamil Nadu तमिलनाडु: दक्षिणी रेलवे ने अपने ट्रैक्शन पावर डिस्ट्रीब्यूशन (TPD) सिस्टम में पिछले वर्ष के दौरान उल्लेखनीय सुधार दर्ज किया है। रेलवे द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस प्रणाली में अब केवल तीन खराबियाँ सामने आई हैं, जो पिछले वर्ष की तुलना में 77 प्रतिशत की कमी को दर्शाती हैं।
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया कि ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (DDS) रेलवे का वह मुख्य ढांचा है, जो इलेक्ट्रिक ट्रेनों को बिजली आपूर्ति करता है। यह सिस्टम रेल संचालन की रीढ़ माना जाता है, क्योंकि इसके माध्यम से ट्रेनों को निर्बाध बिजली मिलती है और संचालन सुचारू रहता है।
रेलवे के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024-25 में इस सिस्टम में कुल 13 खराबियाँ दर्ज की गई थीं, जबकि पिछले वर्ष यह संख्या घटकर मात्र 3 रह गई। इस सुधार को रेलवे ने एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
दक्षिणी रेलवे के अनुसार, इस उपलब्धि के पीछे लगातार निगरानी, समय-समय पर की गई तकनीकी देखरेख और अधिकारियों के संयुक्त प्रयास प्रमुख कारण रहे हैं। सिस्टम की नियमित जांच और रखरखाव को प्राथमिकता दी गई, जिससे तकनीकी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी आई।
रेलवे अधिकारियों ने कहा कि इस सुधार का सीधा असर यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा पर पड़ा है। ट्रेनों के संचालन में समयबद्धता बढ़ी है, देरी की घटनाएं कम हुई हैं और इलेक्ट्रिक ट्रैक पर सेवाएं पहले की तुलना में अधिक सुचारू हुई हैं।
रेलवे ने यह भी बताया कि बेहतर बिजली आपूर्ति प्रणाली के कारण यात्रियों को निर्बाध यात्रा अनुभव मिल रहा है। इससे न केवल समय की बचत हुई है, बल्कि रेलवे संचालन की विश्वसनीयता भी बढ़ी है।
इसके साथ ही दक्षिणी रेलवे ने जानकारी दी है कि भविष्य में ट्रैक्शन डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम (DDS/TPD) में किसी भी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए और अधिक सुधार कार्य किए जा रहे हैं। तकनीकी उन्नयन और आधुनिक निगरानी प्रणाली को मजबूत करने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
रेलवे का कहना है कि उनका उद्देश्य सुरक्षित, समयबद्ध और निर्बाध रेल सेवा प्रदान करना है, और इसी दिशा में लगातार कार्य किया जा रहा है। इस सुधार को रेलवे की परिचालन दक्षता में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में देखा जा रहा है।





