
Tamil Nadu तमिलनाडु: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राजनीतिक हलचल लगातार बढ़ती जा रही है। अब लेफ्ट पार्टियों ने भी थावेका नेता सी. जोसेफ विजय को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाने की मांग उठाई है। उन्होंने गवर्नर की भूमिका पर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि प्रक्रिया में देरी संविधान के अनुरूप नहीं है।
मार्क्सवादी नेता पी. शनमुगम ने बयान देते हुए कहा कि तमिलनाडु की जनता ने 108 विधायकों के साथ तमिलनाडु विक्ट्री पार्टी को सबसे बड़ी पार्टी के रूप में चुना है। उनके अनुसार, सबसे बड़ी पार्टी होने के आधार पर सी. जोसेफ विजय ने सरकार बनाने का दावा पेश किया है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) गवर्नर के माध्यम से राजनीतिक हस्तक्षेप कर रही है और यह संविधान के मूल सिद्धांतों के खिलाफ है।
शनमुगम ने यह भी कहा कि गवर्नर द्वारा विजय को शपथ दिलाने में देरी करना उचित नहीं है। उनके अनुसार, सरकार गठन की प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से रोका जा रहा है, जिससे लोकतांत्रिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
वहीं, कम्युनिस्ट ऑफ इंडिया के नेता एम. वीरपांडियन ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि गवर्नर को संविधान के अनुसार उस दल को अवसर देना चाहिए जिसके पास सबसे अधिक संख्या है, ताकि वह विधानसभा में अपना बहुमत साबित कर सके। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के एस.आर. बोम्मई केस सहित कई फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि इन निर्णयों में स्पष्ट किया गया है कि बहुमत परीक्षण विधानसभा में होना चाहिए।
वीरपांडियन ने कहा कि गवर्नर को संवैधानिक दायित्वों के तहत काम करना चाहिए और थावेका नेता विजय को विधानसभा में अपना बहुमत साबित करने का पूरा अवसर दिया जाना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी तरह की देरी उचित नहीं है।
इस पूरे घटनाक्रम ने तमिलनाडु की राजनीति को और अधिक गरमा दिया है। एक तरफ लेफ्ट पार्टियां सरकार गठन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की मांग कर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी जारी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि गवर्नर आगे क्या कदम उठाते हैं और क्या विजय को शपथ ग्रहण का अवसर मिलता है या नहीं।





