तमिलनाडू

Tamil Nadu: पट्टिनापक्कम में सचिवालय के निर्माण के खिलाफ डीएमके ने उच्च न्यायालय का रुख किया

Tulsi Rao
23 Sept 2026 11:42 AM IST
Tamil Nadu: पट्टिनापक्कम में सचिवालय के निर्माण के खिलाफ डीएमके ने उच्च न्यायालय का रुख किया
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चेन्नई: विपक्षी पार्टी DMK ने मद्रास हाई कोर्ट में पट्टीनापक्कम में 1,200 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले नए सचिवालय-सह-विधानसभा परिसर के निर्माण के खिलाफ याचिका दायर की है।

माइलापुर के पूर्व विधायक धा. वेलु ने अपनी याचिका में कहा कि समुद्र के 500 मीटर के दायरे में कोई निर्माण नहीं होना चाहिए क्योंकि यह इलाका कोस्टल रेगुलेशन ज़ोन (तटीय नियमन क्षेत्र) के अंतर्गत आता है। उन्होंने कहा कि कोस्टल ज़ोन मैनेजमेंट अथॉरिटी से अनुमति ली गई है या नहीं, इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि भीड़-भाड़ वाली जगह पर सचिवालय बनाने से लोगों पर असर पड़ेगा। उन्होंने आगे कहा कि इससे इलाके के मछुआरों की आजीविका प्रभावित होगी और सचिवालय के निर्माण से जुड़े सरकारी आदेश को रद्द करने की मांग की।

सोमवार को चेन्नई के वकील आर.एस. तमिलवंदन ने भी एक जनहित याचिका (PIL) दायर की। अपनी याचिका में उन्होंने कहा कि अगर पट्टीनापक्कम के मछुआरा गांवों में सचिवालय बनाया जाता है, तो मछुआरों का कल्याण प्रभावित होगा। उन्होंने आगे कहा कि इस योजना से इलाके के गरीब लोग भी प्रभावित होंगे और निर्माण कार्य से भीड़-भाड़ बढ़ेगी, जिससे ट्रैफिक जाम की समस्या होगी।

तमिलवंदन ने कहा कि उन्होंने 12 सितंबर को सरकार को एक याचिका सौंपी थी, लेकिन सरकार ने उस पर कोई जवाब नहीं दिया। वकील ने सरकारी आदेश को रद्द करने के साथ-साथ सचिवालय के निर्माण पर अंतरिम रोक लगाने की भी मांग की।

इस प्रस्ताव की विपक्ष और वामपंथी दलों ने आलोचना की और इस कदम के खिलाफ प्रदर्शन भी किया। PWD मंत्री आधव अर्जुन ने कहा था कि मुख्यमंत्री ने अभी कोई अंतिम फैसला नहीं लिया है और किसी भी प्रोजेक्ट पर फैसला विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) के बाद ही लिया जाएगा।

आधव अर्जुन ने कहा कि जब किसी योजना की घोषणा की जाती है, तो उसकी विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट तैयार करवाना आम बात है और रिपोर्ट मिलने के बाद ही फैसला लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद मुख्यमंत्री फैसला लेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि अगर मछुआरों की आजीविका और सचिवालय के बीच कोई टकराव होता है, तो मुख्यमंत्री मछुआरों का साथ देंगे।

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