
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के तिरुनेलवेली शहर स्थित नेल्लैयापर-कंदिमथियाम्मन मंदिर में 34 साल बाद एक विशेष धार्मिक आयोजन किया गया। इस अवसर पर पंचमूर्तियों को चांदी के रथ पर सड़कों पर घुमाया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय माहौल बन गया। यह आयोजन लंबे समय बाद दोबारा शुरू हुआ है, जिसे स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस मंदिर में हर वर्ष वैकासी महीने के दौरान विशेष उत्सव मनाया जाता है। परंपरा के अनुसार, अस्तमा नक्षत्र के ढलने पर नेल्लैयापर थिरुविलयादल त्योहार का आयोजन किया जाता है। यह त्योहार मंदिर की प्रमुख धार्मिक गतिविधियों में से एक है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।
जानकारी के अनुसार, 1992 तक इस त्योहार के दौरान रात के समय पंचमूर्तियों को चांदी के रथ पर सड़कों पर निकाला जाता था। यह परंपरा उस समय काफी खास मानी जाती थी और भक्तों के बीच इसका विशेष आकर्षण रहता था। बाद में किसी कारणवश यह आयोजन बंद हो गया था, जिसके चलते कई वर्षों तक यह परंपरा दोबारा नहीं निभाई गई।
अब 34 साल बाद इस परंपरा को फिर से शुरू किया गया है, जिससे स्थानीय लोगों में उत्साह देखा गया। मंदिर परिसर और आसपास के क्षेत्रों में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। रथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं ने देवताओं के दर्शन किए और धार्मिक उत्साह के साथ भाग लिया।
चांदी के रथ पर पंचमूर्तियों की यात्रा को लेकर मंदिर प्रशासन ने विशेष तैयारियां की थीं। पूरे मार्ग को सजाया गया और सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे, ताकि आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। जैसे ही रथ यात्रा शुरू हुई, भक्तों ने फूल बरसाकर और मंत्रोच्चार के साथ देवताओं का स्वागत किया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इस परंपरा के पुनः शुरू होने से क्षेत्र की सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान को मजबूती मिली है। कई बुजुर्ग श्रद्धालुओं ने बताया कि उन्होंने वर्षों बाद यह दृश्य देखा है, जिससे पुरानी यादें ताजा हो गईं।
त्योहार के दौरान मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना भी की गई और पारंपरिक विधियों का पालन किया गया। आयोजन में शामिल श्रद्धालुओं ने इसे एक ऐतिहासिक पल बताया और उम्मीद जताई कि आने वाले वर्षों में यह परंपरा नियमित रूप से जारी रहेगी।
इस तरह 34 साल बाद नेल्लैयापर-कंदिमथियाम्मन मंदिर में चांदी रथ यात्रा का आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण रहा, बल्कि इसने स्थानीय संस्कृति और परंपरा को भी एक नई ऊर्जा दी है।





