तमिलनाडू
तमिलनाडु: बंद मोबाइल के साथ मंदिर में एंट्री, फोटो खींचने पर पाबंदी
Tara Tandi
11 Oct 2026 5:48 PM IST

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तमिलनाडु: तमिलनाडु के बड़े मंदिरों में जाने वाले भक्त अब अपने मोबाइल फोन अंदर ले जा सकते हैं, लेकिन शर्त यह है कि फोन स्विच ऑफ होने चाहिए। हिंदू धार्मिक और धर्मार्थ बंदोबस्ती (HR&CE) विभाग ने 1 सितंबर से लागू फोन पर लगी पूरी पाबंदी में ढील दी है। यह फैसला भक्तों की चिंताओं के बाद लिया गया, जिसमें उन्होंने फोन जमा करने के काउंटरों पर दिक्कत, देरी और इमरजेंसी के समय संपर्क टूटने जैसी बातें उठाई थीं।
हालांकि, फोटोग्राफी और वीडियो रिकॉर्डिंग पर सख्ती से रोक जारी रहेगी।
अधिकारियों ने कहा कि फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी पर लगी रोक का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाया जाएगा। नई व्यवस्था में संतुलन बनाने की कोशिश की गई है: भक्त अपने फोन अपने पास रख सकते हैं, लेकिन मंदिर के अंदर कॉल, मैसेज, फोटोग्राफी या सोशल मीडिया कंटेंट के लिए उनका इस्तेमाल नहीं कर सकते।
किन मंदिरों में यह लागू है
तिरुचि जिले में, यह छूट पांच प्रमुख मंदिरों के लिए लागू है: श्रीरंगम में श्री रंगनाथस्वामी मंदिर, समयपुरम मरियम्मन मंदिर, तिरुवनैकोइल में जंबुकेश्वरर मंदिर, वोरायूर में वेक्काली अम्मन मंदिर और रॉकफोर्ट में अरुलमिगु थायुमानवर स्वामी मंदिर।
उम्मीद है कि इस बदलाव से इन भीड़-भाड़ वाले मंदिरों में आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की परेशानी कम होगी। जो लोग फोन साथ नहीं ले जाना चाहते, वे पहले से मौजूद फोन-जमा करने की सुविधा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
फोन जमा करने के नियम जारी रहेंगे
जो भक्त अपने फोन बाहर रखना चाहते हैं, उनके लिए फोन-जमा करने वाले काउंटर काम करते रहेंगे। वोरायूर और तिरुवनैकोइल मंदिरों में प्रति फोन 5 रुपये का शुल्क लगता है, जबकि श्रीरंगम, समयपुरम और रॉकफोर्ट में यह सुविधा मुफ्त है।
पुरानी व्यवस्था में स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों को तय काउंटरों पर फोन जमा करना पड़ता था, जिससे भीड़ के समय लंबी लाइनें लग जाती थीं और मंदिर के कर्मचारियों का काम बढ़ जाता था।
दूसरे राज्यों से आने वाले लोगों के फोन को संभालना भी कामकाज को और मुश्किल बना देता था।
नियम क्यों बदले
HR&CE विभाग ने 1 सितंबर को ये पाबंदियां इसलिए लगाई थीं ताकि फोन के इस्तेमाल से पूजा में कोई बाधा न आए और दूसरे भक्तों को परेशानी न हो। इस कदम का मकसद मंदिर परिसर के अंदर फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग, सेल्फी और रील्स बनाने पर रोक लगाना भी था।
लेकिन व्यावहारिक दिक्कतें काफी बड़ी साबित हुईं। भक्तों ने शिकायत की कि उनसे उनके फ़ोन ले लिए जाते हैं, जबकि बातचीत, डिजिटल पेमेंट और इमरजेंसी में संपर्क करने के लिए ये डिवाइस बहुत ज़रूरी हैं। मंदिर के कर्मचारियों को भी बड़ी संख्या में कीमती फ़ोन सुरक्षित रखने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।
मंदिर प्रशासन ने एंट्री गेट पर नए नियमों के बारे में बताने वाले बैनर लगाने शुरू कर दिए हैं। लाउडस्पीकर से भी भक्तों को याद दिलाया जा रहा है कि फ़ोन स्विच ऑफ़ रखने होंगे और फ़ोटो या वीडियो रिकॉर्डिंग की इजाज़त नहीं है।
सुरक्षाकर्मी और मंदिर के कर्मचारी नियमों के पालन पर नज़र रखेंगे। अधिकारियों ने साफ़ किया है कि इस छूट का मतलब यह नहीं है कि उन गतिविधियों पर लगी पाबंदियां कम हो गई हैं जिनसे पूजा करने वालों को परेशानी हो या मंदिर के अंदर का आध्यात्मिक माहौल खराब हो।
नए नियमों के तहत, फ़ोन अनिवार्य रूप से जमा करने की जगह अब "साथ रखें लेकिन स्विच ऑफ़ रखें" वाला नियम लागू हो गया है। इससे भक्तों को अपने फ़ोन वापस मिल सकेंगे, और मंदिर प्रशासन का मुख्य मकसद भी पूरा होता रहेगा कि दर्शन शांति से और बिना किसी रुकावट के हों।
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