
Tamil Nadu तमिलनाडु: भारतीय सशस्त्र बलों में एक महत्वपूर्ण नेतृत्व परिवर्तन के तहत तमिलनाडु के जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि ने रविवार को तीनों सेनाओं के नए चीफ का पदभार संभाल लिया है। इस नियुक्ति के साथ ही देश की थलसेना, नौसेना और वायुसेना के समन्वय और रणनीतिक संचालन की जिम्मेदारी अब उनके नेतृत्व में आ गई है।
इससे पहले तीनों सेनाओं के चीफ रहे जनरल अनिल चौहान शनिवार को अपने पद से सेवानिवृत्त हो गए। उनके रिटायरमेंट के बाद यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी जनरल एन.एस. राजा सुब्रमणि को सौंपी गई है। उनके अनुभव और लंबे सैन्य करियर को देखते हुए उन्हें यह अहम पद दिया गया है।
जनरल राजा सुब्रमणि का सैन्य करियर काफी विस्तृत और महत्वपूर्ण रहा है। वह पिछले वर्ष 31 जुलाई को भारतीय सेना के वाइस चीफ के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद उन्होंने नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट में मिलिट्री एडवाइजर के रूप में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मामलों में योगदान दिया।
तीनों सेनाओं के नए चीफ का पदभार संभालने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए जनरल राजा सुब्रमणि ने कहा कि उनका मुख्य ध्यान तीनों सेनाओं के बीच बेहतर समन्वय यानी इंटीग्रेटेड ऑपरेशन को और मजबूत करने पर रहेगा। उन्होंने कहा कि आधुनिक समय की सुरक्षा चुनौतियों को देखते हुए सशस्त्र बलों में आवश्यक सुधारों को तेजी से लागू किया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देना उनकी प्राथमिकता होगी। विशेष रूप से हथियारों और सैन्य उपकरणों के बड़े पैमाने पर घरेलू उत्पादन को सुनिश्चित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे, ताकि भारत विदेशी निर्भरता को कम कर सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि रक्षा उत्पादन में स्वदेशी तकनीक और उद्योगों को आगे बढ़ाया जाएगा।
जनरल राजा सुब्रमणि ने देशवासियों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बल पूरी निष्ठा और साहस के साथ देश की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए हमेशा तैयार रहेंगे। उन्होंने कहा कि सेना का उद्देश्य केवल सुरक्षा सुनिश्चित करना ही नहीं, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए एक मजबूत और आधुनिक सैन्य ढांचा तैयार करना भी है।
उन्होंने आगे कहा कि तकनीकी बदलाव, संयुक्त सैन्य अभियानों की क्षमता और रणनीतिक तैयारियों को मजबूत करना समय की आवश्यकता है। इसके लिए तीनों सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल और आधुनिक युद्ध प्रणालियों का उपयोग बढ़ाया जाएगा।
इस बदलाव को भारतीय रक्षा व्यवस्था में एक महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है, जहां नेतृत्व स्तर पर नए दृष्टिकोण और सुधारों की अपेक्षा की जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह नियुक्ति देश की सुरक्षा रणनीति को और अधिक सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।





