
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु के स्कूल शिक्षा विभाग ने माता-पिता और अभिभावकों को एक नए ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि कुछ लोग WhatsApp कॉल के जरिए खुद को सरकारी अधिकारी बताकर छात्रों के लिए स्कॉलरशिप देने का झांसा दे रहे हैं और लोगों से पैसे ऐंठने की कोशिश कर रहे हैं।
जानकारी के अनुसार, यह धोखाधड़ी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों के छात्रों के माता-पिता को निशाना बनाकर की जा रही है। आरोप है कि ठग स्कूल शिक्षा विभाग का नाम इस्तेमाल कर यह दावा करते हैं कि छठी से 12वीं कक्षा (प्लस 2) तक पढ़ने वाले छात्रों को 50,000 रुपये की आर्थिक सहायता के लिए चुना गया है।
इन कॉल्स में माता-पिता को बताया जाता है कि इस स्कॉलरशिप को प्राप्त करने के लिए पहले 18,000 रुपये जमा करने होंगे, जिसे बाद में वापस कर दिया जाएगा। विश्वास दिलाने के लिए ठग WhatsApp पर QR कोड भेजते हैं और उसी के जरिए ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए दबाव बनाते हैं। इसके अलावा, कई मामलों में फर्जी स्क्रीनशॉट भी भेजे जाते हैं, जिनमें यह दिखाया जाता है कि अन्य लोगों को पहले ही आर्थिक सहायता मिल चुकी है।
इन्हीं झूठे दावों के आधार पर कुछ अभिभावक ठगी का शिकार हो रहे हैं और बताए गए खातों में पैसे ट्रांसफर कर रहे हैं। बाद में उन्हें पता चलता है कि यह पूरी प्रक्रिया फर्जी थी और किसी भी तरह की सरकारी स्कॉलरशिप का ऐसा कोई प्रावधान नहीं है।
इस स्थिति को देखते हुए तमिलनाडु स्कूल शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सरकार की ओर से किसी भी स्कॉलरशिप या आर्थिक सहायता के लिए इस तरह की कोई अग्रिम राशि नहीं ली जाती है। विभाग ने कहा है कि किसी भी आधिकारिक योजना की जानकारी केवल सरकारी वेबसाइट, स्कूल प्रशासन या अधिकृत चैनलों के माध्यम से ही दी जाती है।
विभाग ने अभिभावकों से अपील की है कि वे किसी भी अनजान कॉल, संदेश या QR कोड के माध्यम से पैसे न भेजें और ऐसे किसी भी संदिग्ध संपर्क की तुरंत सूचना संबंधित स्कूल या पुलिस को दें। साथ ही, लोगों को सलाह दी गई है कि वे किसी भी प्रकार की व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले उसकी पूरी जांच करें।
बताया गया है कि वर्तमान में राज्य में स्कूल 4 जून से शुरू हो चुके हैं और सभी स्कूलों में पढ़ाई नियमित रूप से चल रही है। सरकार की ओर से छात्रों को मुफ्त किताबें, यूनिफॉर्म और अन्य शैक्षणिक सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है।
अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के साइबर फ्रॉड के मामलों पर निगरानी बढ़ाई जा रही है और साइबर अपराध शाखा को भी सतर्क किया गया है ताकि ऐसे गिरोहों की पहचान कर कार्रवाई की जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ इस तरह की ठगी की घटनाएं भी बढ़ रही हैं, इसलिए लोगों को अधिक जागरूक रहने की जरूरत है।





