
Tamil Nadu तमिलनाडु: सभी किसान यूनियनों की कोऑर्डिनेशन कमिटी ने छोटे और सीमांत किसानों के 100 प्रतिशत कर्ज़ माफ़ करने की मांग को लेकर बड़ा आंदोलन करने की घोषणा की है। कमिटी ने कहा है कि 30 जून को चेन्नई में भूख हड़ताल की जाएगी, जिसमें राज्य भर के किसान शामिल होंगे। इस आंदोलन में 38 जिलों से हजारों किसानों के जुटने की संभावना जताई गई है।
इस संबंध में कमिटी के चेयरमैन पी.आर. पांडियन ने पत्रकारों से बातचीत में सरकार की नीति और वादों को लेकर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने अपने चुनावी घोषणा-पत्र में छोटे और सीमांत किसानों का 100 प्रतिशत कर्ज़ माफ करने और बड़े किसानों का 50 प्रतिशत कर्ज़ माफ करने का वादा किया था। लेकिन बाद में घोषित योजना इससे अलग है, जिससे किसानों में असंतोष बढ़ा है।
उन्होंने बताया कि सरकार की नई घोषणा के अनुसार छोटे और सीमांत किसानों का केवल 50,000 रुपये तक का कर्ज़ माफ़ किया जाएगा, जबकि बड़े किसानों के लिए भी सीमित राहत का प्रावधान किया गया है। इसके तहत जिन बड़े किसानों ने 1 लाख रुपये से अधिक का कर्ज़ लिया है, उनके लिए केवल 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक की माफी का उल्लेख किया गया है। किसानों का कहना है कि यह निर्णय चुनावी वादों से काफी अलग है और इससे उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिल रही है।
पी.आर. पांडियन ने कहा कि इस मुद्दे पर किसान प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री से मुलाकात भी की थी। बैठक में उन्होंने सरकार से आग्रह किया था कि यदि कर्ज़ माफी का वर्तमान स्वरूप चुनावी घोषणा के विपरीत है तो इसे रोक दिया जाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार पर आर्थिक बोझ की वजह से पूर्ण कर्ज़ माफी संभव नहीं है, तो किसान इस स्थिति को समझने के लिए तैयार हैं, लेकिन पारदर्शिता जरूरी है।
उन्होंने आगे बताया कि मुख्यमंत्री ने इस विषय पर विचार करने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद सरकार की ओर से दूसरी बार घोषित कर्ज़ माफी योजना से किसान संतुष्ट नहीं हैं। किसानों का कहना है कि यह कदम उनकी उम्मीदों के अनुरूप नहीं है और इससे ग्रामीण क्षेत्रों में निराशा का माहौल बना है।
इसी कारण किसान यूनियनों की कोऑर्डिनेशन कमिटी ने निर्णय लिया है कि 30 जून को चेन्नई में भूख हड़ताल आयोजित की जाएगी। इस आंदोलन का उद्देश्य सरकार पर दबाव बनाना है ताकि छोटे और सीमांत किसानों के 100 प्रतिशत कर्ज माफी के चुनावी वादे को पूरा किया जा सके। कमिटी ने सभी किसान संगठनों से इस आंदोलन में शामिल होने की अपील की है।
किसान नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं बल्कि किसानों के भरोसे और वादों की विश्वसनीयता से जुड़ा मामला है। आने वाले दिनों में यह आंदोलन राज्य में बड़ा राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बन सकता है।





