
CHENNAI: कच्चातिवू द्वीप को लेकर संसद में एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। सदन में इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। नेताओं ने कच्चातिवू द्वीप को लेकर पुराने फैसलों, इसके ऐतिहासिक महत्व और भारत के हितों से जुड़े मुद्दों पर अपनी-अपनी राय रखी।
बहस के दौरान विपक्ष ने सरकार से सवाल किए और कच्चातिवू द्वीप से जुड़े फैसले को लेकर जवाब मांगा। वहीं सरकार की ओर से कहा गया कि यह मामला देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों से जुड़ा गंभीर विषय है।
कच्चातिवू एक छोटा द्वीप है जो भारत और श्रीलंका के बीच समुद्री सीमा क्षेत्र में स्थित है। साल 1974 में भारत और श्रीलंका के बीच हुए समझौते के बाद यह द्वीप श्रीलंका के अधिकार क्षेत्र में चला गया था। इसके बाद से समय-समय पर इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है।
सदन में चर्चा के दौरान नेताओं ने मछुआरों की सुरक्षा, समुद्री अधिकार और दोनों देशों के संबंधों पर भी अपनी बात रखी। तमिलनाडु के मछुआरों से जुड़े मुद्दे को लेकर भी चिंता जताई गई।
सरकार ने कहा कि कच्चातिवू मामले को लेकर देश के हितों को ध्यान में रखते हुए सभी पहलुओं पर विचार किया जाता रहा है। वहीं विपक्ष ने मांग की कि इस विषय पर सरकार को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
कच्चातिवू विवाद लंबे समय से भारतीय राजनीति में चर्चा का विषय रहा है। संसद में हुई ताजा बहस के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है।





